अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा पहली बरसी पर

  • आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी एवं आदरणीया शैल जीजी पीड़ितों का दुःख-दर्द बँटाने बाबा केदारनाथ धाम पहुँचे। पुनर्वास योजना में बनाये मकानों का लोकार्पण किया।

सतत अनुभव होता रहा पीड़ितों का दर्द
उत्तराखंड में गतवर्ष आयी भीषण आपदा दिल दहला देने वाली थी। न जाने कितने हजार लोग इसका दर्द आज तक झेल रहे हैं और वर्षों तक झेलते रहेंगे। शांतिकुंज ने भी सतत इस दुःख-दर्द की अनुभूति की है। भले ही शांतिकुंज या गायत्री परिवार के परिजनों को इससे ज्यादा हानि नहीं हुई हो, लेकिन सारी मानव जाति को एक परिवार मानने वाले गायत्री परिवार ने पीड़ितों की पीड़ा को हर समय वैसे ही अनुभव किया जैसे अपने घर के ही किसी व्यक्ति पर यह दर्दनाक आपदा घटित हुई हो। वर्षभर अपने भाइयों के माध्यम से प्रभावितों को हर संभव सहायता करते रहने वाले आदरणीया जीजी-डॉ. साहब स्वयं भी २ और ३ जून २०१४ को आपदा पीड़ित गाँवों में पहुँचे और उनकी पीड़ा को प्रत्यक्ष देखा, अनुभव किया। भले ही वे हर गाँव-हर व्यक्ति के माध्यम से न मिल पाये हों, लेकिन तीन गाँवों के लोगों से मिलकर, उन्हें अपने ममत्व की वर्षा कर सभी तक यह संदेश पहुँचाया कि वे अकेले नहीं हैं। शांतिकुंज-गायत्री परिवार उन्हें हर संभव सहयोग देगा और उन्हें अपने अपने पैरों पर खड़ा होने में सदैव साथ रहेगा। 


स्नेह सलिला जीजी के ममत्व से अभिभूत हुए गाँववासी
आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी एवं आदरणीया शैल जीजी २ और ३ जून को शांतिकुंज द्वारा किये गये पुनर्वास कार्यों का निरीक्षण और लोकार्पण करने केदारनाथ क्षेत्र में पहुँचे। २ जून को वे सारी, सारी ग्वाड और नागडाडा गाँववासियों के बीच थे। तीनों गाँवों के सैकड़ों गाँववासी उनसे मिलने के लिए बड़े उत्साह के साथ वहाँ पहुँचे थे। 

जीजी-डॉ. साहब ने गाँववासियों से चर्चा की। शांतिकुंज द्वारा उनके पुनर्वास के लिए बनाये गये मकान देखे, उनकी परिस्थितियों को समझा। पीड़ितों के दुःखदर्द सुनते हुए वे अनेक बार भावुक हो गये। जीजी ने अनाथ हुई बहिनों और छोटे बच्चों को छाती से लगाया, उनके सिर पर हाथ फेरते हुए अपने ममत्व का अहसास कराया। 


बाबा केदारनाथ के दर्शन-प्रार्थना
३ जून को आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी एवं आदरणीया शैल जीजी ने बाबा केदारनाथ के धाम पहुँचकर उनके दर्शन किये। उनसे मानवमात्र के उज्ज्वल भविष्य की प्रार्थना की। इस अवसर पर उनका पूरा परिवार सुपुत्र एवं पुत्रवधु डॉ. चिन्मय एवं श्रीमती शेफाली तथा दोनों पौत्रियाँ-आहुति, स्तुति साथ थीं। साथ गये शांतिकुंज स्वयंसेवक श्री सूरज प्रसाद शुक्ला, श्री संतोष सिंह और केदारनाथ धाम में यात्रियों की सेवा के लिए भोजनालय चला रही श्री महेश राठौड़ की टोली ने भी बाबा के दर्शन करते हुए विश्व कल्याण की प्रार्थना की। 

शांतिकुंज के प्रमुख प्रतिनिधियों ने केदारनाथ धाम के पुरोहितों, वहाँ के स्थानीय निवासी और व्यापारियों से चर्चा करते हुए उनकी कुशलक्षेम जानी। गतवर्ष की आपदा के संदर्भ में चर्चा के बीच उन्होंने कहा कि बीती घटनाओं से हमें सबक जरूर लेना चाहिए। यह एक पवित्र तीर्थ है। व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर जनमानस को अपने, अपने देश और समाज की प्रगति की प्रेरणा देना तीर्थों का धर्म है। इस धर्म का पालन होना ही चाहिए। शांतिकुंज प्रतिनिधियों द्वारा संचालित भोजनालय का निरीक्षण करने भी पहुँचे। 


शांतिकुंज का एक वर्षीय राहत एवं पुनर्वास अभियान
  •   आपदा के पहले दिन-१६ जून २०१३ से ही आरंभ हो गया था अभियान।
  •  पीड़ितों तक भोजन के पैकेट पहुँचाने से आरंभ हुआ अभियान।
  •  पहले १५ दिन २५ से ३० हजार लोगों तक भोजन के पैकेट पहुँचाये गये। 
  •  टूटे मार्ग और दरकते पहाड़ों के बीच साहस का परिचय देते हुए बचाव एवं राहत कार्यों में भी पहुँची शांतिकुंज की कई टोलियाँ। 
  •  हरिद्वार जिले और ऋषिकेष क्षेत्र के जलमग्र २४ गाँवों में भोजन और राशन पहुँचाया। शांतिकुंज के कई वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भी पहुँचकर गाँववासियों का दुःख जाना।
  •  गुजरात और मध्य प्रदेश ने शांतिकुंज को बनाया आपदा प्रबंधन बेस कैम्प। शांतिकुंज ने अन्य प्रदेशों से आने वाले हर आपदाग्रस्त की सेवा की व्यवस्था की। उनके भोजन, आवास और चिकित्सा की व्यवस्था की गयी। प्रदेश सरकारों के सहयोग से उनके घर तक पहुँचाने की व्यवस्था की गयी। 
  •  १६३ गाँवों में चला सर्वेक्षण, राशन, कपड़े, बर्तन, त्रिपाल, कंबल व अन्य जीवनावश्यक वस्तुएँ पहुँचाने का कार्य। 
  •  लगभग दो माह तक सभी सत्र स्थगित रहे। भोजन व राशन के पैकेट बनाने में प्रतिदिन शांतिकुंज के आश्रमवासी एवं शिविरार्थी हजारों की संख्या में इस कार्य में जुटे रहे। 
  •  वर्षाऋतु समाप्त होते ही पुनर्वास का कार्य आरंभ हो गया। इसके अंतर्गत २० गाँवों में टीन से बड़े १५-२० वर्षों के लिए टिकाऊ भूकम्परोधी २०० से अधिक मकान बनाये गये। इनमें विद्यालयों के लिए बनाये गये बड़े शेड और सामुदायिक भवन भी शामिल हैं। शांतिकुंज में उनके खंडों का निर्माण कर उन्हें गाँवों में लेजाकर जोड़ा जाता था। 
  •  आपदा के समय लोगों की जान बचाते हुए शहीद हुए एनडीआरएफ एवं आईटीबीपी के २० जवानों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की गयी। 
  •  समग्र आपदा प्रबंधन कार्य आदरणीय डॉ. साहब-जीजी एवं शांतिकुंज व्यवस्थापक एवं आपदा प्रबंधन विभाग के प्रभारी श्री गौरीशंकर शर्मा जी के मार्गदर्शन में चला।
  •  श्री वर्धमान संस्कार धाम मुंबई, श्री महावीर जैन श्वेताम्बर सेवा केन्द्र, जैन समाज आबूरोड़ सिरोही, जाइंट्स ग्रुप एवं थिंक टैंक ग्रुप बारडोली (गुजरात) ने अपनी सेवा-सहायता पीड़ितों तक पहुँचाने के लिए शांतिकुंज का सहयोग लिया। 
  •  देश-विदेश के गायत्री परिवार के परिजनों ने राहत, बचाव एवं पुनर्वास कार्यों के लिए बड़ी उदारता के साथ धन एवं साधन शांतिकुंज के आपदा राहत कोश में जमा कराये।
  •  श्री सत्येन्द्र जी, अधिशासी निदेशक, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान, नई दिल्ली के नेतृत्व में भारत सरकार का केन्द्रीय पर्यवेक्षक दल तथा श्रीमती कंवलजीत सिंह कौर, मानवाधिकार अन्वेक्षक का दल क्रमशः १२ एवं १५ जुलाई २०१३ को शांतिकुंज आया। उन्होंने शांतिकुंज की कार्यप्रणाली की भरपूर प्रशंसा की। 


आदरणीया शैल जीजी
  • वहाँ आयोजित एक सभा को सिसकियों के बीच संबोधित करते हुए आदरणीया जीजी ने कहा-
  • आप और हम एक ही परिवार के सदस्य हैं। आप दुःख-दर्द झेलते रहें और हम चैन से रहें, यह संभव नहीं। आपके समाचार हमें मिलते रहे हैं। आपकी कष्ट-कठिनाइयों को आज प्रत्यक्ष भी देखा है। यहाँ तक पहुँचना आसान नहीं है, लेकिन अपने भाइयों के माध्यम से आप सबकी सेवा-सहायता का हर संभव प्रयास किया है। विश्वास रखना, आप अकेले नहीं हैं। यह पूरा देव परिवार आपके साथ है। 
  • इस आश्वासन के बाद साथ आये शांतिकुंज के भाइयों से उन्होंने कहा कि इन जरूरतमंदों की जो भी सहायता संभव हो, जरूर की जाये। इसके लिए यदि शांतिकुंज में धन की कमी पड़ी तो परम वंदनीया माताजी के आदर्शों का अनुसरण करते हुए हम अपने पास जो कुछ है वह इन दुखियों की सेवा में लगाने को अपना सौभाग्य समझेंगे। 

आदरणीय डॉ. प्रणव जी
  • आदरणीय डॉ. साहब ने गाँववासियों को केवल जरूरत के सामान उपलब्ध कराने का ही नहीं, उनके बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य का ध्यान रखने का विश्वास दिलाया। उन्होंने गाँववासियों को उनके बच्चों को देव संस्कृति विश्वविद्यालय में पढ़ाने में हर तरह का सहयोग करेंगे। 
  • डॉ. साहब ने कहा कि हम केवल सहायता करने नहीं आये। पूरी देवभूमि उत्तराखंड हमारा परिवार है। हम इस क्षेत्र को शिक्षित, व्यसनमुक्त, स्वावलम्बी, संस्कारवान बनाने की योजनाएँ चलायेंगे। इस क्षेत्र का आदर्श विकास कर देश के सामने एक आदर्श प्रस्तुत करने का हमारा मन है। आप अपना दर्द भुलाकर निश्चिंत होकर अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाने के लिए जुट जाइये। हम और हमारी गुरुसत्ता-विश्व मानवता का भाग्य बदलने वाली दैवी शक्ति आप सबके सहयोग के लिए तत्पर है। 

गाँववासियों ने कहा
आदरणीया जीजी-डॉ. साहब व शांतिकुंज प्रतिनिधियों से मिलकर गाँववासी भावविभोर थे। उन्होंने कहा-
  • हम सोच भी नहीं सकते थे कि कोई हमारी इस प्रकार सहायता करेगा। आपने तो हमें अपना ही बना लिया है। हम अपने दुःख-दर्द को तो नहीं भुला सकते, लेकिन आपने हमारी सहायता कर हमें अपना बना लिया है। देते तो कई हैं, सरकार भी देती है, लेकिन आपने जो दिया है उसे लेने में भी हमें गौरव होता है। हम इतने अच्छे लोगों से जुड़ गये, यह हमारे जीवन का परम सौभाग्य है। 
साथी-सहयोगी
  • शांतिकुंज से डॉ. चिन्मय पण्ड्या की टोली चिकित्सा सेवाओं के लिए और श्री गौरी शंकर सैनी-अभियंता की एक टोली निर्माण कार्य के लिए पहले ही यहाँ पहुँच चुकी थी। जीजी-डॉ. साहब के साथ उनकी पुत्रवधु श्रीमती शेफाली, पौत्री आहुति व स्तुति भी थीं। 


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