छत्तीसगढ में हुआ नारी जागरण का शंखनाद

Published on 2017-12-27
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नारी आत्महीनता से उपर उठकर अपनी आत्मशक्ति को जागृत करें तथा स्वयं का निर्माण करते हुये अपनी भाव संवेदना से समाज एवं राष्ट्र को लाभान्वित करें। यह बातें प्रदेश महिला प्रभारी श्रीमती उषा किरण ने नारी जागरण कार्यशाला को संबोधित करते हुये कही। ’’नारी जागरण की आवश्यकता’’ विषय पर उन्होंने कहा कि चूंकि नारी देश की आधी जनसंख्या है तथा जिस प्रकार रथ के दोनो पहिये समान होने पर ही रथ अपनी मंजिल तक पहुंच सकता है, ठीक इसी प्रकार राष्ट्र रूपी रथ के महिला एवं पुरूष दो पहिये हैं दोनों का समुचित विकास एवं मजबूती से ही राष्ट्र मजबूत बनेगा । अतः पूज्य गुरूदेव की घोषणा 21वीं सदी नारी सदी को चरितार्थ करने हेतु नारी आगे आकर नेतृत्व प्रदान करें । ’’नारियों की समस्या एवं समाधान’’ विषय पर बोलते हुये उन्होंने कहा कि महिलायें घर से बाहर समाजिक कार्यो हेतु निकलती हैं तो लोगों द्वारा उलाहना सुनना पडता है,घर के सदस्यों का विरोध होता है,आर्थिक समस्या भी रहती है,समय का भी अभाव रहता है,स्वयं नारी ही नारी की बाधक बन जाता है,लडकियों को समाजिक कार्यो हेतु अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाता आदि समस्त समस्याओं का व्यवहारिक निराकरण किया गया । कार्यशाला का अगला विषय’’नारी सशक्त कैसे बने’’ विषय को शिक्षा,स्वास्थ्य एवं स्वावलंबन को आधार बनाकर विस्तार से विवेचन किया गया । शिक्षा के अंतर्गत विद्या के महत्व को दर्शाया गया । स्वास्थ्य के अंतर्गत शारीरिक एव मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बात रखी गई । स्वावलंबन के अंतर्गत घरेलू उद्योग सिलाई,कढाई,अगरबत्ती,लिफाफा उद्योग आदि के बारे में विस्तार से बतलाया गया । अगला विषय ’’कार्ययोजना का स्वरूप’’पर प्रकाश डालते हुये बहन उषा किरण ने कहा कि बहनें अपनी क्षमता,रूचि एवं समय के अनुसार कन्या शिविर,एक दिवसीय युवा जागरण शिविर,तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर,बाल संस्कार शाला,परिवार मे आस्तिकता का वातावरण निर्मित करना,अनीति एवं कुरीति उन्मूलन आंदोलन चलाना,नारी जाति में समानता का भाव पैदा करना,अनावश्यक फैशन से बचना, अशलील साहित्य एवं चित्रों का बहिश्कार करना,व्यसन मुक्ति आंदोलन चलाना तथा बलिवैष्य यज्ञ आंदोलन चलाना षामिल है । कार्यषाला के अंत में जिला स्तरीय नारी संगठन का निर्माण किया गया जो उपरोक्त आंदोलन चलाने में महती भूमिका निभायेंगे ।     इस अवसर पर प्रांतीय संयोजक श्री ओमप्रकाष राठौर ने कार्यषाला को संबोधित करते हुये कहा कि बाल संस्कार षाला,व्यसन मुक्ति आंदोलन,घर-घर संस्कार परम्परा जैसे आंदोलन का नेतृत्व नारी संगठन को करना चाहिये ।   ज्ञात हो कि प्रांतीय युवा प्रकोश्ठ छ.ग. के संयोजन में जिला युवा प्रकोश्ठ कोरबा द्वारा ’’नारी जागरण कार्यषाला’’का आयोजन विगत माह किया गया था । कार्यषाला में जिले भर से 365 महिलाओं ने भागीदारी की जिसमें आधे से अधिक गायत्री परिवार के बाहर की महिलायें थीं ।

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