नर को नारायण और मनुष्य को महान बनाने वाले गुरुतत्त्व के प्रति आस्था के आरोपण के पावन पर्व गुरुपूर्णिमा पर युगतीर्थ शांतिकुंज में भारी जनसैलाब उमड़ा। इतना जनसमूह पहले किसी पर्व पर दिखाई नहीं दिया। संभवतः यह इस वर्ष समूह साधना से समूह मन के निर्माण और चेतना जागरण के लिए देशभर में चल रहे प्रयोगों का ही परिणाम था। निर्मल गंगा जन अभियान, आदर्श ग्रामतीर्थ योजना, हरीतिमा संवर्धन-वृक्षगंगा, नशा उन्मूलन, युवा चेतना जागरण, बाल संस्कार शाला जैसी योजनाओं के माध्यम से समाज में बदलाव की एक नयी बयार चला देने वाले युग निर्माणी गुरुपर्व पर अपनी भावभरी सक्रियता और संकल्पों 
की श्रद्धांजलि लेकर अपने गुरुद्वारे पहुँचे। 

शांतिकुंज में मनाये गये तीन दिवसीय समारोह ने परम पूज्य गुरुदेव-परम वंदनीया माताजी द्वारा अपने बच्चों पर निरंतर बरसाये जा रहे प्रेम, अनुदान, संरक्षण और आशीषों की अनुभूति कराते हुए उनमें सक्रियता की नयी उमंग जगायी। लौटते समय हर साधक-शिष्य के मन में अपने इष्ट, अपने आराध्य, अपने सबसे आत्मीय अभिभवाक के जीवन पथ को अपनाकर उनकी आशाओं पर खरे उतरने की चाह थी। अपना सर्वस्व अर्पित कर जीवन धन्य बनाने की उमंग थी। युग की अवतारी चेतना का सामीप्य प्राप्त करने के गौरव की अनुभूति थी। 



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