जीवन को सुधारना हो तो गायत्री व गंगा की शरण में आएं: शैल दीदी
गंगा शुद्धिकरण एवं गायत्री साधना में बढ़- चढ़कर भागीदारी करने का लिया संकल्प
देश- विदेश के कोने- कोने से पहुँचे संस्कृतिनिष्ठ परिव्राजक


हरिद्वार 08 जून।

सद्बुद्धि प्रदात्री माँ गायत्री का विशेष सामूहिक साधना अभियान चलाने, गोमुख से गंगासागर तक चलाये जा रहे निर्मल गंगा जन अभियान के तीसरे चरण में जन भागीदारी जुटाने एवं गौ संरक्षण- गौ उत्पाद को व्यावहारिक जीवन में उतारने के संकल्प के साथ गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में गायत्री जयंती- गंगा दशहरा हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। गायत्री परिवार के जनक युगऋषि पं० श्रीराम शर्मा आचार्य की 24वें पुण्यतिथि पर परिजनों ने उनके समाजोत्थान के विचारों को जन- जन तक पहुँचाने हेतु संकल्पित हुए।

शांतिकुंज के मुख्य सभागार में उपस्थित जनमेदिनी को सम्बोधित करते हुए देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्याजी ने कहा कि माँ गायत्री की नियमित साधना से जीवन में प्रखरता आती है, तो वहीं माँ गंगे की आराधना से तन, मन पवित्र होता है। उन्होंने कहा कि सूर्य गायत्री के देवता है और इसके नियमित जप से सूर्य की ऊर्जा प्राप्त होती है।

प्रखर अध्यात्मवेत्ता डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि गायत्री परिवार का उद्देश्य व्यक्ति निर्माण, परिवार निर्माण और समाज निर्माण है। गायत्री परिवार द्वारा व्यक्ति निर्माण के लिए गायत्री सामूहिक साधना और बाल संस्कारशाला का आयोजन विश्व के कोने- कोने में किया जा रहा है। परिवार निर्माण के लिए नारी सशक्तिकरण का अभियान चलाया जा रहा है तो वहीं समाज निर्माण के लिए निर्मल गंगा जन अभियान, वृक्षगंगा अभियान (तरु पुत्र- तरु मित्र योजना), नशा उन्मूलन अभियान जैसे अनेक समाजोपयोगी अभियान द्रुतगति से चलाये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक ऋषि के रूप में आचार्यश्री ने गायत्री महामंत्र के कल्याणकारी सामर्थ्य को जाति, धर्म, लिंग, भेद से परे सबके लिए सार्वजनिक रूप से सुलभ बनाने का विश्वामित्र के बाद इस युग का भगीरथ पुरुषार्थ कर दिखाया। उन्होंने साधकों को गायत्री की सामूहिक साधना एवं निर्मल गंगा जन अभियान में भागीदारी का आवाहन किया।

शांतिकुंज की अधिष्ठात्री शैल दीदी ने आद्यशक्ति गायत्री को प्रेम, ज्ञान और पुण्यसलिला माँ गंगे को करुणा, ममता की धारा बताया। शैल दीदी ने कहा कि गायत्री साक्षात् कामधेनु है, जो भी व्यक्ति गायत्री को जीवन में उतारता है, उसका इहलोक एवं परलोक दोनों सुधर जाता हैं। युगऋषि पूज्य आचार्यश्री के जीवन के तीन स्तंभ- माँ गायत्री, हिमालयवासी सद्गुरु और देवात्मा हिमालय रहे। जिनके सानिध्य पाकर वे महान से महानतम कार्य कर गये।

इससे पहले पर्व पूजन का कर्मकाण्ड पुरुष सूक्त के साथ जितेन्द्र मिश्र व जयराममोटलानी ने सम्पन्न कराया। वहीं शैल दीदी एवं डॉ. पण्ड्याजी ने युवाओं का दिग्दर्शन करने वाला आडियो- वीडियो की 08 सीडी, युगव्यास पूज्य आचार्यश्री द्वारा रचित साहित्यों के पंजाबी संस्करण सहित कई हिन्दी पुस्तकों का विमोचन किया। वहीं बहिनों द्वारा संचालित 27 कुण्डीय यज्ञशाला में पुण्य सलिला मां गंगे की स्वच्छता व निर्मलता की सफलता की कामना करते हुए विशेष आहुतियाँ समर्पित की गयीं।

गुरु दीक्षा एवं संस्कार-

श्रद्धेया शैल दीदी एवं डॉ. पण्ड्याजी ने युगऋषि के प्रतिनिधि के रूप में 1500 से अधिक परिजनों को गायत्री मंत्र से दीक्षित किया। इसका वैदिक कर्मकाण्ड के.पी. दुबे एवं उदयकिशोर मिश्रा ने कराया। वहीं गायत्री तीर्थ में पुंसवन, नामकरण, मुंडन, विद्यारंभ, यज्ञोपवीत सहित विभिन्न संस्कार बड़ी संख्या में निःशुल्क सम्पन्न कराये गये। सायंकाल ब्रह्मवादिनी बहिनों द्वारा संचालित भव्य दीपमहायज्ञ में लोगों ने अपने संकल्प की सफलता हेतु प्रार्थना की।






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