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शांतिकुंज से जुड़कर आत्म विकास और ग्रामोत्थान की विधाएँ तलाशने में जुट गये हैं आई.आई.टी. रुड़की के विद्यार्थी

[शांतिकुंज], Dec 27, 2017
आई.आई.टी. रुड़की के १६ विद्यार्थियों का एक दल श्री मनोज सारदा और श्री अमित त्रिपाठी के नेतृत्व में शांतिकुंज आया। वे शांतिकुंज द्वारा सामाजिक क्षेत्र, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र के उत्थान के लिए किये जा रहे कार्यों का अध्ययन करने यहाँ आये थे। शांतिकुंज से जुड़कर वे मन में अंकुरित हो रहे राष्ट्रसेवा के संस्कारों को कैसे मूर्तरूप दे सकते हैं, यह समझने की उनकी प्रबल इच्छा थी।देव संस्कृति विवि. में ग्राम प्रबंधन विभाग प्रभारी श्री डी.पी. सिंह ने इन विद्यार्थियों को विवि. में चल रहे ग्राम विकास के विविध प्रकल्प-गौशाला, सौर ऊर्जा संयंत्र, गोबर गैस प्लांट, जैविक खाद निर्माण, गौ-उत्पाद, कचरा निस्तारण, हथकरघा, हस्त निर्मित कागज उद्योग आदि दिखाते हुए ग्रामोत्थान में स्वावलम्बन की भूमिका विस्तार से समझायी। अतिथि विद्यार्थी इन्हें देखकर बहुत प्रभावित नजर आये। उन्हें कुटीर उद्योगों को गाँवों में स्थापित करने का लक्ष्य मिला। ये विद्यार्थी शांतिकुंज, देव संस्कृति विश्वविद्यालय  और ब्रह्मवर्चस में व्यक्तित्व विकास के लिए किये जा रहे विभिन्न प्रयोगों और पाठ्यक्रमों का अध्ययन करने के लिए विशेष रूप से उत्सुक थे, क्योंकि वे कुछ माह पूर्व शांतिकुंज से उनके बीच पहुँचे श्री आशीष सिंह के व्यक्तित्व और विचारों से प्रेरित होकर ही यहाँ आये थे। उनसे मिली प्रेरणा के बाद आई.आई.टी. रुड़की में ही कुछ विद्यार्थियों का एक समूह अध्यात्म की ओर आकर्षित हुआ है। यह समूह गायत्री उपासना, ध्यान, प्राणायाम जैसे प्रयोगों का प्रभाव भी अपने जीवन में स्पष्ट रूप से देख रहा है। समूह के दो प्रतिनिधि अब नोएडा और गुड़गाँव में पहुँचकर गायत्री परिवार के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। युवा अभियंता आदरणीय डॉ. साहब और आदरणीया जीजी से मिलकर गद्गद हो गये। वे गुरुवर का ढेर सारा साहित्य साथ लेकर प्रज्ञागीत गुनगुनाते हुए लौटे। उल्लेखनीय है कि यह दल आई.आई.टी. रुड़की में हर माह पाँच हजार रुपये का साहित्य बेचता और बाँटता है। अध्यात्म अत्यंत प्रामाणिक और विषद् विज्ञान है। यह सिद्ध करने के लिए इसे अपनाने और उसकी सिद्धियों से समाज को धन्य बनाने वाले आप जैसे प्रबुद्ध युवाओं की आवश्यकता है। आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी






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