प्रज्ञा मंडल कोटा जंक्शन द्वारा दिनांक 23 से 27 मई की तारीखों में पाँच दिवसीय बाल संस्कार कार्यशाला का आयोजन किया गया। न्यू कविता माध्यमिक विद्यालय, डडवाड़ा में आयोजित इस कार्यशाला में कक्षा 6 से स्नातकोत्तर तक के 50 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। अनेक विषय

विशेषज्ञों से अपनी ज्ञाननिधि को समृद्ध करने और जीवन को संस्कारित करने का यह शानदार अवसर उन्हें मिला, जिसका उन्होंने पूरा-पूरा लाभ उठाया।

कार्यशाला का शुभारंभ जिला शिक्षा अधिकारी श्री गंगाधर मीणा द्वारा किया गया। मुख्य वार्ताकार गायत्री परिवार के श्री बीएल पंचोली ने व्यक्तित्व विकास का महत्त्व बताया।

पर्यावरणविद् डॉ. लक्ष्मीकांत दाधीच, आर्ट ऑफ लिविंग की डॉ. संगीता सक्सेना, श्री पुरुषोत्तम शर्मा,  कर्नल पीयूष अग्रवाल, स्काउटिंग विशेषज्ञ श्री यज्ञदत्त हाड़ा ने अपने-अपने विषयों की गहन बातें बतायीं। श्री केके सक्सेना व रोबिन क्लब के सदस्यों ने नशामुक्ति पर रोचक वार्ता और कार्यक्रम प्रस्तुत किये। चाइल्ड लाइन के सदस्यों ने बालकों को शिक्षा अभियान से जोडऩे, नागरिक  सुरक्षा की टीम ने माउण्टेनियरिंग, नोड्स, रैपलिंग आदि का अभ्यास कराया। छात्रा वृंदा माहेश्वरी का रैपलिंग प्रशिक्षण-प्रदर्शन सराहनीय था।

कार्यशाला समापन से पूर्व नशामुक्ति रैली निकाली गयी। उपमहापौर श्री राकेश सोरल एवं गा.श.पीठ के मुख्य ट्रस्टी श्री जीडी पटेल ने इसका शुभारंभ किया। समापन सभा में बालक-बालिकाओं का नशा न करने के संकल्प भी कराये गये। कार्यशाला के 50 प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान कर पुरस्कृत किया गया। कार्यशाला का संयोजन डॉ. मो. सलीम ने और संचालन श्री वीरेन्द्र शर्मा व श्री महेश मित्तल ने किया।

गावां, गिरिडीह (झारखण्ड)

क्षेत्र में बाल संस्कार शालाएँ आरंभ करने के उद्देश्य से गावां उच्च विद्यालय प्रांगण में 10 जून को गायत्री परिवार के युवा प्रकोष्ठ की एक चिंतन गोष्ठी हुई। जिला प्रतिनिधि श्री सुरेश यादव ने इसमें बच्चों में शॉर्टकट से सफलताएँ अर्जित करने, नशे की चपेट में आने, फास्टफूड की ओर बढ़ते
झुकाव जैसी प्रवृत्तियों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भावी तिसरी की एक दर्जन मंडल इकाइयों ने बाल संस्कारशाला चलाने का संकल्प लिया।

मोहाली, चंडीगढ़

मोहाली शाखा ने गत वर्ष की भाँति इस वर्ष भी बच्चों के लिए समर कैम्प का आयोजन किया और गत वर्ष की तुलना में बहुत ही अच्छी सफलता पायी। इस वर्ष समर कैम्प एक सप्ताह की बजाय 15 दिन (2 जून से 16 जून) की अवधि का था।बच्चों की संख्या 25 से बढ़कर 70 हो गयी थी। इस समर कैम्प में गायत्री परिवार द्वारा बच्चों को सृजनात्मक विचार और संस्कार प्रदान करने के लिए कई उपाय किये गये। उन्हें माता, पिता, गुरुजनों और अन्य लोगों के प्रति आस्था बढ़ाने के साथ शिष्टाचार के तौर-तरीके बताये गये। गायत्री मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र का भावार्थ बताने के साथ उन्हें जपने से बच्चों को क्या लाभ मिलता है, यह बताया गया। योग, नृत्य, स्पॉट पेंटिंग जैसी कलायें सिखायी गयीं।

कैम्प का समापन समारोहपूर्वक हुआ। इसमें बच्चों के अभिभावक आमंत्रित थे। बच्चों ने 15 दिन में सीखी गयी कला का प्रदर्शन कर सभी http://news.awgp.org/var/news/10/bal.jpg" height="98" width="137">को उत्साहित कर दिया। इस अवसर पर श्री चंद्रमोहन शर्मा ने गायत्री शक्तिपीठ की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह एक जन-जागरण
केन्द्र है, धर्म-सम्प्रदाय की सीमाओं से परे व्यक्तित्व विकास की पाठशाला है। उन्होंने गायत्री परिवार के इस प्रयास में अधिकाधिक सहयोग देने और इसका अधिकाधिक लाभ उठाने का आह्वान किया। समर कैम्प की सफलता में श्रीमती ऊषा नारंग, श्रीमती राधारानी, श्रीमती बिंदु शर्मा, कु.
रश्मि, श्री विद्यासागर, श्री जगदीश नारंग, श्री सुधांशु आदि का भरपूर सहयोग मिला।


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