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वैश्विक समस्याओं के समाधान के लिए सामूहिक सूर्य साधना में भागीदार बनें देशवासी-डॉ. प्रणव पण्ड्या
हरिद्वार, 19 अक्टूबर।
    नवरात्रि शक्ति साधना का पर्व है। भारत वर्ष में करोड़ों लोग इन दिनों दुर्गा, लक्ष्मी, काली के रूप में नारी शक्ति की पूजा करते हैं, उससे शक्ति की कामना करते हैं। लेकिन हमारा दुर्भाग्य है कि जिस देश में नारी को इतना सम्मान दिया जाता है, उसी देश में नारी पर तरह-तरह के अत्याचार किये जा रहे हैं। इतनी जागरूकता के बावजूद कन्याभ्रूण हत्या रुकी नहीं है। नारी पर हो रहे अत्याचार की घटनाएँ सभ्य समाज को शर्मसार कर देती हैं। यह आत्म समीक्षा का समय है। नारी के प्रति हृदय में सम्मान बढ़े, उस पर हो रहे अत्याचार को रोकने के लिए संकल्प जगे कदम बढें़, तभी हमारी नवरात्रि उपासना सार्थक है।
    गायत्रीतीर्थ-शांतिकुंज में नवरात्रि साधना करने आये साधकों को संबोधित करते हुए यह विचार शांतिकुंज प्रमुख   डॉ. प्रणव पण्ड्या ने व्यक्त किये। इस अवसर पर उन्होंने वर्तमान समय की विकृत मानसिकता और उससे उपजी तमाम समस्याओं की समीक्षा करते हुए सूर्य में चल रही प्रतिकूल हलचलों को इसका मुख्य कारण बताया।
    डॉ. पण्ड्या ने वैज्ञानिकों की शोध का प्रमाण देते हुए बताया कि अप्रैल 2014 तक सौर कलंक, सूर्य पर चुंबकीय तूफानों जैसी प्रतिकूलताएँ तीव्र होंगी। इन्हें शांत करने के लिए उन्होंने सामूहिक सूर्य उपासना करने की आवश्यकता बतायी। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2012-13 को गायत्री परिवार सौर साधना वर्ष के रूप में मना रहा है। गायत्री परिवार के करोड़ों लोग सूर्य गायत्री मंत्र के जप के साथ व्यक्तिगत एवं सामूहिक अनुष्ठïान कर रहे हैं।
    डॉ. प्रणव जी ने देशवासियों से इस अनुष्ठïान में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वïान किया। उन्होंने कहा कि सौर कलंकों का प्रतिकूल प्रभाव व्यक्तिगत, शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य और चिंतन पर पड़ता है, जिनके कारण ही सामाजिक समस्याएँ उभरती हैं। उन्होंने सूर्य का ध्यान, सूर्यवेधन प्राणायाम, सूर्य गायत्री मंत्र जप, गायत्री मंत्र जप अथवा न्यूनतम सूर्य भगवान को एक लोटा अघ्र्य देकर इस साधना अनुष्ठïान में प्रतिदिन नियमित रूप से भागीदारी करने का आह्वïान देशवासियों से किया।
    इन दिनों गायत्रीतीर्थ-शांतिकुंज में नवरात्रि के अंतर्गत पूरे देश से आये लगभग 2000 साधक और 1000 आश्रमवासी 2400 गायत्री महामंत्र जप का अनुष्ठïान कर रहे हैं। शांतिकुंज के दिव्य आध्यात्मिक वातावरण में ब्रह्मïमुहूर्त में पंचकोशी ध्यान साधना, आसन-प्राणायाम, यज्ञ, देवदर्शन और साधक मनोभूमि को दिव्य पोषण प्रदान करने वाले उद्ïबोधन साधकों को नित नयी ऊर्जा प्रदान करते हैं। डॉ. प्रणव जी इसी क्रम में नवरात्रि साधना का विशेष संदेश दे रहे थे। उन्होंने गायत्री साधकों को अपने इष्टï, आराध्य, गुरुदेव पं.श्रीराम शर्मा आचार्य एवं माता भगवती देवी शर्मा के जीवन से सीखने और उनका अनुगमन करने का आह्वïान किया। गायत्री परिवार द्वारा पूरे विश्व में चलाये जा रहे विचार क्रांति अभियान को प्रखर बनाने के लिए युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी के विचारों को जन-जन तक पहुँचाने का आह्वïान किया। इसके साथ ही वृक्षारोपण, जलशुद्धि, आदर्श ग्राम विकास जैसे राष्टï्रीय ख्याति प्राप्त अभियानों की जानकारी देते हुए इन आन्दोलनों को अधिकाधिक सफल बनाने का आह्वïान भी किया। यूके, जिम्बाम्वे, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कुवैत से आये 10 परिवार भी शांतिकुंज में इन दिनों गायत्री अनुष्ठïान कर रहे हैं।


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