• गौ, गंगा, गायत्री तीनों दिव्य धाराएँ हैं। हम चाहते हैं कि वे हमारा उद्धार कर दें, लेकिन उनकी भी हमसे कुछ अपेक्षाएँ हैं, यह हमें समझना चाहिए।  वे हमारा उद्धार कर देंगे, हम उन्हें अपने भीतर जगह तो दें। 
  • जो अर्जुन कृष्ण को निहत्था अपने रथ पर बिछाकर विजय के लिए आश्वस्त हो गया, वह उन्हें ही समझाने लगा! उसी प्रकार हम गौ, गंगा से अपने उद्धार की अपेक्षा तो रखते हैं, लेकिन उन्हें मातृभाव से कहाँ देख पाते हैं। यदि देखा होता तो आज उनकी यह दुर्दशा न होती।
  • हमें अपने भीतर गायत्री जाग्रत् करनी पड़ेगी। हर व्यक्ति तक गायत्री को पहुँचाने के लिए भीतर एक ऊर्जा होनी चाहिए, एक तड़प उठनी चाहिए। 
  • हमें अपने गुरु को उनके सिद्धांतों के रूप में, विचारों के रूप में जन-जन तक पहुँचाना है लेकिन हम गुरु की नहीं, गुरु को मनवाने की अपेक्षा रखने लगते हैं। पूजापाठ कोई भी हो, प्रार्थना सब सद्बुद्धि पाने की, उज्ज्वल भविष्य की स्थापना की करें। भोजन के समय उसे सुसंस्कारी बनाने की कामना हो। काम के समय सन्मार्ग पर चलने की चाह विकसित हो, यही गायत्री है। 
                               - आदरणीय श्री वीरेश्वर उपाध्याय जी


माँ के अभाव में भटक जाते हैं बच्चे
गायत्री ज्ञान का बीज है। माँ संस्कारों का पोषण करने वाली है। माँ के अभाव में बच्चे भटक जाते हैं, आतंकी-अनाचारी बनने लगते हैं। यही आज दुनिया के रसातल में गिरते जाने का सबसे बड़ा कारण है।

व्यक्तिगत जीवन में आये दोषों का निवारण व्यक्तिगत साधना से हो सकता है, लेकिन सामाजिक जीवन के दोषों और अभिशापों को दूर करने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे। परम पूज्य गुरुदेव ने पूर्व में समय-समय पर सामूहिक साधना प्रयोग कराये हैं। हमें समूह साधना के इन प्रयोगों को पुनः प्रखर बनाना होगा।    
           - श्री केसरी कपिल जी


गंगा प्रदूषण दूर करने के लिए आदतें बदलनी होंगी
गंगा को प्रदूषणमुक्त करने के लिए हमें अपनी आदतों को बदलने की आवश्यकता है। एक अध्ययन के अनुसार गंगा में ३० प्रतिशत प्रदूषण कल-कारखानों से होता है, जबकि ७० प्रतिशत प्रदूषण गलत आदतों से होता है।  
                          - श्री कालीचरण शर्मा जी
गौमाता हमारी भाव संवेदनाओं की पोषक है, स्वास्थ्य और समृद्धि का आधार है। गोमाता हमारी राष्ट्रीय धरोहर है।          
  - डॉ. शशिकला साहू






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