दक्षिण अफ्रीका को भारतीय संस्कृति के अनुदान


आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी के प्रवास ने वयोवृद्ध युग निर्माणी सहित सैकड़ों युग सैनिकों की आस्था बढ़ाई

भारतीय संस्कृति के आदर्शों की प्रतिष्ठा

महात्मा मोहनदास करमचंद गाँधी के सत्याग्रह ने नेल्सन मंडेला के भीतर एक महापुरुष को जन्म दिया, उन्हें अपने देश में क्रांति का महानायक और राष्ट्रपिता बना दिया। दक्षिण अफ्रीका में भारतीय संस्कृति की प्रेरणा और अनुदान-वरदानों का यही क्रम अनवरत चल रहा है। परम पूज्य गुरुदेव के विचार और आन्दोलन से प्रेरित होकर श्री भूलाभाई छीता ने दक्षिण अफ्रीका में पारिवारिक सद्भाव का ऐसा वातावरण तैयार किया है, जिसे सभ्य समाज एक आदर्श माना जा सकता है। 

जोहान्सबर्ग निवासी ९२ वर्षीय श्री भूलाभाई छीता की चार पीढ़ियाँ सभी के पारिवारिक हितों को ध्यान में रहते हुए एक साथ रह रही हैं। सभी में सनातन संस्कृति के प्रति गहन आस्था है, उत्तम संस्कार हैं। इन्हीं उदात्त पारिवारिक मूल्यों का अवलम्बन करते हुए वे एक सब्जी बेचने वाले से लेकर दक्षिण अफ्रीका के एक नामी उद्योगपति बने हैं, जिनकी साख अमेरिका, इंग्लैण्ड सहित तमाम यूरोपीय देशों में है। 

आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी को उन्होंने अपने ९२वें जन्म दिवस पर अपने गोल्डन इरा ग्रुप की नयी कम्पनी ‘गायत्री केन फैक्ट्री’ का उद्घाटन करने के लिए आमंत्रित किया था। मिशन और डॉ. साहब के प्रति आस्था इतनी गहन कि ९२ वर्ष की उम्र में अधिक चलने-फिरने से परहेज करने वाले श्री भुलाभाई स्वयं आदरणीय डॉ. साहब की अगुवानी करने एअरपोर्ट पहुँचे थे। शांतिकुंज से श्री राजकुमार वैष्णव और श्री ओंकार पाटीदार भी आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी के साथ इस प्रवास में दक्षिण अफ्रीका गये थे। 

जन्म दिवस के भावुक क्षण
वयोवृद्ध श्री भुलाभाई छीता का जन्म दिवस बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। आदरणीय डॉ. प्रणव जी ने उनकी गुरुभक्ति और मिशनरी आस्था की सराहना करते हुए उनके जीवन को सफल और सबके लिए प्रेरणाप्रद बताया। उन्होंने कहा कि श्री भुलाभाई भारतीय संस्कृति के संवाहक हैं, जिन्होंने अध्यात्म के परिष्कृत स्वरूप को अपनाकर न केवल अपना, अपने परिवार का कल्याण किया, अपितु हजारों लोगों को भी वैज्ञानिक अध्यात्मवाद के प्रति आकर्षित किया है। उनके द्वारा अपनाये गये पारिवारिक आदर्श अनुकरणीय है। इन पारिवारिक भावनाओं और गुरुकृपा से जैसे उनका कारोबार निरंतर बढ़ रहा है, वह सबके लिए प्रेरणादायी है। घर के बुजुर्गों का सम्मान कैसे किया जाय, सबके हितों का ध्यान कैसे रखा जाय, परिवारी जनों को अपने स्नेह की डोर से कैसे बाँधा जाये, यह हमें भी भुलाभाई के जीवन से सीखना चाहिए। 
  •  आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने जन्म दिवस के उपलक्ष्य में उनका तिलक, माल्यार्पण किया, शांतिकुंज की ओर से उन्हें प्रशस्ति पत्र भेंट किया गया। सभी ने पुष्पवर्षा कर श्री भुलाभाई को उनके यशस्वी एवं मंगलमय जीवन की शुभकामानाएँ दीं। प्रेम और भक्ति के आदान-प्रदान के इस दृष्य को देखकर सभी परिजन भाव विभोर हो गये। 


१०८ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ से आत्मीयता का विस्तार
केपटाउन के अटलांटिस क्षेत्र की मीलों भूमि पर फैले गोल्डन इरा ग्रुप के कारोबार वाली भूमि पर १०८ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ आयोजित हुआ। केपटाउन का अब तक का सबसे बड़ा कार्यक्रम था। इस अवसर पर गोल्डन इरा ग्रुप के प्रमुख श्री भुलाभाई छीता के परिवारीजन ईश्वर भाई, किशोर भाई, राजू भाई आदि उपस्थित थे। जोहान्सबर्ग, ईस्ट लंडन, डरबन, पोर्ट एलिजाबेथ, ग्रेहम्स टाउन, किम्बरले आदि शहरों से आये श्रद्धालुओं सहित १५०० लोगों ने इस यज्ञ में भाग लिया। 

यज्ञ के साथ आद. डॉ. साहब ने गोल्डन इरा ग्रुप की नयी कम्पनी गायत्री केन फैक्ट्री का उद्घाटन किया गया। गायत्री महामंत्र की मंगल ध्वनि के बीच कम्पनी के उज्ज्वल भविष्य की कामनाएँ की। 
  •  सभी याजकों को प्रसाद, युग साहित्य, गोमुखी के साथ माला और गायत्री दर्शन पॉकेट दिये गये। श्री भुलाभाई चाहते हैं कि उनके सभी १२०० कार्यकर्त्ता गायत्री महामंत्र का जप करें। 
  1.  उपस्थित सभी याजकों ने गायत्री महामंत्र की दीक्षा ली।


श्री भुलाभाई छीता : संक्षिप्त परिचय
श्री भुलाभाई सन् ४२ में पानी के जहाज से दक्षिण अफ्रीका पहुँचे। विपरीत परिस्थितियों में लोन लेकर हैण्ड प्रेस लगायी। वे परम पूज्य गुरुदेव-परम वंदनीया माताजी के शिष्य और गायत्री के नैष्ठिक उपासक हैं। गायत्री आश्रम लीनेशिया के निर्माण और उसके संचालन में उनका मुख्य योगदान है। अश्वमेध यज्ञ आयोजन से लेकर कई बड़े कार्यक्रम उनके द्वारा कराये गये। 


द केप हिंदू कल्चरल सोसायटी में युवा संगोष्ठी

द केप हिंदू कल्चरल सोसायटी में युवाओं एवं सैकड़ों श्रद्धालुओं की गोष्ठी हुई। आदरणीय डॉ. साहब ने ‘भारतीय संस्कृति के प्रतीक’ विषय से इसे संबोधित करते हुए भारतीय संस्कृति के आधार गुरु, गायत्री, गौ, गंगा, गीता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हमारी उदात्त मान्यता, सबके सबके प्रति प्रेम की भावना यहाँ के कण-कण में पवित्रता का संचार करती है। जो पश्चिमी जगत के लिए एक पत्थर है, वह हमारे लिए शिव है। उनकी मान्यताओं के अनुसार वह चोट पहुँचा सकता है लेकिन हमारी शिवत्व से ओतप्रोत मान्यताओं के कारण वह हमारा संरक्षण करता है, अनुशासन सिखाता है, परोपकारी बनाता है। 

युवाओं में भारतीय संस्कृति के प्रति अगाध आस्था देखी गयी। प्रश्नोत्तरी के क्रम में आदरणीय डॉ. साहब, श्री राजकुमार वैष्णव और श्री ओंकार पाटीदार से मिले उत्तर व आत्ममीयता ने उसे और प्रगाढ़ कर दिया। 


गायत्री आश्रम लीनेसिया में कार्यकर्त्ता गोष्ठी

जोहान्सबर्ग। गायत्री आश्रम लीनेशिया पर कार्यकर्त्ताओं की गोष्ठी हुई। समूह साधना और संगठन चर्चा के मुख्य विषय थे। समाज और संस्कृति के प्रति उत्तरदायित्वों की याद दिलायी। आदरणीय डॉ. साहब ने नेल्सन मंडेला, महात्मा गाँधी और परम पूज्य गुरुदेव के व्यक्तित्व की चर्चा की। उनसे प्रेरणा लेकर मात्र पेट और प्रजनन के लिए जीवन जीने की अपेक्षा महानता का वरण करने की प्रेरणा दी। प्रमुख कार्यकर्त्ता सर्वश्री किशोर भाई, हँसमुख भाई, जाबिया राव, सतीश भाई मुख्य रूप से उपस्थित थे। 

  •  उद्बोधन से पहले मिशन के प्रमुख आन्दोलन-वृक्षगंगा अभियान, निर्मल गंगा जन अभियान आदि की जानकारी वीडियो प्रेजेण्टेशन से दी गयी। 
  •  समूह साधना को वातावरण और परिस्थितियों को बदलने का अत्यंत प्रभावशाली प्रयोग बताया।
  •  अपने अंग-अवयवों से पत्रक के सूत्रों की चर्चा के साथ परम पूज्य गुरुदेव की आकांक्षाओं से कार्यकर्त्ताओं को अवगत कराया। 
  •  ‘मनुष्य अपना भाग्य विधाता स्वयं है।’ सूत्र को जीवनमंत्र बनाते हुए ज्योतिष, वास्तु, तंत्र-मंत्र आदि से दूर रहने की प्रेरणा दी। 
  •  भारतीय दूतावास के कॉन्सुलेट जनरल श्री नंदन सिंह भैसोरा व श्रीमती रश्मि भैसोरा इस गोष्ठी में उपस्थित थे। 


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