शान्तिकुन्ज की टोली के सितं 2013 के कार्यक्रमों के बाद दूसरी बार पुनः युवाओं से संवाद हेतु कार्यक्रम निर्धारित किये गये। इसके अंतर्गत दि 19 से 22 जनवरी 2014 तक विभिन्न कार्यक्रमों हेतु टोली यहां से विदा हुई। झांसी प्रवास के इस चरण में बुंदेलखंड इंस्टी ऑफ़  इंजी एंड टेक्नोलॉजी  के प्रबंधन ने अपने यहां तीन दिवसीय आवासीय शिविर का कार्यक्रम रखा था। ज्ञातव्य है कि पूर्व में उनके यहां टोली द्वारा मात्र एक कक्षा आयोजित की गई थी जिससे प्रेरित होकर यह द्वितीय कार्यक्रम रखा गया। इसके अंतर्गत प्रातः 7.00 से  8.30 तक योग ध्यान एवं प्राणायाम की कक्षा एवं सायं 5.00 से 6.30 तक व्यक्तित्व परिष्कार, साधना, तनाव व समय प्रबंधन पर मार्गदर्शन दिया गया। इसके मध्य, दोपहर में झांसी के तीन अन्य संस्थानों में कार्यक्रम किये गये जिनमें विद्यार्थी जीवन में परिष्कार, उपासना, साधना व आराधना विषयों पर पी पी टी के माध्यम से प्रस्तुति दी गई।  दि 19 जन को गणेश मंदिर महाराष्ट्र समाज के युवाओं हेतु गोष्ठी रखी गई। मौसम के विपरीत रहते उपस्थिति प्रभावित रही किंतु इसके उपरांत भी उपस्थित युवाओं व अन्य परिजनों को विचार क्रांति अभियान का उद्भव, उसकी महत्ता एवं प पू गुरुदेव की जीवनी व साहित्य की विरासत एवं जीवन में उसके उपयोग तथा शान्तिकुन्ज की प्रणाली पर मराठी भाषा में सदानंद आंबेकर द्वारा उद्बोधन दिया गया। अंत में सबको सद्साहित्य के रूप में मराठी अखण्ड ज्योति का वितरण किया गया, जिसमें कई परिजनों ने सूचित किया कि हिंदी पत्रिका वे काफी पूर्व से मंगवा कर नियमित वाचन करते हैं और दूसरों को भी पढ़ने देते हैं।     दि 20 जन को एक अन्य इंटर कॉलेज, भानी देवी विद्यालय में श्री मनीष चौरिया ने लगभग 200 विद्यार्थियों को रोचक ढंग से व्यक्तित्व परिष्कार के सूत्र बताये। दि 21 जन को सरस्वती बालिका हाई स्कूल में भी उन्होंने उपस्थित 150 छात्राओं से इसी विषय पर चर्चा की। इस से प्रेरित होकर वहां की प्राचार्या ने इस मार्च में स्टाफ एवं विद्यार्थियों को शैक्षणिक भ्रमण पर शांतिकुंज आने की योजना निर्धारित कर ली।       इसके अलावा प्रमुख कार्यक्रम में बी आइ ई टी में रोज सुबह दे सं वि वि के योग के छात्र श्री रजत अग्रवाल ने आसन प्रज्ञायोग ध्यान प्राणायाम व मुद्रा विज्ञान का अभ्यास करवाया। छात्रों ने इस विषय में और अधिक सीखने के लिये शांतिकुंज का साहित्य भी खरीदा। सायंकाल की कक्षाओं में भी व्यक्तित्व परिष्कार तनाव समय प्रबंधन एकाग्रता वृद्धि, स्वाध्याय एवं अंतिम दिन समापन कार्यक्रम में शांतिकुंज का पूर्ण परिचय एवं दे सं वि वि के बारे में श्री मनीष चौरिया ने जानकारी एवं शिक्षण दिया। कार्यक्रम में कार्यक्रम समन्वयक एवं वरिष्ठ स्थानीय परिजन डॉ  विनोद कुमार खरे ने प पू गुरुजी के जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला एवं संस्थाओं का आभार व्यक्त किया। इस आयोजन व्यवस्था में अन्य परिजन श्री श्रीराम सिकन्या एवं श्री पांचाल एडवोकेट का तन मन धन से सक्रिय योगदान रहा।        कार्यक्रम में प्रतिदिन लगभग 100 से 120 विद्यार्थी उपस्थित रहते थे एवं योग कक्षाओं में संस्था के शिक्षकों एवं स्टाफ ने भी भागीदारी की। अंतिम दिन वहां के निदेशक ने कहा कि अब उनका विचार इस प्रकार के शिविर को हर सेमिस्टर में लगवाने का है। इसके अतिरिक्त स्टाफ ने शांति कुंज आने के बारे में रुचि व्यक्त की।  इस प्रकार से इस पूरे क्रम के अंतर्गत कुल मिलाकर लगभग 450-500 विद्यार्थियों को प्रेरित किया जा सका।


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