23 जून 2014 को आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी द्वारा गायत्री शक्तिपीठ, पुष्कर में प्राण प्रतिष्ठित प्रज्ञेश्वर महादेव की प्राण प्रतिष्ठा की गयी। इस अवसर पर तीर्थराज पुष्कर के अनेक गणमान्य धर्माचार्यों, राजस्थान सरकार और प्रशासनिक प्रमुख उपस्थित थे। उन्होंने ज्ञानगंगा-गायत्री को अवतरित करने वाले युगभगीरथ परम पूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी के मानसपुत्रों द्वारा पिछले एक वर्ष से पुष्करतीर्थ के विकास के लिए चलाये जा रहे कार्यों को सराहा। परिवर्तन के अधिष्ठाता महाकाल प्रज्ञेश्वर महादेव इन संकल्पों को जनव्यापी और प्रखर बनायेंगे, ऐसा उनका विश्वास है। 

तीन दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा समारोह ने नगर में किया नयी ऊर्जा का संचार 
२१ से २३ जून तक के तीन दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा समारोह का शुभारंभ विशाल कलश यात्रा से हुआ। आदि तीर्थ पुष्कर का पूजन कर पवित्र जल गाजेबाजे के साथ शक्तिपीठ प्रांगण में लाया गया। ७०० श्रद्धालुओं ने शक्तिपीठ में कलश पूजन किया। फिर संतों-महंतों के नेतृत्व में आध्यात्मिक परिक्रमा आरंभ हुई। राम रमैया आश्रम के सन्त प्रेमदास जी ने देव पूजन ब्रह्माजी के रथ का पूजन तथा हरी झण्डी बता कर यात्रा का शुभारम्भ किया। 

यह शक्तिकलश यात्रा प्रमुख मंदिर-आश्रमों का आशीर्वाद लेते हुए, पवित्र घाटों से गुजरते हुए शक्तिपीठ पहुँची। जगह-जगह पुष्पवर्षा और शीतल जल से नगरवासियों ने युग साधकों का हार्दिक स्वागत किया। इस यात्रा में पुष्कर अरण्य तीर्थ महात्म्य, मर्यादाओं एवं संकल्पों के बेनर तख्तियाँ सब को प्रभावित कर रही थीं। 

यज्ञ-कथा ः  प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के उपलक्ष्य में २२ एवं २३ जून को २४ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ एवं विभिन्न संस्कार आयोजित हुए। २१ की सायं और २२ की दोपहर पुष्कर अरण्य प्रज्ञा पुराण कथा कही गई। श्री गोपाल स्वामी की टोली ने कथा कहते हुए श्रोताओं को अपनी सनातन देव संस्कृति के अलौकिक रस में सराबोर कर दिया।
 
दीपयज्ञ ः २२ जून की सायं सहस्र वेदीय दीपयज्ञ में आद. डॉ. प्रणव पण्ड्या जी के पावन सान्निध्य में सम्पन्न हुआ। मुख्य अतिथि श्री ओंकार सिंह लखावत अध्यक्ष धरोहर प्रोन्नति-संरक्षण पुरातत्व विभाग, राजस्थान सरकार एवं विशिष्ट अतिथि श्री सुरेश सिंह रावत विधायक पुष्कर, पूर्व मुख्य जस्टिस भार्गव जी सहित अनेक जन प्रतिनिधि इस अवसर पर उपस्थित थे। राजस्थान के कोने-कोने से आये हजारों कार्यकर्त्ताओं से पूरा पाण्डाल खचाखच भरा था। 

२३ जून को ब्रह्ममुहूर्त में आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने प्राण प्रतिष्ठा का मंगल विधान सम्पन्न कराया। दश स्नान, अभिषेक, पूजन, आरती के समय हजारों कार्यकर्ताओं से शक्तिपीठ परिसर एवं महाविद्यालय प्रांगण पूरा भरा था। 


तीर्थ चेतना के निखार और परिष्कार के संकल्प की सुंदर परिणति प्रज्ञेश्वर महादेव की प्राण प्रतिष्ठा                                 
आदरणीय डॉ. साहब ने दीपयज्ञ के अवसर पर दिये अपने संदेश में कहा कि प्रज्ञेश्वर महादेव की स्थापना आदितीर्थ पुष्कर अरण्य को सेवा, साधना, सहयोग और श्रमदान के बल पर एक जीवंत-जाग्रत् तीर्थ बनाने के संकल्प की शुभ परिणति है। उन्होंने इसके लिए गायत्री परिवार द्वारा पिछले एक वर्ष से किये जा रहे साधनात्मक पुरुषार्थ की खूब-खूब सराहना की और मानवमात्र के उत्कर्ष के लिए इसमें सहयोग देने का आह्वान सभी से किया। 

आदरणीय डॉ. साहब ने कहा कि यह कार्य सारे देश के तीर्थ स्थलों के लिए प्रेरणा-प्रकाश देने वाला है। ऐसे सामूहिक, समर्पित प्रयासों से धर्मतंत्र के प्रति लोगों में सही आस्था जागेगी। मूढ़ मान्यताओं, रूढ़ि-पंरपराओं-अंधविश्वासों से उन्हें मुक्ति मिलेगी। अपनी साधना, अपने श्रम-सहकार के आधार पर पुण्य कमाने और ईश्वर का अनुग्रह प्राप्त करने की सनातन परंपरा पुनर्जीवित होगी। 

इस अवसर पर उन्होंने गायत्री परिवार के निर्मल गंगा जनअभियान और वृक्षगंगा अभियान में लोगों की सक्रिय भागीदारी की अपील की, उत्तराखंड आपदा के समय मानवता के आधार पर शांतिकुंज द्वारा किये गये सेवा कार्यों की जानकारी दी। 


आदितीर्थ पुष्कर अरण्य  अभिनव निर्धारण

गायत्री परिवार का लक्ष्य है देश के तीर्थों की गौरव-गरिमा को अपनी सनातन संस्कृति के अनुरूप निखारकर उन्हें जन-जागरण के केन्द्र बनाना। इसकी अभिव्यक्ति और पुष्कर अरण्य में भावी सक्रियता के लिए सबकी सहमति बनाने के लिए २१ जून को सायं संकल्प गोष्ठी का आयोजन किया गया। 

गोष्ठी का शुभारंभ पुष्कर तीर्थ वन्दना से हुआ। इसमें आश्रमों के सन्त, महन्त, तीर्थ-पुरोहित, समाजसेवी, पत्रकार, सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं गायत्री परिवार के सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित थे । संतश्री प्रेमदास जी (राम रमैया आश्रम), सन्त समता राम जी (गौशाला प्रबन्धक), स्वामी कापड़ी जी, श्री जनार्दन प्रसाद शर्मा (पूर्व चेयरमेन न.पा. पुष्कर), श्री अनन्त प्रसाद गनेरीवाल (मुख्य प्रबंधक पुराना रंगजी मंदिर), श्री ठाकुर प्रसाद पाराशर, पत्रकार श्री अरूण पाराशर, रामरत्नाचार्य आदि ने पुष्कर को सुरम्य एवं पावन बनाने के लिए चर्चा में भाग लिया। प्रस्तावना एवं संयोजन श्री घनश्याम पालीवाल ने किया । सर्वसम्मति से यह निर्धारण किये गये ः-
  •  राज्याश्रित मानसिकता से ऊपर उठकर श्रद्धासिक्त भाव से पुष्करतीर्थ की सेवा करेंगे । 
  •  माह में एक दिन स्वैच्छिक सफाई श्रमदान करेंगे । 
  •  सघन वृक्षारोपण एवं ब्रह्म वाटिकाएँ पुष्कर अरण्य में लगायेंगे।  
  •  तपःस्थलियों, मंदिरों, आश्रमों की आध्यात्मिकता ऊर्जा जाग्रत् करने हेतु अखण्ड अग्नि, यज्ञ-जप-तप-कीर्तन आदि करेंगे । 
  •  हर माह ब्रह्मा मंदिर में गायत्री यज्ञ करेंगे । 
  •  पुष्कर अरण्य महात्माओं, तीर्थों, तपःस्थलियों के पौराणिक चित्रों सहित पत्रक संस्थानों के माध्यम से छपवा कर बाँटेगें। 
  •  श्रावण मास की एकादशी से हरियाली अमावस्या तक पुष्कर अरण्य की 24 कोसीय रथयात्रा एवं 84 कोसीय पदयात्रा अधिकाधिक संस्था, आश्रम, संत, पुरोहित एवं गायत्री परिजनों सहित निकाली जायगी । 
(क) सरोवर पर पक्षियों के दाना डालने के स्थान निर्धारित हों, ताकि जल में अन्न से सड़ान्ध पैदा न हो ।
(ख) ब्रह्म सरोवर के पास धूम्रपान निषेध हो । 
(ग) प्लास्टिक पर प्रतिबन्ध लगे । 
(घ) मृतकों की हड्डियाँ, राख डालने के स्थान निश्चित हो ताकि समय-समय पर उनकी सफाई हो सके । 


समारोह की विशिष्ट झलकियाँ-उल्लेखनीय प्रसंग

सरकार का सहयोग
श्री ओंकार सिंह लखावत अध्यक्ष धरोहर प्रोन्नति-संरक्षण पुरातत्व विभाग, राजस्थान सरकार - ब्रह्मा जी के सृजन यज्ञ के बाद पहली बार यह युगान्तरीय संकल्प हुआ है । हमारा विभाग, हमारी सरकार इस पुनीत कार्य में कोई अवरोध नहीं आने देंगे। 

११ लाख महामृत्युंजय मंत्र जप
  • प्राण प्रतिष्ठा के समय २४ घंटे का अखण्ड जप रखा गया, जिसमें ११ लाख महामृत्युंजय मंत्र का जप किया गया। 
  • दीपयज्ञ के अवसर पर आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी द्वारा समस्त उपस्थित साधकों को हाथ उठवाकर ‘पुष्कर तीर्थ सेवा संकल्प’ दिलाये गये। 
पुष्करतीर्थ का अभिषेक
  • आदरणीय डॉ. प्रणव जी ने ब्रह्मघाट पर वैदिक विधान के साथ पुष्कर सरोवर पूजन-अभिषेक  और तर्पण किया। उसके बाद तीर्थ पुरोहित संघ की कार्यकारिणी द्वारा आदरणीय डॉ. साहब का सम्मान किया गया। 
ब्रह्माजी का आशीष
  • वहाँ से वे ब्रह्मा मन्दिर गये । ब्रह्मा जी के गर्भगृह में चतुर्मुखी दर्शन, आरती की। ब्रह्मा जी के रजतहार एवं शॉल आदि से महन्त सोमपुरी जी ने आदरणीय डाक्टर साहब का सम्मान किया। 
क्षत्रिय समाज से मिला सम्मान
  • क्षत्रिय समाज की और से जयमल कोट में शांतिकुंज प्रतिनिधि का अभिनन्दन सरोपा एवं शौर्य की प्रतीक तलवार भेंट कर किया गया। 
वृक्षारोपण महाभियान
  • श्रावण मास में पुष्कर अरण्य में स्मृति स्वरूप १००८ नीम, बरगद, पीपल आदि के वृक्ष सीमेण्ट के ट्री-गार्डों सहित लगाये जायेंगे। इस कार्यक्रम में ऐसे ३०० पेड़ लगाने के संकल्प लिये गये।यज्ञ-प्रसाद स्वरूप 1000 पौधे बाँटे गये। 
विशेष सहयोग
  • पुराना रंगजी मंदिर के मुख्य प्रबंधक श्री अनंत प्रसाद गनेरीवाल, ब्रह्मा मंदिर के महंत श्री सोमपुरी, ब्रह्म घाट के तीर्थ पुरोहित श्री हरिप्रसाद के अलावा पुष्कर के तीर्थ पुरोहित संघ, नया रंगजी मंदिर, अष्टभू स्वामी मंदिर, गुरुद्वारा, राम सखा आश्रम, राम धाम आश्रम, पीपाचार्य धर्मशाला, आचार्य धर्मशाला, पारीक आश्रम, वैष्णव धर्मशाला, जयमलकोट, पुष्कर हैरिटेज आदि के प्रमुखों ने कार्यक्रम में उल्लेखनीय सहयोग दिया।  


सावित्री साधना शिविर शृंखला ः परिवर्तन का प्रखर संकल्प, एक सशक्त जन आन्दोलन
  • राजस्थान के जोनल केन्द्र पुष्कर पिछले लगभग एक वर्ष से पुष्कर तीर्थ में सावित्री साधना शिविरों का क्रम आरंभ किया है। इसके तीन उद्देश्य हैं-
  • १. विश्व प्रसिद्ध तीर्थक्षेत्र में सामूहिक साधना से साधकों की आस्था का परिष्कार करना। २. साधकों की ऊर्जा को लोकमंगल की दिशा में नियोजित करने का अभ्यास कराना, तथा ३. सामूहिक प्रयासों से पुष्करतीर्थ को साफ-सुथरा बनाकर, सत्प्रवृत्तियों के प्रति जनजागृति लाकर इसे एक ऐसे आदर्श तीर्थ के रूप में परिणत करना जो पूरे देश को सही प्रेरणा और दिशा दे सके। 
  • सावित्री साधना शिविर हर माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी से पूर्णिमा तक आयोजित होते हैं। पूरे राजस्थान ही नहीं, देशभर के साधक बड़ी संख्या में इसमें भाग लेते हैं। पाँच दिन में पौराणिक महत्त्व के अलग-अलग स्थानों पर जप, तप, सूर्यार्घ्यदान, सामूहिक तर्पण, पुष्कर अरण्य कथा, स्वाध्याय, स्वच्छता जैसे सामूहिक कार्यक्रम प्रतिदिन सम्पन्न होते हैं। इसी बीच जनजागरण के लिए ८४ कोसीय रथयात्रा एवं २४ गाँवों की पदयात्राओं का अलग-अलग समूहों में आयोजन होता है। साधकगण घर-घर और तीर्थयात्रियों से संपर्क कर सामाजिक हित के कार्यक्रम-स्वच्छता, स्वास्थ्य, नशा और पॉलीथीन उन्मूलन, कन्याभ्रूण हत्या के प्रति रोग, अंध विश्वास और मूढ़ परंपराओं को बदलना, नारी जागरण जैसे विषयों के प्रति जागरूक करते हैं। 
  • क्रमशः यह आन्दोलन बहुत ही लोकप्रिय होता जा रहा है। आश्रम, तीर्थक्षेत्र, पौराणिक स्थलों की बढ़ती साफ-सफाई ने संत, महंत, पुरोहित, नगरवासी, तीर्थयात्री और प्रशासन सभी को प्रभावित किया है। लोगों में आशा की किरण जाग रही है, उनका सहयोग मिल रहा है। इसी जनजागृति को जन आन्दोलन बनाने की आकांक्षा के साथ गायत्री परिवार ने गायत्री शक्तिपीठ पुष्कर में प्रज्ञेश्वर महादेव की स्थापना की है। 



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