हरिद्वार 20 दिसम्बर।
    गुरुवार को प्रात: ठंड की ठिठुरन के बीच गायत्री विद्यापीठ शांतिकुंज का वार्षिक खेल दिवस समारोह 2012 का शुभारंभ हुआ। तीन दिन चलने वाले इस समारोह के प्रथम दिन प्ले वे से लेकर पाँचवीं कक्षा के विद्यार्थियों के विभिन्न खेल प्रतियोगिताएँ आयोजित हुईं। वहीं मेंहदी, रंगोली, निबंध व थाल सज्जा प्रतियोगिता में बच्चों ने अपनी हुनर दिखाया।
    गायत्री विद्यापीठ का वार्षिक खेल दिवस समारोह 2012 का शुभारंभ अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या एवं संस्था की अधिष्ठात्री शैलदी
http://news.awgp.org/var/news/120/PPD_0815N.jpg" height="123" width="246">दी ने ध्वज फहरा कर किया। पश्चात उन्होंने आज के प्रतियोगिताओं में शामिल नन्हें-मुन्नों को खेल प्रतिज्ञा दोहरवाई। इस अवसर पर डॉ. पण्ड्या ने कहा कि दो कमरों से प्रारंभ हुआ गायत्री विद्यापीठ को फलता-फूलता देख मन गद्गद है। खेल भावना को जीवन में उतारें, तभी हम सफलता की सीढ़ी दर सीढ़ी चढ़ते जायेंगे। इस दौरान शैल दीदी ने भी बच्चों का पुरजोर हौसला अफजाई की।
    इसके पश्चात प्ले वे से कक्षा पांच के बालिका व बालक वर्ग के बनाना रेस, नींबू दौड़, स्कूल के लिए तैयार होना, बतख दौड़, बोतल में पानी भरना, बोरा दौड़, रस्सी दौड़ आदि प्रतियोगिताओं में बच्चों ने अपना दमखम दिखाया। बच्चे गिर गिरते रहे, पर जोश में कमी आने नहीं दिया। लोकेश, युगांसी, गोविंद, सताक्षी, इशांत, काजल, सत्यजीत, मीमांसा, कुमुद, आदित्य, नेहा, रोहित, स्वास्तिक, चारु, आर्यन, अंशुल ने अपने-अपने वर्ग में प्रथम स्थान प्राप्त किया। तो वहीं अनमोल, गुणीता, सौभाग्य, अर्जुन, पारितोष, ऋतु, मोनिका, वंश, आहुति पण्ड्या, वैभव, लक्ष्य, सृष्टि, अर्जिता, विश्वास-पार्थ को द्वितीय स्थान मिला।
    इससे पूर्व विद्यापीठ परिसर के भूतल के विभिन्न कक्षों में बनाये गये प्रदर्शनी का मुख्य अतिथिद्वय ने दीप प्रज्वलन कर उद्घाटन किया। प्रदर्शनी के माध्यम से बाल कलाकारों ने अपने हुनर को विभिन्न माडल तैयार कर दिखाया कि सोच समझ कर जीने से ही भविष्य को संवारा जा सकता है। तो कइयों ने वाटर हार्वेस्टिंग, कुड़ा निस्तारण, सौर ऊर्जा के वैकल्पिक साधन, दहेज प्रथा, बिजली निर्माण आदि के माध्यम से लोगों को अपनी छिपी प्रतिभा से अवगत कराया। इन बाल वैज्ञानिकों ने कई महत्त्वपूर्ण माडल तैयार किये, जो आगे चलकर एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। विभिन्न प्रतियोगिताओं के अंतर्गत रंगोली में भगवती सदन ने पहला, थाल सज्जा में लक्ष्मीबाई सदन ने बाजी मारी। तो संस्कृत के श्लोक पठन, कविता पठन, भजन गायन व वाद-विवाद प्रतियोगिता में बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
    प्रधानाचार्य कैलाश महाजन ने बताया कि गायत्री परिवार के जनक पं० श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा 1980  में स्थापित इस विद्यापीठ में समय-समय पर विभिन्न कार्यक्रमों का संचालन किया जाता रहा है। इसके माध्यम से बच्चों में छिपी प्रतिभाओं को निखार कर आगे लाना है। वार्षिक खेल समारोह के अंतर्गत बच्चों ने मेकेनिकल पावर को इलेक्ट्रिक पावर में बदलने, भूकंप मापक संयंत्र, फायर एलार्म, सिग्नल लाइट, सुनामी जैसे खतरों को कम करने जैसी अनेक प्रदर्शनी के माध्यम से अपनी प्रतिभाओं का लोहा मनवाया है। इस अवसर पर कर्नल उदय मिश्रा, शरद पारधी, ज्ञान मिश्रा, श्रीमती यशोदा शर्मा, शैफाली पण्ड्या सहित बच्चों के अभिभावकगण उपस्
थित थे।


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