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          चारधाम के यात्रियों की एक माह तक सेवा-सुश्रुषा कर देवसंस्कृति विश्वविद्यालय शांतिकुंज के २० सदस्यीय चिकित्सकीय टीम आज वापस लौट आयी। इस दल का बेस कैम्प अगस्त्यमुनि था। टीम समन्वयक जिला चिकित्सालय हरिद्वार के डॉ सीपी त्रिपाठी एवं सह समन्वयक डॉ. अजित तिवारी के नेतृत्व में गयी टोली ने यात्रियों  की-श्रद्धालुओं की वैकल्पिक चिकित्सा- एक्यूप्रेशर, मर्म चिकित्सा, योग, आहार, प्राकृतिक व पंचकर्म चिकित्सा से उपचार किया। डॉ त्रिपाठी के अनुसार एक दिन में औसतन सौ लोग चिकित्सा सेवा का लाभ उठाते थे।
          दल के लौटने पर संस्था की अधिष्ठात्री शैल दीदी एवं देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्या ने टीम के सदस्यों से यात्रियों का हाल चाल जाना एवं आवश्यकता पड़ने पर और सेवा करने की बात कही। समन्वयक डॉ सीपी त्रिपाठी ने बताया कि टीम के सदस्यों ने जरूरतमंदों की सेवा-सुश्रुषा साधना मानकर की।


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प्राणियों, वनस्पतियों व पारिस्थितिक तंत्र के अधिकारों की रक्षा हेतु गायत्री परिवार से विनम्र आव्हान/अनुरोध

हम विश्वास दिलाते हैं की जीव, जगत, वनस्पति व पारिस्थितिकी तंत्र के व्यापक हित में उसके अधिकार को वापस दिलवाना ही हमारा एकमात्र उद्देश्य और मिशन है| जलवायु संकट की वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखते हुए तथा जीव-जगत को.....

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गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में तीन दिवसीय युवा सम्मेलन का आज समापन

क्षमता का विकास करने का सर्वोत्तम समय युवावस्था - डॉ पण्ड्याराष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के युवाओं को तीन दिवसीय सम्मेलन का समापनहरिद्वार 17 अगस्त।गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में तीन दिवसीय युवा सम्मेलन का आज समापन हो गया। इस सम्मेलन में राष्ट्रीय राजधानी.....