हजारों श्रद्धालुओं ने लिए उज्ज्वल भविष्य की स्थापना में भागीदारी के संकल्पनववर्ष के प्रभात की प्रथम किरणों के साथ अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा घोषित समूह साधना वर्ष का शुभारंभ हुआ। संस्था प्रमुख श्रद्धेया शैल जीजी और श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या ने नववर्ष के उपलक्ष्य में सभी साधकों को प्रसाद और समूह साधना वर्ष का अभिनंदन पत्र प्रदान करते हुए गायत्रीतीर्थ-शांतिकुंज के मंगल आशीष प्रदान किये।                  वेदमूर्ति, तपोनिष्ठ पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी एवं परम वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी के पूरे देश से आये हजारों शिष्य-साधकों ने वर्ष 2014 का शुभारंभ ध्यान साधना, गायत्री महामंत्र के सामूहिक जप, यज्ञ और गुरु चरण पादुकाओं के प्रणाम के साथ किया। पूर्व संध्या पर उन्हें संबोधित करते हुए डॉ. प्रणव पण्ड्या ने समूह साधना वर्ष की महत्ता और कार्यक्रमों पर विस्तार से प्रकाश डाला।                 डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने वेद, उपनिषदों के अनेक श्लोक प्रस्तुत करते हुए कहा कि हमारी संस्कृति सदैव सामूहिक प्रयासों को प्रोत्साहित करती रही है। असुरता के निवारण के लिए दुर्गा का अवतरण देवताओं के सामूहिक योगदान से हुआ था। भगवान राम के वनवास के समय सारे अयोध्या वासियों ने असुरता के निवारण के लिए सामूहिक पुरुषार्थ किया था। गायत्री महामंत्र समूह चेतना के जागरण का मंत्र है, जिसमें समूह (हम) द्वारा परमात्मा को अंतःकरण में धारण करने और समूह की (हमारी) बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करने की प्रार्थना की गयी है।                 डॉ. प्रणव जी ने कहा कि अवतारों को भी असुरता के निवारण के लिए तपस्वियों की आवश्यकता पड़ती है। परम पूज्य पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी के सन् 1956 से 1958 तक के ब्रह्मास्त्र अनुष्ठान, युग संधि महापुरश्चरण साधना सहित सामूहिक साधना के अनेक प्रयोग किये और अथाह शक्ति का उपार्जन किया है। आज समाज में उपस्थित हजारों रावणों के विध्वंस के लिए जिस वातावरण और ऊर्जा की आवश्यकता है, समूह साधना वर्ष 2014 से उसका निर्माण होगा।                 नववर्ष मनाने शांतिकुंज आये साधकों ने समूह साधना वर्ष की सफलता के लिए अपनी-अपनी तरह से संकल्प लिये। जयपुर से आये अंबिका प्रसाद श्रीवास्तव ने कहा कि नये वर्ष के पहले दिन शांतिकुंज ने हमें वर्ष भर सक्रियता के लिए आवश्यक ऊर्जा प्रदान की है। पटना के मनीष कुमार ने कहा कि गुरुद्वारे में आकर चरण पादुकाओं को प्रणाम करने से जो उत्साह जागता है, वह शब्दातीत है।   /* Style Definitions */ table.MsoNormalTable {mso-style-name:"Table Normal"; mso-tstyle-rowband-size:0; mso-tstyle-colband-size:0; mso-style-noshow:yes; mso-style-priority:99; mso-style-parent:""; mso-padding-alt:0in 5.4pt 0in 5.4pt; mso-para-margin-top:0in; mso-para-margin-right:0in; mso-para-margin-bottom:10.0pt; mso-para-margin-left:0in; line-height:115%; mso-pagination:widow-orphan; font-size:11.0pt; font-family:"Calibri","sans-serif"; mso-ascii-font-family:Calibri; mso-ascii-theme-font:minor-latin; mso-hansi-font-family:Calibri; mso-hansi-theme-font:minor-latin; mso-bidi-font-family:"Times New Roman"; mso-bidi-theme-font:minor-bidi;}


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