"परिवर्तन के इस काल खंड में आप दर्शक मात्र बने रहेंगे या परिवर्तन की इस अभूतपूर्व बेल में उमंग पूर्वक भागीदारी करेंगे ?" संयुक्त राज्य अमेरिका की शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक राजधानी बॉस्टन में  डॉ चिन्मय पण्ड्या ने "मानवीय उत्कर्ष" के विषय पर क्रांतिकारी उद्बोधन करते हुए यहां के सुधी जनों को मन्त्रमुग्ध कर दिया ।  बॉस्टन के उपनगर बिल्लेरीका स्थित श्री द्वारकामाई विद्यापीठ का सभागृह मंगलवार २२ जुलाई २०१४ को संध्या काल ही उत्सुक और उत्साही २०० से भी अधिक श्रोताओं द्वारा सम्पूर्ण रूप भर गया था । श्रीमती संगीता सक्सेना ने कुशल मंच संचालन करते हुए कार्यक्रम के प्रवाह को गति दी । डॉ चिन्मय के आगमन पर श्रीमती स्मिता कपाड़िया एवं श्रीमती सुनीता दिलवाली ने भावभीना स्वागत किया। डॉ चिन्मय के उद्बोधन के पूर्व उनका हृदय स्पर्शी परिचय देते हुएगायत्री परिवार मेसाचुसेट्स के युवा स्वयंसेवक श्री परमव्योम सक्सेना (स्वामी) ने  श्रोताओं की उर्वरा मनोभूमि निर्मित की । सभी स्वयंसेवकों की लगन एवं पुरुषार्थ ने इस कार्यक्रम को अति सफल बनाया । इसमें सभी सामजिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों की उल्लासपूर्ण उपस्थिति थी।

डॉ चिन्मय ने वर्तमान वैश्विकविक चुनौतियों के सन्दर्भ में परम पूज्य गुरुदेव के "उपासना-साधना-आराधना" के सूत्रों को मानवीय उत्कर्ष तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बताया । सभी श्रोतागण इन विचारों से प्रेरणा ले कर  उत्कृष्ट जीवन के प्रति संकल्पित हुए । श्री संजय सक्सेना ने डॉ चिन्मय के प्रति कृतज्ञता एवं  सभी  सहवोगियों प्रति धन्यवाद ज्ञापन करते हुए सभा का समापन किया । 




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