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  •  शांतिकुंज कोई धर्मशाला या पर्यटन स्थल नहीं, एक आश्रम है, अकादमी है जहाँ आध्यात्मिक जीवन जीने का प्रशिक्षण दिया जाता है। अतः यहाँ चलने वाले विभिन्न शिविरों में केवल साधनात्मक मनोभूमि के लोग ही आयें।
  •  जो परिजन पर्यटन की दृष्टि से हरिद्वार आ रहे हैं, वे अपने आवास की व्यवस्था अन्यत्र ही करें। वे वहाँ रहकर भी शांतिकुंज आकर यज्ञ, दर्शन, प्रणाम आदि कर सकते हैं।
  •  प्रत्येक शिविर में प्रातः जागरण से लेकर रात्रि शयन तक शांतिकुंज की व्यस्त दिनचर्या का पालन अनिवार्य होता है। इनमें पर्यटन के लिए अवकाश निकाल पाना संभव नहीं होता। 
  •  शांतिकुंज आने वाले परिजन अपने साथ सरकारी मान्यता प्राप्त कोई पहचान पत्र अवश्य लेकर आयें। 
  •  परिजनों से निवेदन है कि वे पर्यटन के लिए आ रहे लोगों को शांतिकुंज में ठहरने की अनुशंसा के साथ बिलकुल न भेजें।


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