The News (All World Gayatri Pariwar)
Home Editor's Desk World News Regional News Shantikunj E-Paper Upcoming Activities Articles Contact US

ज्ञानदीक्षा से संकल्पित होकर नव प्रवेशार्थियों ने बढ़ाया राष्ट्र सेवा की ओर पहला कदम

[DSVV, Haridwar], Jul 20, 2017
विद्या वह जो अंदर से बाहर आये : स्वामी ब्रह्मेशानन्द जी 
जीवन में आध्यात्मिकता उतारने का यह श्रेष्ठ अवसर : डॉ पण्ड्याजी 
भारत के २३ राज्यों सहित ९ देशों के ५२५ नवप्रवेशी विद्यार्थी हुए दीक्षित 

हरिद्वार २० जुलाई। 
देवसंस्कृति विश्वविद्यालय शांतिकुंज के ३१वें ज्ञानदीक्षा समारोह में नवप्रवेशार्थी समाज और राष्ट्र सेवा की ओर अपना पहला कदम बढ़ाते हुए वैदिक सूत्रों में बंधे। देसंविवि में संचालित ४० विभिन्न कोर्स के लिए स्विट्जरलैण्ड, अमेरिका, चीन, जर्मनी, कजाकिस्तान, लातविया, आस्ट्रिया, रूस नेपाल सहित भारत के २३ राज्यों के ५२५ से अधिक छात्र- छात्राओं को दीक्षित किया गया। 

ज्ञानदीक्षा समारोह के मुख्य अतिथि गोवा राज्य के सद्गुरु फाउण्डेशन के प्रमुख स्वामी ब्रह्मेशानन्दजी  ने कहा कि विद्या वह है, जो अंदर से बाहर आये और जिससे समाज व राष्ट्र विकसित और प्रकाशवान बनें। विवि एक ऐसा स्थान है, जहाँ युवाओं के सर्वश्रेष्ठ गुणों को बाहर लाने के  लिए आचार्य एवं विद्यार्थी मिलकर एक साथ कार्य करते हैं। स्वामी जी ने कहा कि सात्विकता से भरे इस दिव्य वातावरण में मानवतावादी चिंतन को सदैव आत्मसात करें। इससे ही आपके भूतकाल के कुसंस्कार मिटेंगे और सुसंस्कार जागेंगे। उन्होंने कहा कि विधार्थी का सबसे बड़ा गुण होता है क्रोध के ऊपर संयम बनाकर रहना। 

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में देसंविवि के कुलाधिपति श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्याजी ने कहा कि ज्ञानदीक्षा संस्कार विद्यार्थियों को नवजीवन प्रदान करने वाला है। जीवन में आध्यात्मिकता को उतारने का यह श्रेष्ठ अवसर है। उन्होंने कहा कि यहाँ पाठ्यक्रम के आलावा जीवन जीने की कला सिखाई जाती है, जो विद्यार्थियों को ऊँचा उठाने में सहायक है। कुलाधिपति ने शिक्षा एवं विद्या, ज्ञान और विज्ञान तथा संस्कृति एवं सभ्यता के मूलभूत अन्तर को स्पष्ट किया। उन्होंने आर्षग्रंथ एवं गीता का उल्लेख करते हुए सफलता के विविध सूत्र बताये। कुलाधिपति डॉ. पण्ड्याजी ने संकल्पशक्ति के धनी स्वामी विवेकानंद, महाराणा प्रताप, देशसेवा में प्राणों की आहुति देने वाले सैनिकों तथा अपने आचरण से शिक्षा देने वाले पूज्य पं० श्रीराम शर्मा आचार्य जैसे महापुरुषों को अपने रोल मॉडल बनाने की बात कही। प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी ने ज्ञानदीक्षा की महत्ता बताते हुए कहा कि आज व्यक्ति की नहीं, व्यक्तित्व की जरूरत है। नीति की नहीं, नियत की आवश्यकता है। कुलपति श्री शरद पारधी ने स्वागत भाषण दिया। 

इससे पूर्व समारोह का शुभारंभ कुलाधिपति डॉ. पण्ड्याजी एवं स्वामी ब्रह्मेशानन्द जी ने दीप प्रज्वलन कर किया। विवि के कुलगीत के बाद देसंविवि के कुलपति श्री शरद पारधी ने अतिथियों का स्वागत किया। श्री सूरज प्रसाद शुक्ल ने नवप्रवेशार्थी छात्र- छात्राओं को वैदिक रीति से ज्ञानदीक्षा दिलाई। कुलाधिपति डॉ. पण्ड्याजी ने उन्हें ज्ञानदीक्षा के संकल्प दिलाया। इस मौके पर विवि की ई- न्यूज पेपर 'रेनासा' एवं रिसर्च जर्नल का अतिथियों ने विमोचन किया। इस अवसर पर देसंविवि के कुलसचिव श्री संदीप कुमार जी, समस्त आचार्यगण, शांतिकुंज परिवार के  वरिष्ठ सदस्य तथा देश- विदेश के कोने- कोने से आये विद्यार्थी एवं उनके अभिभावकगण उपस्थित रहे। 






Click for hindi Typing


Related Stories
Recent News
Most Viewed
Total Viewed 132

Comments

Post your comment


Warning: Unknown: write failed: No space left on device (28) in Unknown on line 0

Warning: Unknown: Failed to write session data (files). Please verify that the current setting of session.save_path is correct (/var/lib/php/sessions) in Unknown on line 0