बेरोजगारों को स्वावलंबी बनाने हेतु संकल्पित हुआ शान्तिकुन्ज

Published on 2017-12-27
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हरिद्वार, 17 जनवरी। तीर्थनगरी हरिद्वार स्थित शान्तिकुन्ज संस्था द्वारा देश को बेरोजगारों को अपना रोजगार मुहैया करवाने हेतु आरंभ की गई पहल के सकारात्मक परिणाम दिखने लगे हैं। हरीपुर ग्राम में स्थित देव सं. वि. वि. के स्वावलंबन केन्द्र से विभिन्न प्रकार के रोजगारों का प्रशिक्षण प्राप्त कर लगभग 100 युवा रोजगार स्थापित कर अपने परिवारों को स्वावलंबी बना चुके हैं। उल्लेखनीय है कि अखिल विश्व गायत्री परिवार शान्तिकुन्ज ने पिछले वर्ष उत्तराखण्ड में आई भीषण आपदा के बाद रोजगार के अवसर देने की बात कही थी अब उसका वास्तविक स्वरूप सामने आ रहा है।    देवसंस्कृति वि. वि. के कुलाधिपति डाॅ प्रणव पण्ड्या ने कहा कि गायत्री परिवार के संस्थापक पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने हर व्यक्ति को स्वावंलबी बनने पर बहुत बल दिया है। उन्होंने कहा कि शान्तिकुन्ज की स्थापना के साथ ही यहां होने वाले एक मासीय सत्रों में विविध कुटीर उद्योगों का प्रशिक्षण दिया जाता रहा है इसमें बेकरी, फल संरक्षण, अगरबत्ती निर्माण आदि सिखाया जाता रहा है। इसके कारण भारत भर में हजारों युवा प्रशिक्षण प्राप्त कर स्वावलंबन केंद्र चला रहे है। इसीके अंतर्गत वि वि के स्वावलंबन केन्द्र का यही लक्ष्य रहा है कि देश के युवाओं को बेरोजगारी की दशा में नौकरी खोजने के स्थान पर प्रशिक्षण देकर अपना कार्य आरंभ करवा स्वावलंबी बनाया जाये। युवा एवं महिलाओं को इसका विशेष लाभ लेना चाहिये।     केन्द्र से प्रशिक्षित लगभग 10 युवाओं ने गुजरात व नेपाल में कपड़ा बुनने का कार्य आरंभ किया है। इसके अतिरिक्त मोतीचूर, भोगपुर, हरिपुरकलां, पीलीभीत, नेपाल व अहमदाबाद आदि में लगभग 75 प्रतिशत महिलायें चरखे पर सूत कात कर आमदनी जुटा रही हैं। स्वावलंबन केन्द्र के समन्वयक श्री टी सी शर्मा ने बताया कि केन्द्र से अब तक लगभग 100 से अधिक युवा कागज उद्योग, कपड़ा बुनाई आदि में प्रशिक्षण ले चुके हैं।    शान्तिकुन्ज के युवा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय प्रभारी श्री केदार प्रसाद दुबे ने स्वावलंबन केन्द्र में उपलब्ध विविध प्रशिक्षण सत्रों की जानकारी दी एवं कहा कि इसके अतिरिक्त यहां पर ठोस कचरा प्रबंधन एवं गौ उत्पादों के प्रशिक्षण की भी व्यवस्था है जिसके द्वारा लाखों युवाओं के लिये रोजगार के नये अवसर पैदा किये जा सकते हैं एवं बेरोजगारी की समस्या को काफी हर तक दूर किया जा सकता है। उन्होंने आगे बताया कि दे सं वि वि के स्वावलंबन केन्द्र में उपरोक्त प्रशिक्षण विभिन्न सत्रों के माध्यम से 45 दिनों के सत्र में दिया जाता है जिसमें आवास आदि की व्यवस्था निशुल्क होती है एवं जिसके लिये वि वि में संपर्क किया जा सकता हैं

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