आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी और आदरणीया शैल जीजी ने की प्राण प्रतिष्ठा, जोनल केन्द्र बनाया गया 

दक्षिण भारत में युगशक्ति गायत्री का एक और प्रकाश स्तंभ जनमानस के लिए सक्रिय हो गया। आदरणीया शैल जीजी एवं आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने २९ जून २०१४ के दिन केन्द्र के लोकार्पण के साथ वहाँ स्थापित गायत्री की दिव्य प्रतिमा में प्राण प्रतिष्ठा की। दक्षिण में हैदराबाद और नोएडा, गाजियाबाद की भाँति कोयंबटूर का गायत्री चेतना केन्द्र भी बहुमंजिला, विशाल और बहुउद्देश्यीय है। 

कॉटन सिटी के नाम से विश्व विख्यात् कायंबटूर में नवनिर्मित गायत्री चेतना केन्द्र कोयंबटूर को जोनल केन्द्र के रूप में स्थापित किया गया है। यह केन्द्र तमिलनाडु के साथ केरल, कर्नाटक, पुद्दुचेरी में भी युगशक्ति गायत्री के विस्तार के लिए मिशन के विविध अभियानों को गतिशील करेगा। 

चेतना केन्द्र पर तरह-तरह के साधना एवं प्रशिक्षण शिविर चलाये जायेंगे। जीजी-डॉ. साहब ने वहाँ संगीत, बाल संस्कार शाला, स्वावलम्बन और प्रमुख आन्दोलनों को गतिशील करने वाले प्रशिक्षण सत्र समय-समय पर चलाने की प्रेरणा दी।

तीन दिवसीय समारोह में दिखी सृजन चेतना विस्तार की उमंग
गायत्री चेतना केन्द्र, कोयंबटूर का प्राण प्रतिष्ठा समारोह २७ से २९ जून २०१४ की तारीखों में २४ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ के साथ सम्पन्न हुआ। 

कलश यात्रा ः २७ जून की दोपहर अम्मन कोविल (मंदिर) से कलश यात्रा आरंभ हुई। इसमें सभी वर्गों के भाई-बहिनों ने भाग लिया। युग गायकों की ओजस्वी प्रस्तुतियों ने हर हृदय में राष्ट्रभक्ति एवं संस्कृति प्रेम का संचार किया। सर्वश्री गोपाल माहेश्वरी, कैलाश प्र. अग्रवाल, ओमप्रकाश चांडक, उपेन्द्रनाथ सिंह द्वारा कलश पूजन के बाद श्रीमती प्रशांति शर्मा ने बहिनों के मस्तक पर मंगल कलश धारण कराये। कलश यात्रा ने पूरे नगर में नये आध्यात्मिक जोश और उल्लास का संचार किया। 

यज्ञशाला में प्रवेश पर पुष्पवर्षा के साथ स्वागत और मंगल आरती से अभिभूत बहिनें इस ऐतिहासिक समारोह में भागीदारी को जीवन का अखण्ड सौभाग्य मान रही थीं।

जीजी-डॉ. साहब का भव्य स्वागत
आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी और आदरणीया जीजी के कोयंबटूर पहुँचने पर आयोजकों और नगरवासियों ने उनके स्वागत में पलक पाँवड़े बिछा दिये। एअरपोर्ट के भूतपूर्व निदेशक श्री एन.के. सिन्हा की अगुवाई में लोगों ने पुष्पहार पहनाकर उनका भव्य स्वागत किया। आवास स्थल श्री कैलाश प्रसाद अग्रवाल के घर पर भी उनके स्वागत-सत्कार के लिए बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे। अगले दिन प्रातः वहाँ विशिष्ट महानुभावों की गोष्ठी हुई, जिसमें समाज के नवनिर्माण की रूपरेखा शांतिकुंज प्रतिनिधियों ने प्रस्तुत की। 

गायत्री महाविद्या पर उद्बोधन
२८ जून की प्रातः यज्ञशाला में आदरणीय डॉ. साहब ने गायत्री महाविद्या पर प्रकाश डालने वाला मार्मिक उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में अमृत, पारस, कल्पवृक्ष, कामधेनु, ब्रह्मास्त्र जैसे जिन अलौकिक शब्दों का वर्णन है, वस्तुतः वह गायत्री उपासना से मिलने वाली सिद्धियाँ ही हैं। शुद्ध हृदय और निर्मल अंतःकरण वालों को यह सिद्धियाँ सहजता से प्राप्त हो जाती हैं। आत्मा पर चढ़े मलीनता के आवरण को हटाने का ही नाम है गायत्री उपासना। यह मलीनता जैसे-जैसे हटती जाती है, उसी अनुपात में उसका घर-परिवार स्वर्ग समान बनता जाता है। 

आदरणीय डॉ. साहब ने गायत्री के वेदमाता से लेकर देवमाता और विश्वमाता स्वरूप की व्याख्या की। इस युग में उनके उद्धारक परम पूज्य गुरुदेव-माताजी का परिचय कराया और उसे जन-जन तक पहुँचाने की आवश्यकता समझायी। 

कार्यकर्त्ता संगोष्ठी
२८ जून को दक्षिण भारत और देश के विभिन्न प्रांतों से आये कार्यकर्त्ताओं की गोष्ठी हुई। आदरणीया जीजी एवं आदरणीय डॉ. साहब ने उन्हें भावी सक्रियता के दिशा-निर्देश दिये। गायत्री माता मंदिर में बैठकर गुरुदेव, माताजी, गायत्री माता के आशीर्वादों के साथ जन्मदिवस एवं विवाह दिवसोत्सव मनाने का अभियान चलाने की विशेष प्रेरणा दी। 

दीपयज्ञ के अवसर पर आदरणीया जीजी के स्नेहासिक्त वचन सुनकर पूरे दक्षिण के कार्यकर्त्ता भावविभोर हो गये। श्रीमती सूजा एवं श्रीमती भागीरथी अम्मा ने बारी-बारी से जीजी के प्रवचन का मलयाली भाषांतर किया। जीजी-डॉ. साहब ने हिंदी, तमिल, मलयालम, तेलुगु, गुजराती एवं अंग्रेजी में प्रकाशित गुरुदेव का साहित्य प्रसाद-रूप में वितरित किया। 

प्राण प्रतिष्ठा जन-जन में भी
आदरणीया शैल जीजी एवं आदरणीय डॉ. साहब द्वारा २९ जून की उषावेला में गायत्री माता की प्राण प्रतिष्ठा पूरे विधि-विधान के साथ सम्पन्न हुई। इस अवसर पर सैकड़ों साधक यज्ञशाला में बैठे मौन गायत्री महामंत्र जप के साथ प्राण संचार की साधना कर रहे थे। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो माता के प्राण और तेज के एक अंश की प्रतिष्ठा उन सब में भी हो रही है। प्राण प्रतिष्ठा के बाद माता की प्रतिमा में विशिष्ट तेज के दर्शन साधकों ने किये। जीजी-डॉ. साहब के साथ सभी ने शंख, घंटा, घड़ियाल के दिव्य निनाद के बीच महाआरती की। 

दीक्षा ः प्राण प्रतिष्ठा के बाद उपस्थित अधिकांश लोगों ने सामूहिक दीक्षा ली। आदरणीय डॉ. साहब ने गुरुदीक्षा का महत्त्व बताया, आदरणीया जीजी ने दीक्षा दिलाते हुए हुए नवचेतना का संचार किया। यज्ञाचार्यों ने इस अवसर पर साधकों को नियमित बलिवैश्व यज्ञ, समयदान और अंशदान के संकल्प कराये। डॉ. बृजमोहन गौड़ जी ने सभी समयदानी, अंशदानियों का चंदन-तिलक लगाकर सम्मान किया। 

विशिष्ट दायित्व सँभाले
कलश यात्रा, यज्ञ एवं भोजनशाला का दायित्व बाबा रामदेव सेवासंघ के अध्यक्ष श्री गोपाल सिंह राठौर एवं श्री अशोक कुमार राजपुरोहित की टोली ने सँभाला। वे मिशन के विचारों और कार्यक्रम के स्वरूप को देखकर गद्गद थे। उनके अलावा शांतिकुंज प्रतिनिधि श्री उमेश शर्मा एवं श्रीमती प्रशांति शर्मा; प्रमुख कार्यकर्त्ता सर्वश्री शिवाकान्त त्रिपाठी, सोमदेव भारद्वाज, श्रीमती सुरेखा बेन, कृष्णावतार गुप्ता, रितेश मौर्या, टीसी अग्रवाल, मूलचंद पटेल, धर्मेश शर्मा, अटल गुप्ता, श्रीधर, त्रिलोचन जी, सत्यदेव जी, बिरला जी, रमेश देशमुख, श्रीमती भानुबेन, कमलाबेन, हेमन्त गुप्ता आदि ने मिलकर विभिन्न दायित्व बड़ी श्रद्धा-भावना और कुशलता के साथ सँभाले। 

दक्षिण भारत का प्रभार सँभालने वाले डॉ. बृजमोहन गौड़, श्री उत्तम गायकवाड़, श्री उमेश शर्मा, श्रीमती प्रशांति शर्मा ने गायत्री चेतना के निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा समारोह के आयोजन में प्रमुख योगदान दिया। प्राण प्रतिष्ठा के ऐतिहासिक समारोह को सम्पन्न कराने शांतिकुंज से सर्वश्री सूरज प्रसाद शुक्ला, उदय किशोर मिश्र, ओइन्द्र सिंह, ओंकार पाटीदार, बसंत यादव, संतोष सिंह एवं खिलावन सिन्हा की विशाल टोली पहुँची थी। तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, पुद्दुचेरी और आँध्र प्रदेश के अनेक नगरों की शाखाओं के नैष्ठिक कार्यकर्त्ताओं ने कार्यक्रम की सफलता के लिए समयदान किया और लोकमंगल के पथ पर कदम बढ़ाते हुए बड़ी श्रद्धा के साथ यज्ञाहुतियाँ समर्पित कीं।   


गायत्री चेतना केन्द्र कोयंबटूर
पिछले सात वर्षों के सतत प्रयासों कोयंबटूर में यह बड़ा चार मंजिला भव्य गायत्री चेतना केन्द्र बनकर तैयार हुआ। इसके भूतल में चिकित्सालय है। श्री शिव शर्मा एवं डॉ. गोपालकृष्णन इसके लिए प्रात-७ से ९ बजे तक प्रतिदिन सेवाएँ प्रदान करेंगे। तल मंजिल पर साहित्य स्टॉल, जोनल कार्यालय, कार्यकर्त्ता आवास और माता भगवती भोजनालय बनाये गये हैं। प्रथम मंजिल पर दक्षिण भारतीय शैली में बड़ा मनोरम गायत्री माता का मंदिर बनाया गया है। वहाँ नवप्रतिष्ठित प्रतिमा अत्यंत दिव्य और बिलकुल सजीव प्रतीत होती है। दूसरी मंजिल पर सत्संग भवन और प्रशिक्षण केन्द्र हैं तथा सबसे ऊपर यज्ञशाला बनायी गयी है। 


अखण्ड ज्योति ‘मलयाली’ का विमोचन
  •  परम पूज्य गुरुदेव के विचारों की पाती मलयाली भाषा में प्रकाशित ‘अखण्ड ज्योति’ का विमोचन आदरणीय डॉ. साहब, आदरणीया जीजी द्वारा किया गया। मलयाली अनुवादक श्री ज्योतिष प्रभाकरन एवं श्री सुकुमारन के सहयोग से श्री एम.टी. विश्वनाथन इस पत्रिका के प्रकाशन का दायित्व सँभाल रहे हैं। 

दक्षिण भारत में बड़े आयोजनों के संकल्प उभरे
  •  श्री करम सी. पटेल ने २७ से २९ दिसम्बर २०१४ में ईरोड़ में १०८ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ आयोजन का संकल्प लिया। 
  • श्री त्रिवेणी नाथ शर्मा २०१५ में सेलम में १०८ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ करायेंगे। 
  •  मदुरै और चेन्नै के कार्यकर्त्ताओं ने पूरे तमिलनाडु में यज्ञ शृंखला चलाने और भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा का आयोजन कराने का तानाबाना बुना। 
  •  समारोह में मलयाली, तमिल, तेलुगु भाषी प्राणवान परिजन बड़ी संख्या में उपस्थित थे। उन्हें दो-दो माह समयदान करने के संकल्प दिलाये गये। 


वीतराग संत का आशीष
कोयंबटूर से २० किमी. की दूरी पर है वीतराग संत स्वामी दयानंद जी का आश्रम-आर्ष विद्या गुरुकुलम्। आदरणीय डॉ. प्रणव जी और आदरणीया शैल जीजी स्वामी जी से मिलने विशेष रूप से उनके आश्रम पहुँचे। उनकी कुशलक्षेम जानी। उल्लेखनीय है कि स्वामी जी ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सनातन संस्कृति के उत्थान के लिए विविध धार्मिक संगठनों के समन्वय में बड़ी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। गायत्री परिवार के प्रति उनका सदा से विशेष प्रेम रहा है। 

आदरणीय डॉ. साहब-जीजी के आगमन से स्वामी जी अत्यंत भावविभोर दिखाई दिये। उन्होंने गायत्री परिवार की सक्रियता पर हार्दिक प्रसन्नता व्यक्त करते हुए खूब-खूब आशीष दिये। उन्होंने कहा कि संस्कृति के उत्थान के लिए आप जो काम कर रहे हैं वह निश्चित ही मानवता को उज्ज्वल भविष्य प्रदान करेंगे। उन्होंने गायत्री परिवार द्वारा तमिलनाडु में वनवासियों के कल्याण के लिए चलायी जाने वाली योजनाओं में आर्ष विद्या गुरुकुलम् के पूरे-पूरे सहयोग का आश्वासन दिया। 
स्वामी जी को आदरणीय डॉ. साहब के द्वारा उनके ब्रह्मदण्ड की जानकारी मिली कि यह परम पूज्य गुरुदेव द्वारा अभिमंत्रित किया गया है तो उन्होंने बड़ी श्रद्धा से उसे स्पर्श किया और कहा कि इसके स्पर्श से मैं आत्मिक ऊर्जा की अनुभूति कर रहा हूँ।



Write Your Comments Here:


img

dqsdqsd

sqsqdsqdqs.....

img

sqdqsdqsdqsd.....

img

Op

gaytri shatipith jobat m p.....