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बाल संस्कारशाला कार्यशाला, 27 एवं 28 जुलाई 2013


राष्ट्र की सच्ची पूंजी उसके नागरिक होते हैं और एक सभ्य शालीन, राष्ट्रभक्त नागरिक का निर्माण आज की सर्वोपरि आवश्यकता है। भौतिक साधन सुविधाओं की दृष्टि से हमारा देश प्रगतिशील देशों की श्रेणी में खडा है पर शानदार व्यक्तित्वों की कमी सर्वत्र अखरती है। साधनों का अम्बार है सधे व्यक्तित्व और चाहिये। इसी सर्वोपरि राष्ट्रीय आवश्यकता का समाधान है बाल संस्कार शाला। बालकों के बौद्धिक, नैतिक और सांस्कृतिक विकास की व्यवस्थित कार्ययोजना है बाल संस्कार शाला। किसी विचारक ने सही कहा है- बचपन पचपन का पिता होता है” व्यक्ति प्रौढ़ावस्था में जो आचरण करता है उसकी जड़ें बचपन में होती हैं।

 शिक्षा के साथ विद्या का समन्वय करते हुये बालकों को सभ्यता के साथ संस्कृति का शिक्षण बाल संस्कार शाला में सम्पन्न होता है। अखिल विश्व गायत्री परिवार पूरे देश में एक लाख बाल संस्कार शालायें चलायेगा और अभी तक पंद्रह हजार बाल संस्कार शालायें चल रहीं हैं। इसी श्रृंखला में युग ऋषि पं॰ श्रीराम शर्मा आचार्य जी की जन्मभूमि आंवलखेडा में दो दिवसीय बाल संस्कार कार्यशाला आयोजित की गई है जिसमें उ॰प्र॰ के सभी जिलों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। उपजोन, जोन समन्वयक, उपजोन समन्वयक एवं स्थानीय एवं जिला समन्यवक एवं जहाँ बाल संस्कार शाला चल रही है ,या उसका प्रयास जारी है ,उन सभी को आंवलखेड़ा जोन पर प्रशिक्षण दिया गया।


कार्यशाला में इस दिन प्रातःकाल में गुरुजी के साधना के गवाह रहे तालाब के तट पर ध्यान साधना, योग एवं प्रार्थना का क्रम संपन्न हुआ। कार्यशाला के प्रतिभागियों द्वारा जन्मभूमि पर स्वच्छता श्रमदान भी किया गया। समापन सत्र में गायत्री शक्तिपीठ के व्यवस्थापक एवं उ॰प्र॰ अंचल के प्रभारी श्री वीरेन्द्र तिवारी ने बताया कि उ॰प्र॰ के 75 जिलों में आगामी छह महीनों में 750 बाल संस्कार शालायें आरंभ की जायेंगी।









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