The News (All World Gayatri Pariwar)
Home Editor's Desk World News Regional News Shantikunj E-Paper Upcoming Activities Articles Contact US

विश्व पटल पर पहुँचता विश्वविद्यालय

कालचक्र के बढ़ते कदमों के साथ परिसर के विश्वव्यापी आयाम अति तीव्र गति से विस्तृत होते जा रहे हैं । विश्वविद्यालय परिसर में संपन्न होने वाली राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों निरंतर नए-नए आयामों का सृजन कर रही हैं । यहाँ की मौलिकता और अनूठेपन की ओर भारत ही नहीं, अपितु सारे विश्व का शिक्षा जगत सहज आकर्षित हो रहा है । यही कारण है कि इस परिसर की दिव्यता और विशिष्ट शिक्षण-प्रक्रिया को देखने-समझने- अनुभव करने के लिए देश-विदेश से निरंतर गणमान्य लोग आते रहे हैं । साथ ही यहाँ की शिक्षण-पद्धति से प्रभावित होकर विश्व के अनेक उच्च शिक्षण संस्थानों ने देव संस्कृति विश्वविद्यालय के विभिन्न आयामों के साथ समझौते की पहल कर संबद्धता स्थापित की है । इसी मृंखला में विगत दिनों विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति के नेतृत्व में चीन के यिन्तु विश्वविद्यालय के साथ एक महत्त्वपूर्ण समझौते (एम० ओ०यू०) पर हस्ताक्षर हुए हैं । यह समझौता देव संस्कृति एवं चीन में स्थित यून्नान प्रांत के यिन्जु विश्वविद्यालय के बीच भारत-चीन योग कॉलेज में विभिन्न विषयों के शिक्षण एवं शैक्षणिक कार्यक्रमों को लेकर हुआ है । इसमें योग एवं आयुर्वेद के छोटे-छोटे पाट्यक्रमों को भी चलाने पर सहमति बनी है । इसके साथ ही शिक्षकों व विद्यार्थियों को शैक्षणिक भ्रमण के लिए एकदूसरे के यहाँ आने-जाने पर भी सहमति प्राप्त हुई । यिन्जु विश्वविद्यालय की संकायाध्यक्ष प्रो० ल्यु फेंग ने अपने देव संस्कृति विश्वविद्यालय परिसर भ्रमण कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति से मुलाकात की एवं यहाँ स्थित योग की प्राचीन पद्धतियों की भूरि- भूरि प्रशंसा की । उन्होंने कहा यह विश्वविद्यालय भारतीय संस्कृति की परंपरागत पद्धतियों को जिस ढंग से संरक्षित कर रहा है वह एक सराहनीय कदम है । डॉ० प्रणव पण्ड्या जी ने उन्हें योग एवं आयुर्वेद के परंपरागत शोध व उसकी उपयोगिता का परिचय कराते हुए योग को दैनिक जीवन में किस प्रकार शामिल किया जाए इस संदर्भ में मार्गदर्शन प्रदान किया । विशेष बात यह रही कि प्रो० फेंग ने इस समझौते के स्थापित होने के पूर्व दो माह की अवधि तक परिसर में रहकर यहाँ के खान-पान, जीवनशैली, वेशभूषा, अध्ययन- अध्यापन आदि का वैज्ञानिक ढंग से अध्ययन किया, जिसकी परिणति शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संबंधों के रूप में सामने आई । इसी क्रम में विगत दिनों लॉटविया की राजदूत इल्जेरुसेस द्वारा देव संस्कृति विश्वविद्यालय परिसर का भ्रमण किया गया । इस दौरान उन्होंने आयुर्वेदिक जीवनशैली, खान-पान, दिनचर्या आदि के महत्त्व एवं उपयोगिता के संदर्भ में विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों से चर्चा की तथा योग एवं आयुर्वेद से संबंधित जानकारियाँ प्राप्त कीं । श्रीमती इल्जेरुसेस द्वारा परिसर में स्थापित बाल्टिक सेन्टर का भी विशेष भ्रमण किया गया । उन्होंने विश्वविद्यालय के सहयोग से बने बाल्टिक सेन्टर में हो रहे शोधकार्यों की भी सराहना की एवं कहा कि बाल्टिक सेन्टर के उद्देश्यों की पूर्ति में देव संस्कृति विश्वविद्यालय अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है । इस संयुक्त प्रयास के कार्यों को बाल्टिक देशों एवं भारतीय संस्कृति के विभिन्न तथ्यों पर समानता के विभिन्न पक्षों को भविष्य में सामने लाया जाएगा । उन्होंने विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति एवं कुलाधिपति से भी मुलाकात की । उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति के विभिन्न आयामों को नए सिरे से उजागर करना ही देव संस्कृति विश्वविद्यालय का लक्ष्य है । साथ ही उन्होंने सांस्कृतिक दृष्टि से भविष्य के लिए कई कार्यो हेतु भी मार्गदर्शन प्रदान किया । परिसर भ्रमण के अगले क्रम में इंडोनेशिया से पधारे 25 सदस्यीय दल ने देव संस्कृति विश्वविद्यालय का भ्रमण किया । इस दल के भ्रमण का उद्देश्य भारतीय संस्कृति को जानना एवं योग, आयुर्वेद व प्राकृतिक चिकित्सा का प्रशिक्षण प्राप्त करना था । दल ने योग विभाग के पॉली क्लीनिक में अपना प्रशिक्षण प्राप्त किया । विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों द्वारा पूरे दल को वैकल्पिक चिकित्सा के महत्त्व तथा वर्तमान में इसकी उपयोगिता से भी परिचित कराया । दल ने विश्वविद्यालय के पर्यटन, योग, कंप्यूटर ग्रामीण प्रबंधन मनोविज्ञान संचार पर्यावरण आदि विभागों का भ्रमण किया व आवश्यक जानकारी प्राप्त की । इस अवसर पर प्रतिकुलपति ने दल को विश्वविद्यालय की जीवनशैली एवं यौगिक वातावरण के महत्त्व को समझाया । दल के अनुसार देव संस्कृति विश्वविद्यालय प्राचीन भारतीय पद्धतियों एवं मूल्यों का संगम है । यहाँ दिव्य वातावरण और प्राकृतिक उपचार पद्धति का मिलन अद्भुत है । ऐसे वातावरण में शिक्षा ग्रहण करना ही किसी सौभाग्य से कम नहीं है । पूरा दल परिसर के दैवीय वातावरण से एवं यहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य से अत्यंत प्रभावित था । उन्होंने गोशाला, वाटिका, स्मृति उपवन आदि का भी भ्रमण किया । इसी कडी़ के अगले क्रम मे विल्नियस विश्वविद्यालय लिथुएनिया के पूर्व कुलपति एवं प्राच्य अध्ययन विभाग के निदेशक प्रो० अडिय्स वीनोरियस परिसर में पधारे । उन्होंने संस्कृति एवं लिथुएनिया विषय पर व्याख्यान दिया । इस व्याख्यान में उनके द्वारा बताया गया कि बाल्टिक देशों से भारतीय संस्कृति बहुत मिलती- जुलती है । भारतीय संस्कृति की परंपरा एवं रीति-रिवाज तथा लिथुएनिया, स्टोनिया एवं लॉटविया देशों में गहन रूप से समानता है । प्रो. वीनोरियस द्वारा संस्कृति, संस्कृति चिह्न, शब्द एवं विभिन्न परंपराओं की व्याख्या की गई । उन्होंने संस्कृत एवं संस्कृति विभाग के सभी सदस्यों को अलग से प्रशिक्षण भी प्रदान किया । साथ ही पर्यटन विभाग में भी सांस्कृतिक संवाद एवं सांस्कृतिक पर्यटन पर व्याख्यान दिया । कार्यक्रम समापन के उपलक्ष्य में विश्वविद्यालय के श्रद्धेय कुलाधिपति डॉ० प्रणव पण्ड्या जी ने कहा कि समस्त विश्व एक वसुधा के समान है । भारतीय संस्कृति की इस वैश्विक भावना को कैसे आगे बढ़ाया जाए यह एक चुनौती है । सभी संस्कृतियाँ अपने-आप में पूर्ण हैं, उनमें सही ढंग से आपसी समझ द्वारा सर्वधर्म समभाव और विश्व एकता की भावना को स्थापित किया जा सकता है । परिसर की इस भ्रमण श्रृंखला में 18 से 28 मई के बीच देव संस्कृति विश्वविद्यालय के तीन आचार्यों द्वारा पोलैंड का शैक्षणिक भ्रमण किया गया । यह भ्रमण यूरोप की सबसे प्रतिष्ठित स्कॉलरशिप कार्यक्रम में से एक इरेस्मस मुन्डस स्कॉलरशिप के अन्तर्गत किया गया । भ्रमण पर गए श्री ज्वलंत भावसार, श्री चंद्रशेखर और डॉ० इप्सित प्रताप सिंह के अनुसार भारतीय संस्कृति के मूल्य व योग के समग्र स्वास्थ्य के सिद्धांत को पोलैंड में पहुँचाना ही भ्रमण का मुख्य उद्देश्य था । इस कार्यक्रम के अंतर्गत काजीमिर्ज विल्की विश्वविद्यालय, बिडगोस्ज ( पोलैंड) में विविध प्रकार के शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किए गए जिनमें शिक्षकों का विद्यार्थियों के साथ बेहतर तालमेल, संवाद क्षमता, एकाग्रता आदि विषयों पर रचनात्मक कक्षाऐं ली गईं एवं प्रशिक्षण प्रदान किया गया । आचार्यों द्वारा अपने कार्यक्रम के मध्य चरण में रूस की स्टेट यूनीवर्सिटी के विद्यार्थियों को भी योग एवं संस्कृति पर प्रशिक्षण दिया गया । साथ ही देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि आचार्यो द्वारा काजीमिर्ज विल्की विश्वविद्यालय के ग्रंथालय में पूज्य गुरुदेव के वाड्मय की स्थापना भी की गई । दल के विश्वविद्यालय' लौटने पर विश्वविद्यालय परिवार ने उन्हें भ्रमण की सफलता पर शुभकामनाएँ प्रदान कीं । अगले क्रम में नीति आयोग, भारत के सदस्य एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक श्री सारस्वत जी ने देव संस्कृति विश्वविद्यालय एवं शांतिकुंज का भ्रमण किया । भ्रमण के दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय के सभी विभागों, गोशाला, एक्यूप्रेशर पार्क महाकाल मंदिर, वनौषधि वाटिका आदि का भ्रमण किया । श्री सारस्वत जी परिसर के वातावरण से अत्यंत प्रभावित हुए । उनके द्वारा योग एवं आयुर्वेद के क्षेत्र में बड़े स्तर पर हो रहे शोधकार्यो को भी सराहा गया । उन्होंने श्रद्धेय कुलाधिपति जी से भी मुलाकात की एवं उनसे योग, आयुर्वेद की परंपरागत विधियों पर मार्गदर्शन प्राप्त किया । इसी क्रम में देव संस्कृति विश्वविद्यालय के श्री नरेंद्र गिरि द्वारा माउन्टेनियरिंग की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया गया । श्री गिरि ने उत्तरकाशी स्थित नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ माउन्टेनियरिंग के निर्देशन में डी०के०डी० पीक को पार करते हुए 18,700 फीट गंगोत्री ग्लेशियर की ऊँचाई पार की । उन्होंनें पीक क्लाइब के बाद देव संस्कृति विश्वविद्यालय का झंडा लहराया । श्री गिरि की सफलता एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन पर पूरे विश्वविद्यालय परिसर ने उनको बधाई! दी । इन्हीं दिनों श्रद्धेय कुलाधिपति के मार्गदर्शन में स्थापित वैज्ञानिक अध्यात्मवाद विभाग के समन्वयक डॉ पियूष त्रिवेदी को वीनस इंटरनेशनल अवार्ड के लिए चयनित किया गया। यह अवार्ड उन्हें सोशल साइंस में आउट स्टैंडिंग फैकल्टी के रूप में दिया गया है । डॉ० पीयूष को शैक्षणिक विकास के साथ ही आध्यात्मिक मनोविज्ञान के क्षेत्र में रचनात्मक कार्यों में योगदान की दृष्टि से नामित किया गया था । इस क्षेत्र में उन्होंने कुलाधिपति श्रद्धेय डॉ० प्रणव पण्ड्या के मार्गदर्शन में अनेक शोधकार्य एवं शैक्षणिक कार्य संपन्न किए हैं । डॉ० त्रिवेदी ने कहा कि श्रद्धेय कुलाधिपति जी की वैज्ञानिक अध्यात्मवाद की कक्षाओं का उन पर गहरा प्रभाव पड़ा एवं यहीं से उन्हें प्रेरणा प्राप्त होती है । इस अवसर पर कुलपति जी एवं प्रतिकुलपति ने उन्हें शुभकामनाएँ प्रदान कीं एवं वैज्ञानिक अध्यात्मवाद को समाज से जोड़ने के प्रयास हेतु मार्गदर्शन प्रदान किया । विश्वविद्यालय परिसर में यह सभी के लिए अत्यंत हर्ष और गौरव का विषय है कि विद्यार्थियों एवं आचार्यों ने कडी मेहनत करते हुए इस वर्ष नेशनल एलिजीबिलिटी टेस्ट (net) में सराहनीय प्रदर्शन किया । परिसर में यह पहली बार हुआ कि 8० से अधिक व्यक्तियों ने जेआरएफ एवं नेट परीक्षा उत्तीर्ण की है । इस उपलब्धि से विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रक्रिया में और अधिक गुणवत्ता बढेगी एवं विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलेगा । योग, संगीत एवं मनोविज्ञान में उत्तीर्ण हुए प्रतिभागियों ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय इस परिसर के वातावरण श्रद्धेय कुलाधिपति डॉ० प्रणव पण्ड्या जी के मार्गदर्शन एवं आदरणीया शैल जीजी के स्नेह संरक्षण को दिया । परिसर के सभी नेट/जेआरएफ उत्तीर्ण प्रतिभागियों प्रतिकुलपति एवं कुलसचिव ने बधाइयाँ दीं । योग के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस परिसर की अलग पहचान है । यहाँ से समय-समय पर देश- विदेश में योग से जुडी गतिविधियाँ संचालित की जाती हैं । इसी क्रम में देव सुंस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा भेजे गए डॉ० ऋतुध्वज सिंह ने वियतनाम, हनोई में योग एवं भारतीय मूल्यों का परचम लहराकर परिसर का गौरव बढाया । भाषा विभाग के डॉ ऋतुध्वज सिंह का यह प्रवास दो माह का था । उन्हें हनोई, वियतनाम के एडिको आर्ट, स्पोर्ट एंड कल्वर कंपनी ने हनोई के सरकारी अध्यापकों के लिए -चलाए जा रहे विशेष अध्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम (टीचर ट्रेनिंग प्रोग्राम) में योग एवं संस्कृति विषय के विशेषज्ञ के रूप में व्याख्यानों के लिए आमंत्रित किया गया था । इस प्रवासकाल में डा० ऋतुध्वज ने योग दर्शन, कर्मयोग, ज्ञानयोग, भक्तियोग के साथ- साथ गायत्री मंत्र का विज्ञान व यज्ञ का वैज्ञानिक व आध्यात्मिक पक्ष रखते हुए भारतीय संस्कृति के विषय में विस्मृत जानकारी प्रदान की । इसके साथ ही डॉ० सिंह ने विश्व योगदिवस के अवसर पर हनोई में विशाल जनसमुदाय को योगाभ्यास कराया, जिसमें हनोई के अनेक गणमान्य व शीर्ष पदाधिकारी जन सम्मिलित हुए । उक्त कार्यों के साथ ही डॉ० ऋतुध्वज सिंह ने निःशुल्क स्वास्थ्य परामर्श भी प्रदान किया । विशेष बात यह रही कि डॉ० सिंह ने सभी प्रतिभागियों को यज्ञ, दीपयज्ञ, मंत्रलेखन एवं सामूहिक जप व ध्यान कराया व इनका प्रशिक्षण भी प्रदान किया । उनके परिसर लौटने पर श्रद्धेय कुलाधिपति डॉ० प्रणव पण्ड्या जी द्वारा उन्हें शुभकामनाएँ व आशीर्वाद प्रदान किया गया । इस अवसर पर प्रतिकुलपति जी ने कहा कि हमारे आचार्यगण योग, संस्कृति एवं अध्यात्म के क्षेत्र में देश-विदेश में जाकर सराहनीय कार्य कर रहे हैं । इससे हमारे देश एवं संस्कृति का गौरव बढ रहा है । परिसर की आंतरिक गतिविधियों में विश्वविद्यालय के योग विभाग के पॉली क्लीनिक केंद्र में 21 - 27 जून तक विशाल योग शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें देश के सात राज्यों से आए सैकड़ों प्रतिभागियों ने भागीदारी की । शिविर के समन्वयक डॉ० अमृतलाल गुरुवेंद्र के अनुसार, इस विशेष शिविर में योग एवं शारीरिक स्वास्थ्य के पक्षों, जैसे- आसन; प्राणायाम इत्यादि के माध्यम से लोगों में स्वास्थ्य जागरूकता फैलाई गई । साथ ही अष्टांग योग के शारीरिक मानसिक सामाजिक एवं आध्यात्मिक पक्षों पर कार्यशालाएँ संपन्न कराई गई । इस विशेष शिविर में एक ओर पंचकर्म, नेचुरोपैथी, फिजियोथेरेपी, काउन्सिलिग आदि के द्वारा उपचार किया गया तो दूसरी ओर मर्म चिकित्सा, एक्यूप्रेशर, संगीत चिकित्सा, सुजोक चिकित्सा आदि के माध्यम से लोगों की समस्याओं का समाधान किया गया । इसके समापन अवसर पर कुलपति श्री शरद पारधी जी ने कहा कि विश्वविद्यालय में समय-समय पर योग शिविरों के आयोजन का उद्देश्य जनसामान्य तक योग को पहुँचाना एवं स्वास्थ्य जागरूकता को बढाना है । योग के विभागाध्यक्ष प्रो० सुरेश वर्णवाल ने जीवन में योग का महत्त्व समझाते हुए सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया ।






Click for hindi Typing


Related Stories
Recent News
Most Viewed
Total Viewed 49

Comments

Post your comment


Warning: Unknown: write failed: No space left on device (28) in Unknown on line 0

Warning: Unknown: Failed to write session data (files). Please verify that the current setting of session.save_path is correct (/var/lib/php/sessions) in Unknown on line 0