गुजरात व दक्षिण भारत के शिक्षाविदों का राष्ट्रीय सेमीनार का समापन

Published on 2017-12-26
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पाँच सौ से अधिक शिक्षाविदों ने की भागीदारी, संस्कृति मंडल गठन करने का संकल्प

गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में इन दिनों देश भर के चयनित शिक्षाविदों एवं शिक्षकों के प्रांत वार सेमीनार का आयोजन किया जा रहा है। इस क्रम के तीसरे चरण में गुजरात एवं दक्षिण भारत से आये पाँच सौ से अधिक शिक्षाविदों एवं शिक्षकों ने भागीदारी की। तीन दिन चले इस सेमीनार में प्रतिभागियों को शांतिकुंज के वरिष्ठ विशेषज्ञों ने शिक्षा तथा अन्य विषयों पर संबोधित किया।

        शिविर के समापन समारोह को संबोधित करते हुए शांतिकुंज के व्यवस्थापक श्री गौरीशंकर शर्मा ने कहा कि विद्यार्थियों को निखार-सँवार कर उन्हें श्रेष्ठतम नागरिक, समर्पित स्वयंसेवक, राष्ट्रभक्त एवं विषय विशेषज्ञ बनाने के साथ-साथ महामानव और देवमानव के रूप में गढ़ने का हमारा पावन उद्देश्य होना चाहिए। इससे मनुष्य में देवत्व और धरती पर स्वर्ग के अवतरण की संभावना साकार होगी। शांतिकुंज के  कार्यकर्त्ता डॉ एके दत्ता ने कहा कि अध्यात्म इंसानियत की गहराई है, जीवन जीने की कला है, मनुष्यता का विज्ञान है। डॉ ओपी शर्मा ने शिक्षकों की गरिमा को याद करते हुए विद्यार्थियों में स्वतंत्र चिंतन, आत्म निर्भरता, स्वावलंबन जैसे सद्गुणों के विकास में सहयोग करने की बात कही। भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के श्री पीडी गुप्ता ने बताया कि ये प्रतिभागी विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा व विभिन्न रचनात्मक कार्यों के लिए प्रेरित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षकों के मार्गदर्शन में ही उनका भविष्य उज्ज्वल बनता है।

श्री केशरी कपिल ने गुरुओं (शिक्षक-शिक्षिका) के उत्तरदायित्व को समझदारी, ईमानदारी, जिम्मेदारी एवं बहादुरी के साथ पूर्ण करने तथा बच्चों में सद्गुणों का समावेश करने में निष्ठापूर्वक करने आवाहन किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं को सही दिशा एवं मार्गदर्शन की आवश्यकता है। युवाशक्ति सुनियोजन से ही परिवार, समाज व राष्ट्र का उत्थान संभव है।
  
        गुजरात के भासंज्ञाप के प्रांतीय सचिव शंकर भाई ने अपने राज्य के लिए २०१४ में सात लाख बच्चों को भागीदारी करने का संकल्प दोहराया। तो वहीं दक्षिण भारत से आये प्रतिनिधियों ने अपने-अपने राज्यों में अधिकाधिक स्कूलों तक भासंज्ञाप को पहुंचाने की बात कही। साथ ही इन सभी राज्यों में युवा मंडल, संस्कृति मंडल गठन कर रचनात्मक कार्यों में भागीदारी कराये जायेंगे।

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