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देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में चल रहे सामूहिक नवरात्रि साधना अनुष्ठान में कुलाधिपति डॉ प्रणव पण्डया विद्यार्थियों को एकाग्रता बढ़ाने के लिए विशेष ध्यान करा रहे हैं। निकट भविष्य में होने वाली परीक्षा के मद्देनजर विद्यार्थी भी इसमें काफी रुचि ले रहे हैं।

            नवरात्र के छठवें दिन कुलाधिपति डॉ पण्ड्या ने चित्त को एकाग्र करने में सहायक साधना एवं ध्यान के गूढ़ रहस्यों की विस्तार से जानकारी दी, साथ ही ध्यान के वैज्ञानिक पक्षों की विवेचना करते हुए आद्य शक्ति के ध्यान की गहराई में वे साधकों को ले गये। इस गूढ़ विषय पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि अपने इच्छित कार्य की सफलता के लिए मन से कुंठा, चिंता व दूसरों की बुराई वाले विचारों को त्यागना ही सफलता की प्रथम सीढ़ी पार करना है। इसके अनेक उदाहरण हमारे संत-महात्मा व महापुरुषों की जीवनी से मिलता है।

            रामचरित मानस का जिक्र करते हुए कुलाधिपति ने कहा कि जप, तप, व्रत, संयम, नियम से गुुरु व गोविन्द की कृपा प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने श्रीराम एवं लक्ष्मण आदि अवतारी चेतनाओं द्वारा की गई लीलाओं से सीख लेते हुए श्रद्धा, क्षमा, मैत्री जैसे सद्गुणों को साधकों को जीवन में उतारने की बात कही। इससे पूर्व कुलाधिपति ने छात्र-छात्राओं के आध्यात्मिक, व्यावहारिक सहित विभिन्न शंकाओं का समाधान किया। इस अवसर पर कुलपति डॉ एसडी शर्मा, कुलसचिव संदीप कुमार, शरद पारधी सहित देसंविवि, शांतिकुंज, ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान एवं देश के विभिन्न शहरों से आये साधकगण उपस्थित थे।


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