शक्ति साधना हेतु यज्ञानुष्ठान में जुटे साधक, ध्यान साधना से होती दिनचर्या की शुरुआत  

नवरात्रि का आज चौथा दिन। गायत्री तीर्थ शांतिकुंज हरिद्वार में नवरात्रि के इस पावन अवसर पर साधना अनुष्ठान का अच्छा माहौल है। इस पुण्य वेला में देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ प्रणव पण्ड्या ने शांतिकुंज के मुख्य सभागार में उपस्थित जन समुदाय को साधना की विधि व्यवस्था के बारे में समझाते हुए उन्हें साधना से शक्ति उपार्जन कैसे हो, इस सम्बन्ध में मार्गदर्शन किया। उन्होंने बताया कि शक्ति उपार्जन के लिए किये जाने वाला यज्ञानुष्ठान का सबसे महत्त्वपूर्ण समय नवरात्रि का होता है। इन दिनों मनोयोगपूर्वक किया गया जप- तप स्वयं के साथ परिवार, समाज की उन्नति में सहायक होता है।

इस दौरान अध्यात्मवेत्ता डॉ प्रणव पण्ड्याजी ने कहा कि साधक की दुर्बलता, आत्महीनता, दुश्चिंतन, आलस्य जैसे मानव में समाये अनेक विकृतियों को नाश करने वाली आद्यशक्ति का नाम दुर्गा है। आद्यशक्ति की उपासना, साधना के साथ आराधना को जोड़ दें, तो माता की शक्ति व कृपा कई गुनी ज्यादा मिलती है। उपासना अर्थात् इष्ट के निकट बैठना, साधना अर्थात् स्वयं का परिष्कार एवं आराधना यानी समाज के कल्याण में अपना समय, साधन लगाना। कुलाधिपति ने कहा कि इन दिनों जो लोग संयम बरतते हुए साधना करते हैं, उन्हें निश्चित रूप से उत्तम स्वास्थ्य के साथ आद्यशक्ति माता की विशेष अनुकंपा मिलती है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 और 1947 की कुंडली हुबहू मिलती है और यह संयोग की बात है कि नवसंवत्सर का पंचांग सन् 1947 के जैसा ही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान संवत्सर देश के लिए विशेष शुभ है। इस महत्त्वपूर्ण समय में समूह साधना का विशिष्ट योगदान होगा। इस सामूहिक साधना से अर्जित शक्ति से राष्ट्र के खोये गौरव को वापस लाने में सहायक सिद्ध होगी।

भावी योजना पर चर्चा करते हुए डॉ पण्ड्याजी ने घर- घर देवस्थापना, पारिवारिक गोष्ठी, बालसंस्कार शाला, सामूहिक साधना, सत्साहित्य का विस्तार, वृक्षारोपण व निर्मल गंगा शुद्धि अभियान में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने की बात कही। सप्तऋषियों की साधना स्थली शांतिकुंज में आये साधकों की दिनचर्या प्रातः 3.30 बजे शुरु हो जाती है। आरती, ध्यान, साधना व हवन- यज्ञ के साथ सत्संग का नियमित कार्यक्रम में साधक उत्साहता से मन लगाकर भाग ले रहे हैं। इन साधकों को शांतिकुंज के वरिष्ठ कार्यकर्ता भी मार्गदर्शन दे रहे हैं। 


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