काल के उपचार केवल सद्गुरु के पास: डॉ प्रणव पण्ड्याजी  

भावी कार्यक्रमों की हुई घोषणा, हिन्दी सहित विभिन्न भाषाओं के साहित्य का विमोचन


सद्गुरु को समर्पित गुरुपूर्णिमा का पावन पर्व गायत्री तीर्थ शांतिकुंज के मुख्य सभागार में हजारों साधकों के बीच हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर देश- विदेश से आये साधकों ने अपने आराध्य- सद्गुरु पं. श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा निर्देशित सूत्रों को जन- जन तक फैलाने का संकल्प लिया। वहीं पूज्य आचार्यश्री को 2400 से अधिक साधकों ने गुरुरूप में वरण किया।

गुरुपूर्णिमा के मुख्य कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए संस्था की अधिष्ठात्री शैल दीदी ने कहा कि बांसुरी की तरह खाली होने से ही सद्गुुरु का आशीष प्राप्त होता है। सद्गुरु पूज्य आचार्यश्री अपने शिष्यों की पात्रता के विकास के लिए उपासना- सत्प्रवृत्तियों की निकटता, साधना- स्वयं की तथा आराधना- निःस्वार्थ भाव से समाजसेवा करने के लिए प्रेरित करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि सद्गुुरु अज्ञान से भटके, अंधकार व स्वार्थ में लिपटे अपने शिष्यों को मुक्ति दिलाते हैं। उन्होंने कहा कि पूज्य आचार्यश्री ने जीवन भर प्रेम बोया और प्रेम- प्यार ही काटा है, इसके ही सहारे वे अपने शिष्यों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते रहे हैं। वे प्यार, करुणा व संवेदना की प्रतिमूर्ति थे।

देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति व अध्यात्मवेत्ता डॉ प्रणव पण्ड्या ने कहा कि दुर्बुद्धि के विनाश एवं सद्बुद्धि के विकास के लिए ही सद्गुरु धरती पर अवतरित होते हैं। वे काल के उपचार करते हैं तथा अपने शिष्यों के विकास में बाधक बन रहे माया- मोह से छुड़कारा दिलाते हैं। उन्होंने कहा कि नीति से नियति निर्धारित होती है और नियति से निमित्त बनने का सौभाग्य प्राप्त होता है और यह सब सद्गुरु की कृपा से ही संभव है। अध्यात्मवेत्ता डॉ पण्ड्या ने गीता के विविध श्लोकों के माध्यम से शिष्य के समर्पण भाव की गाथा बताते हुए कहा कि अर्जुन अर्थात् अरि जु न (अंदर से पवित्र) होने से सद्गुुरु का संरक्षण प्राप्त होता है।

गायत्री परिवार के तीन भावी कार्यक्रमों की घोषणा करते हुए डॉ. पण्ड्या ने कहा कि ऋषियों के इस देश के प्रत्येक जिलों में से गांव चयनित कर गोद लिया जायेगा। निर्मल गंगा जन अभियान के साथ देश के विभिन्न नदियों के संरक्षण एवं शुद्धि अभियान चलाया जायेगा, इसमें दस लाख से अधिक स्वयंसेवी जुटेंगे। वातावरण परिशोधन के लिए 2014 से 2026 तक बारह वर्षीय विशेष सामूहिक साधना अभियान चलाया जायेगा। मुख्य आयोजन के साथ ही डॉ पण्ड्या एवं संस्था की अधिष्ठात्री शैल दीदी ने हिन्दी के दो, अंग्रेजी के दो तथा पंजाबी व नेपाली के तीन- तीन तथा शांतिकुंज पंचांग का विमोचन किया। इससे पूर्व पर्व पूजन का वैदिक कर्मकांड डॉ गायत्री किशोर त्रिवेदी एवं जितेन्द्र मिश्र ने कराया।

गुरु दीक्षा एवं संस्कार-

श्रद्धेया शैल दीदी एवं डॉ. पण्ड्याजी    ने युगऋषि के प्रतिनिधि के रूप में 2400 से अधिक परिजनों को गायत्री मंत्र से दीक्षित किया। इसका वैदिक कर्मकाण्ड दिनेश पटेल एवं दिवाकर पारखे ने कराया। वहीं गायत्री तीर्थ में पुंसवन, नामकरण, मुंडन, विद्यारंभ, यज्ञोपवीत सहित विभिन्न संस्कार बड़ी संख्या में निःशुल्क सम्पन्न कराये गये। सायंकाल भव्य दीपमहायज्ञ में लोगों ने अपने संकल्प की सफलता हेतु प्रार्थना की।

निःशुल्क बाँटे पौधे-


शांतिकुंज स्थित उद्यान विभाग ने गायत्री तीर्थ आये साधकों में हजार से अधिक फलदार व छायादार वृक्ष के पौधे निःशुल्क बाँटे।

बाँटे गुरुप्रसाद-

देवसंस्कृति विवि के विद्यार्थियों ने शांतिकुंज आये लोगों में नशा निवारण, आत्म विकास में सहायक, बुद्धि बढ़ाने के कौशल, योग, ध्यान, साधना के संबंधित हजारों की संख्या में ऋषि प्रसाद के रूप में सत्साहित्य का वितरण किया।

Guru Purnima Celebration 2014 With Shraddhey Dr. Pranav Pandya | Shraddheya Shailbala Pandya

" target="_blank">https://www.youtube.com/watch?v=57LUPKpgD40

Guru Purnima Celebration 2014 @ Shraddhey Dr. Pranav Pandya Addressing All Parijan

http://youtu.be/TwNKe-MP6_E

Guru Purnima Celebration @ Guru Diksha Sanskar At Shantikunj Haridwar 12th July 2014

http://youtu.be/aGlx2uoCF14

Guru Purnima Celebration @ Yug Sangeet ( Geet -01 ) At Shantikunj Haridwar 12th July 2014

http://youtu.be/ueVMG8FhGp0







Write Your Comments Here:


img

गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में तीन दिवसीय युवा सम्मेलन का आज समापन

क्षमता का विकास करने का सर्वोत्तम समय युवावस्था - डॉ पण्ड्याराष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के युवाओं को तीन दिवसीय सम्मेलन का समापनहरिद्वार 17 अगस्त।गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में तीन दिवसीय युवा सम्मेलन का आज समापन हो गया। इस सम्मेलन में राष्ट्रीय राजधानी.....

img

दे.स.वि.वि. के ज्ञानदीक्षा समारोह में भारत के 22 राज्य एवं चीन सहित 6 देशों के 523 नवप्रवेशी विद्यार्थी हुए दीक्षित

जीवन खुशी देने के लिए होना चाहिए ः डॉ. निशंकचेतनापरक विद्या की सदैव उपासना करनी चाहिए ः डॉ पण्ड्याहरिद्वार 21 जुलाई।जीवन विद्या के आलोक केन्द्र देवसंस्कृति विश्वविद्यालय शांतिकुंज के 35वें ज्ञानदीक्षा समारोह में नवप्रवेशार्थी समाज और राष्ट्र सेवा की ओर.....

img

देसंविवि की नियंता एनईटी (योग) में 100 परसेंटाइल के साथ देश भर में आयी अव्वल

देसंविवि का एक और कीर्तिमानहरिद्वार 19 जुलाईदेव संस्कृति विश्वविद्यालय ने एनईटी (नेशनल एलीजीबिलिटी टेस्ट -योग) के क्षेत्र में एक और कीर्तिमान स्थापित किया है। देसंविवि के योग विज्ञान की छात्रा नियंता जोशी ने एनईटी (योग)- 2019 की परीक्षा में 100.....