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नासा द्वारा आयोजित निबंध प्रतियोगिता में गायत्री विद्यापीठ ने लहराया परचम उत्तराखंड में सबसे ज्यादा आलेख लिखने वाले विद्यार्थी शांतिकुंज से
खगोल विद्या में बाल वैज्ञानिकों की अनूठी पैठ 

हरिद्वार 09 फरवरी।
बच्चों को अवसर, प्रोत्साहन और सुविधाएँ प्राप्त हो जाएँ, तो वे भविष्य के प्रसिद्ध वैज्ञानिक बन सकते हैं। इसका नमूना मिला- नैशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा, अमेरिका)  पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता में। गौरतबल है कि नासा ने पिछले दिनों शनि ग्रह पर केस्सिनी यान छोड़ था, इसी केस्सिनी मिशन के संबंध पर शनि और उसके वलय, पेनमूल और एफ रिंग इन विषयों पर अन्तर्राष्ट्रीय निबन्ध प्रतियोगिता रखी गयी थी। निबंध लिखने में छात्र-छात्राओं को भाषा की स्वतंत्रता थी। इनमें हरिद्वार निवासनी गायत्री विद्यापीठ की कक्षा 7 की कु० धरा शर्मा ने प्रथम दस में स्थान बनाने में सफलता हासिल की है।
 उत्तराखंड से सबसे ज्यादा निबंध लिखने वाले गायत्री विद्यापीठ के 29 विद्यार्थियों की रचना को नासा ने काफी पसंद किया। विद्यापीठ के विद्यार्थियों ने शनि की कुल सात वलय- जिनमें पेन्डोरा और प्रोमोथन नाम के चंद्र घूमते हैं, पर बेहतरीन निबंध लिखे थे। ज्ञात हो कि इस प्रतियोगिता में देश विदेश के कक्षा 5 से 12 तक के करीब पांच सौ विद्यार्थियों ने भाग लिया था। इनमें गायत्री परिवार के बच्चों की संख्या सबसे अधिक थी।
नासा की ओर से भारतीय संयोजक बनाए गए बडोदरा गुजरात के खगोलशास्त्री दिव्यदर्शन पुरोहित के अनुसार इस निबंध प्रतियोगिता में भारत के 140 विद्यार्थियों ने भाग लिया था। नासा द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता में भारत के प्रथम दस में से सात छात्राएँ हैं। इनमें गुजरात के बरोड़ा हाई स्कूल की हेता पटेल, ऊर्जा पण्ड्या और हिमानी दवे व पटेला की महजबीन बानो तथा गायत्री विद्यापीठ राजनांदगांव छत्तीसगढ़ के दीपेश भारती, सौरभ राठी और जसप्रीत कौर ने नासा की विजेता सूची में अपना स्थान बनाया।
इस अवसर पर गायत्री परिवार के प्रमुख व विद्यापीठ के अभिभावक डॉ. प्रणव पण्डया, संस्था की अधिष्ठात्री शैलदीदी ने विद्यार्थियों की इस सफलता पर उन्हें बधाई दी है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में गायत्री विद्यापीठ के बच्चे और कई उपलब्धियाँ हासिल करेंगे, इस हेतु कई प्रयास किये जा रहे हैं। विद्यापीठ के प्रधानाचार्य कैलाश महाजन सहित समस्त आचार्य व स्टाफ ने भी विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ दी।


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