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छत्तीसगढ़ के कार्यकर्त्ताओं में उभरे संकल्प

२५ मार्च को गायत्री शक्तिपीठ भिलाई पर भिलाई और राजनांदगाँव उपजोन के कार्यकर्त्ताओं की गोष्ठी आयोजित हुई। श्री कालीचरण शर्मा, जोनल प्रभारी शांतिकुंज ने इसे संबोधित करते हुए कहा कि साधना से आत्मबल बढ़ता है, सद्गुणों का विकास होता है, लेकिन युग परिवर्तन जैसे महान प्रयोजन के लिए साधना को युगशक्ति का स्वरूप प्रदान करना जरूरी है। परम पूज्य गुरुदेव ने आज की समस्त विभीषिकाओं का निवारण कर सतयुगी समाज के निर्माण का जो संकल्प लिया है, उसका आधार साधना ही है। यह कार्य अकेले संभव नहीं है। सज्जनों को संगठित होकर साधना करते हुए समूह चेतना का निर्माण करना होगा। संगठित प्रयासों से वातावरण बनेगा, समूह मन का निर्माण होगा। जैसे ऋषि-रक्त की बूँदों से जन्मी सीता रावण-राज्य का अंत करने का माध्यम बनी, वैसे ही सामूहिक प्रयासों से बनी युगशक्ति सतयुगी समाज की संरचना का आधार बनेगी। 

यह गोष्ठी ‘समूह साधना, समूह संगठन’ विषय पर आधारित थी। श्री गंगाधर चौधरी, शांतिकुंज प्रतिनिधि ने विभिन्न मण्डलों, शक्तिपीठ-शाखाओं के माध्यम से समूह साधना प्रयोग को घर-घर पहुँचाने के सूत्र दिये। श्री अतुल द्विवेदी ने भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा संबंधी चर्चा की। सांसद सरोज पाण्डेय भी शिविर में आयीं।

गोष्ठी में दोनों उपजोनों के लगभग ६०० कार्यकर्त्ताओं ने भाग लिया। जिला समन्वयकों ने प्रगति प्रतिवेदन और भावी कार्ययोजना बतायी। २५० से अधिक स्थानों पर समूह साधना प्रयोग करने के संकल्प लिये गये।


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