पॉलिथीन, प्रदूषण मुक्त हो अपना शहर के नारों से नहाया सप्तसरोवर, भूपतवाला क्षेत्र
देश-विदेश के कोने-कोने से आये हजारों लोगों ने की भागीदारी

गायत्री तीर्थ शांतिकुंज के हजारों अनुयायी पीतवस्त्रधारी भाई-बहिनों ने आज जन जागरण रैली एवं शोभायात्रा निकाली। ‘प्रदूषण करते को टोको, जल को मल बनने से रोको’; ‘पॉलिथीन पर रोक लगाओ, जल वायु जमीन बचाओ’; ‘नारी का असली शृंगार, सादा जीवन उच्च विचार’; ‘माता गंगा की जय बोलो, पर अमृत में विष न घोलो’; इक्कीसवीं सदी उज्ज्वल भविष्य के नारे के साथ हजारों गायत्री परिजन जोश, उत्साह व उल्लास के साथ शोभा यात्रा में शामिल हुए। लगभग एक किमी लम्बी पैदल व वाहनों में निकली शोभायात्रा में नारे, बैनर, पोस्टर आदि समाज में व्याप्त कुरीतियों को दर्शाती थी, तो वहीं नव निर्माण में गायत्री परिवार की भूमिका को भी बयाँ करती थीं।
प्रात: 11 बजे व्यवस्थापक श्री गौरीशंकर शर्मा व वरिष्ठ प्रतिनिधि कपिल केसरी ने शांतिकुंज के गेट नं० दो पर  युगऋषि पं० श्रीराम शर्मा आचार्य की झाँकी में स्थापित कलश का वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा आरती कर शोभायात्रा को हरी झण्डी दिखा रवाना किया। शोभायात्रा में सबसे आगे इक्कीसवीं सदी का वाहन-साइकिल पर सवार गायत्री परिजन भारतीय वेशभूषा में चल रहे थे। इसके पीछे चल रहे युवा विचार क्रांति अभियान का संदेश दे रहे थे। बैण्ड बाजों की धुन से प्रेरणाप्रद प्रज्ञा गीत से सम्पूर्ण वातावरण संगीतमय हो गया। आत्मिक प्रगति की प्रेरणा देते हुए साधना आन्दोलन की झाँकी में युवा एवं बुजुर्ग हाथ में माला लिए ध्यान लगाये हुए थे।
शोभायात्रा में शांतिकुंज में पहुंचे नौ दिवसीय प्रशिक्षण सत्र, युग शिल्पी सत्र, परिव्राजक सत्र, त्रैमासिक संगीत सत्र की टोलियाँ प्रेरणा प्रद प्रज्ञा गीत प्रस्तुती दे रहे थे, वहीं महिला मण्डल की बहिनों ने नारी जागरण, ‘गंगा को प्रदूषण से बचायेगें, हरी चूनरी चढ़ायेंगे’, ‘स्वच्छ रखें तट, तट के वासी, अशुद्ध न होने दें जल राशि’, ‘माता गंगा की जय बोलो, पर अमृत में विष न घोलो’ आदि नारों को संगीतबद्ध कर ढपली व खंजरी जैसे वाद्य यंत्रों  से बजाते हुए सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रही थीं।
रैली का संचालन कर रहे रामसहाय शुक्ल, हरिमोहन गुप्ता, गंगाधर चौधरी ने बताया कि गेट न० से दो प्रारंभ हुई रैली हाइवे के किनारे-किनारे चल रही थी। इस दौरान यातायात के सुचारु रूप से संचालन के लिए एक युवाओं का दल भी सक्रिय था, जिससे पूरी यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की ट्रैफिक व्यवधान नहीं हुआ। रैली पावनधाम तिराहा, भारतमाता मंदिर, भूपतवाला होते हुए वापस शांतिकुंज के गेट नं० तीन से प्रवेश किया।
इस शोभायात्रा में अमेरिका, मॉरिशस, कनाडा, इंग्लैण्ड, रूस, डेनमार्क, दक्षिण अफ्रीका आदि देशों से आये प्रवासी भारतीय गायत्री परिजन, शांतिकुंज के कार्यकर्त्तागण, ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान के वैज्ञानिक-कार्यकर्त्ता, हरियाणा, बिहार, झारखण्ड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, पं बंगाल, गुजरात, महाराष्ट्र आदि राज्यों से आये भाई-बहिन सभी शामिल थे। शोभायात्रा को अपनी परंपरा अनुसार हरिद्वार के संत-महात्माओं एवं व्यवसायियों ने भी दिल खोलकर सहयोग किया। इस अवसर पर वरिष्ठ कार्यकर्त्ता  रामसहाय शुक्ल आदि भी उपस्थित थे।


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