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भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा की राष्ट्रीय संगोष्ठी के द्वितीय शिविर में मध्यप्रदेश , छत्तीसगढ़ एवं महाराष्ट्र प्रान्तों की गोष्ठियां 8 मार्च से 10 मार्च 2013 की तिथियों में सम्पन्न हुई। इस गोष्ठी में शांतिकुंज के वरिष्ठ वक्ताओं के माध्यम से विभिन्न विषयों पर प्रकाश डाले गये, डॉ.ओ.पी.शर्मा ने शिक्षा में संस्कृति का समावेश पर प्रकाश डालते हुए उनने कहा शिक्षा में सभ्यता सिखाती है पर विद्या हमें संस्कृति सिखाती है साथ ही कर्त्तव्य का बोध कराती है इससे आत्म सन्तोष एवं शांति प्राप्त होती है।श्री श्यान बिहारी दुबे ने संस्कारों का छात्रों में चरित्र निर्माण में योगदान पर चर्चा करते हुए संस्कार के अभाव में बच्चे क्या से क्या और और संस्कारवान होने से क्या से क्या बन जाते है कई उदाहरण मानस एव अपने अनुभव के आधार पर दिये। भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा का विस्तार पर विभाग प्रभारी श्री नायक ने मैकाले आधारित पाठ्यक्रम के विकास से आई विकृति का उल्लेख करते 1994 से आज तक के भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के पड़ावों, विकास का उल्लेख किया। संस्कृति मण्डल, संस्कृति निष्ट विद्यालय की क्या रूपरेखा हो इस पर श्री अतुल द्विवेदी ने प्रस्तुतीकरण दीया। श्री कुलदीप पाण्डेय, एवं रवि शर्मा द्वारा ओ.एम.आर संबंधी नवीनीकरण त्रुटियों आदि के सरल समाधान प्रस्तुत किये गये। 


व्यक्तित्व तथा वातावरण निर्माण में अभिभावकों एवं शिक्षकों का दायित्व विषय पर श्री कालीचरण जी द्वारा अपने विद्यार्थी जीवन के तीखे अनुभवों का विवरण देते हुए छात्रों के व्यक्तित्व निर्माण में शिक्षकों एवं अभिभावकों के विशेष योगदान का विस्तार से सारगर्भित उल्लेख किया गया। आदर्श विद्यालय, संस्कृति मण्डल कार्य योजना पर श्री रमाकान्त अमेठा जी ने राजस्थान प्रान्त द्वारा प्रतिपादित योजना के क्रियान्वयन सहमति पर विस्तार से तथ्य रखे। अवशेष किताबों का उपयोग परीक्षा तिथि शिविर गोष्ठियों का क्रम शिक्षक गरिमा शिविर आदि के लिए तिथि निर्धारण पर विभाग के वरिष्ठ प्रतिनिधि डॉ. पी.डी गुप्ता द्वारा कई विषयों पर बिन्दुवार चर्चाएं की गई। 2013 के पाठ्यक्रम के प्रारूप पर विभाग के सहयोगी श्री चक्रधर थपलियाल जी द्वारा विभागीय सुझाव रखे गये। इसी शाम वन्दनीय माता जी के बाल संस्कार पर उद्बोधन  एवं शिक्षा विद्या संस्कृति र पूज्य गुरूदेव के सन्देश सुनाए गये। प्रान्तवार गोष्ठियों का संचालन मध्य प्रदेश श्री पी.डी गुप्ता, छत्तीसगढ़ श्री अतुल द्विवेदी एवं महाराष्ट्र श्री राजेश मिश्रा द्वारा किया गया ।। 


राज्यवार गोष्ठियां आयोजित हुई तथा चर्चा, परिचर्चा, के माध्यम से 10 बिन्दुओं पर संकल्प पत्र भरे गये। संकल्प पत्रों में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के साथ- साथ विद्यालयों में शिविर एवं विभिन्न गतिविधियों के क्रियान्वयन पर जोर दिया गया। 


दि. 10 मार्च को आद. एच.पी.सिंह ने सभी को युग निर्माण में प्राण प्रण से जुटने का आहवान किया। आपने बताया कि बाधाएं, प्रतिकूलताएं, विपरीत परिस्थितियाँ और कठिनाईयॉ हमें ओर मजबूत बनाने के लिए आती है। प्रसन्नता, धैर्य, साहस और पुरूषार्थ के साथ भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के माध्यम से शिक्षकों, छात्रों एवं अभिभावकों को संस्कार एवं संस्कृति के रंग में पुनः रंग देना है। संकल्प हमारा और शक्ति ऋषि सत्ता की, गायत्री माता की, ईश्वर की हमें मिलती रहेगी। 



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