एक सुप्रसिद्ध उद्योगपति श्री सत्यनारायण इनाणी के बेटे  चि. सुमित ने अपनी एम.बी.ए. की पढ़ाई पूरी करने के बाद अपनी अनोखी पहली गुरुदक्षिणा युगऋषि पं.श्रीराम शर्मा आचार्य जी के श्रीचरणों में अर्पित की।

''गुरु का संकल्प ही शिष्य का धर्म है। इस भावना के साथ चि. सुमित ने पू.गुरुदेव की जन्म शताब्दी पर उनके विचारों को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लिया। विशेष बात यह रही कि उन्होंने इस कार्य के लिए धन ही खर्च नहीं किया, स्वयं श्रम करते हुए पूरे भीलवाड़ा जिले में स्वयं जनसंपर्क भी किया। चि. सुमित भीलवाड़ा जिले की हर तहसील में गये और दुकान-दुकान जाकर पहले अपनी ओर से एक अखण्ड ज्योति पत्रिका मुफ्त दी। फिर पूज्य गुरुदेव के विचारों की महत्ता बताते हुए उन्हें अखण्ड ज्योति के सदस्य बन जाने की प्रेरणा दी।

चि. सुमित के अनुसार जिनसे भी संपर्क किया, उनमें से आधे लोगों को वे अखण्ड ज्योति का सदस्य बनाने में सफल हो ही जाते थे। यह सदस्यता अभियान प्रत्येक रविवार को चलाया जा रहा है। हर बार वे अपने कुछ मित्रों को भी साथ रखते थे।

जनवरी 2012 से गुरुपूर्णिमा तक उन्होंने अखण्ड ज्योति के 1000 से भी अधिक सदस्य बना लिये थे। इसके लिए वे हर माह 200 अखण्ड ज्योति पत्रिका और 100 युग निर्माण योजना अपनी ओर से वितरित करते हैं। इससे पूर्व उन्होंने 100000 लोगों को अपनी ओर से मिशन की पुस्तकें नि:शुल्क बाँटी थीं।


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