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तिनसुकिया (असम)
असम मूल निवासी आदिवासी समुदाय में साधना और संस्कारों के प्रति रुचि जगाने के लिए एक विशेष अभियान चलाया है इसी समुदाय के नैष्ठिक युग निर्माणी साधक श्री कृष्णा कर्मकार ने। वे वनवासी समुदाय के लोगों का विधि-विधान से विवाह करा रहे हैं, उन्हें पत्रिकाओं के सदस्य बना रहे हैं और गायत्री मंत्र की दीक्षा भी दे रहे हैं। 

असम के वनवासियों में विवाह संस्कार जैसी कोई परंपरा नहीं है। इसीलिए वे परिवार निर्माण के प्रति जागरूक भी दिखाई नहीं देते। श्री कृष्णा कर्मकार ने लोगों को समझाकर लोगों को दाम्पत्य जीवन की महिमा और गरिमा समझाना आरंभ किया है। वे परम्पराओं को बदल कर नवदम्पतियों के विधि-विधान से उनके विवाह करा रहे हैं। इस अवसर पर वे न केवल नवदम्पतियों को सुखी गृहस्थ जीवन के सूत्र बताते हैं, बल्कि नियमित उपासना, साधना की महत्ता बताकर दीक्षा दिलाते हैं, पत्रिकाओं के सदस्य बनाते हैं। अब तक वे ५२५ ऐसे विवाह सम्पन्न करा चुके हैं। इस आंदोलन से रूपाई तिनसुकिया डिब्रूगढ़ में नई जागृति आ रही है।


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