• प्रवासी भारतीय बँटा रहे हैं देश का दर्द
  • लोकप्रिय हुआ एक स्वयंसेवक का जनसंपर्क अभियान, ऑकलैण्ड शाखा पूरी करेगी साहित्य की माँग
  • ऋषिकेश-डोईवाला में पहुँचा विवेकानंद दल


शांतिकुंज के विवेकानंद दल ने २७ जुलाई को  देहरादून जिले के डोईवाला, भानियावाला और ऋषिकेश में व्यसनमुक्ति का विशेष अभियान चलाया। इसके लिए निकली २५ सदस्यीय टोली ने पाँच समूहों में बँटकर मुख्य बाजार के दुकानदारों, राहगीरों से व्यक्तिगत संपर्क किया और उन्हें नशा न करने के लिए प्रेरित किया। 

मेगाफोन से बजते व्यसनमुक्ति गीतों और जोशीले नारों ने हर जगह उत्साहभरा वातावरण विनिर्मित किया। लोग पीले कपड़ों वाली टोली को देखकर बहुत प्रफुल्लित थे। उनसे मिला सम्मान इस बात का सूचक था। उन्होंने भी इस अभियान में सहयोग देने की इच्छा व्यक्त की। 

जनसंपर्क अभियान का समापन सुप्रसिद्ध वशिष्ठ गुफा पहुँचकर हुआ। गंगातट के इस पवित्र वातावरण में सभी ने सामूहिक ध्यान साधना करते हुए सबके उज्ज्वल भविष्य, सबके सुखी जीवन की कामना की। श्री श्याम बिहारी दुबे और श्री केपी दुबे इस अभियान का नेतृत्व कर रहे थे। 


ऑकलैण्ड, न्यूज़ीलैण्ड निवासी मिशन के प्रमुख कार्यकर्त्ता श्री जयंती भाई मेहता ने शांतिकुंज के जीवनदानी कार्यकर्त्ता श्री संतराम सेन द्वारा चलाये जा रहे नशामुक्ति अभियान को समग्र सहयोग देने का संकल्प लिया है। इसके लिए वे उन्हें एक लाख रुपये का नशामुक्ति संबंधी साहित्य उपलब्ध करा चुके हैं। भविष्य में उन्हें साहित्य की जो भी आवश्यकता होगी उसकी पूर्ति उनकी शाखा द्वारा की जायेगी, ऐसा आश्वासन उन्होंने दिया है। 

पिछले २५ वर्षों से ऑकलैण्ड में रह रहे श्री जयंती भाई वर्ष २००७ से अपना पूरा समय मिशन के प्रचार-प्रसार के लिए ही लगाते हैं। वे यज्ञ आयोजनों के माध्यम से गुरुदेव की सत्प्रेरणाओं के प्रचार-प्रसार के साथ बच्चों को संस्कारवान बनाने के लिए मुख्य रूप से प्रयत्नशील हैं। उनका मानना है कि न्यूज़ीलैण्ड वासियों के जीवन में भले ही भौतिकवादी सोच और परंपराएँ जड़ कर गयी हों, लेकिन बचपन से ही बच्चों को बदलने के प्रयास किये जायें तो समाज में काफी परिवर्तन किया जा सकता है। 

श्री जयंती भाई के दिल में अपने देश के सुधार के लिए भी बहुत दर्द है। वे स्वयं तो यहाँ काम नहीं कर पाते, लेकिन चाहते हैं कि कोई यदि लोगों में नवचेतना जगाने के लिए समर्पित भाव से काम करता है तो वे उसका वित्त पोषण कर सकते हैं। संयोग से शांतिकुंज के श्री संतराम सेन द्वारा चलाये जा रहे आन्दोलन में उन्हें अपनी अपेक्षाएँ पूरी होती दिखाई दीं, जिसके कारण जयंती भाई ने उनका पूरा-पूरा सहयोग करने का संकल्प ले लिया। 

श्री संतराम सेन प्रतिदिन नशामुक्ति के बैनर और झंडों से सजी साईकिल पर सवार होकर हरिद्वार नगर के विभिन्न मुहल्लों, बाजारों में निकल जाते हैं और नशामुक्ति का बड़ा सशक्त अभियान चला रहे हैं। जो भी बीड़ी, सिगरेट पीता, गुटखा खाता दिखाई देता है उसके पास रुककर बड़ी विनम्रता के साथ नशामुक्ति की प्रेरणा देने वाली एक छोटी-सी पुस्तक और पर्चा थमाते हुए अपने साथ समाज की, परिवार की भलाई के लिए नशा छोड़ने का निवेदन करते हैं। प्रतिदिन सैकड़ों लोगों को वे ऐसी प्रेरणा देते हैं। तीर्थक्षेत्र में आये यात्री अपनी गलती का अहसास करते हुए बड़ी सहजता के साथ नशा त्यागने का संकल्प भी लेते हैं। इस अभियान में अनेक बार पूरी टोली सेन जी के साथ होती है।


संघर्ष पर उतरीं देवियाँ
  • नहीं चलने देंगी बरबादी का बाजार
रामगंज, जमशेदपुर (झारखंड)
नशामुक्ति के लिए अभियान चला रही रामगंज की महिलाओं ने अब उग्र स्वरूप धारण कर लिया है। २० जुलाई को दैनिक भास्कर में प्रकाशित समाचार के अनुसार गाँव की सैकड़ों महिलाएँ हाथ में लाठी लिये साप्ताहिक हटिया (हाट बाजार) में पहुँचीं और वहाँ चल रहे अवैध शराब के कारोबार को तहस-नहस कर दिया। 

ये बहिनें अब सीधे संघर्ष पर उतर आयी हैं। उन्होंने हटिया में पहुँचकर माड़ी और महुआ की अवैध शराब बेचने वालों की खूब पिटाई की। उन्होंने शराबियों को भी नहीं छोड़ा। शराबियों और दुकानदारों में अफरा-तफरी मच गयी। माड़ी गोदाम से सभी शराब छोड़कर भाग खड़े हुए। महिलाओं ने कुछ जरीकेनों की शराब बिखेर दी और कुछ को लेकर जुलूस के रूप में थाने तक आयीं। थानेदार राजदेव शर्मा द्वारा अवैध शराब के कारोबार को बंद कराने का आश्वासन दिये जाने के बाद ही उन्होंने अपना धरना-प्रदर्शन समाप्त किया। 


सिगरेट कम्पनी पर अरबों का जुर्माना
  • अमेरिका की एक अदालत का चौंकाने वाला फैसला
  • यह हैं अच्छे दिनों के संकेत
मियामी (अमेरिका)
अमेरिका निवासी सिंथिया रॉबिंसन के पति चेन स्मोकर थे। २० साल तक लगातार सिगरेट सेवन करने के कारण कैंसर से उनके पति की मौत हो गयी। सिंथिया रॉबिंसन ने अमेरिका की एक अदालत में सिगरेट बनाने वाली कंपनी पर मानहानि का मुकदमा किया। अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए सिगरेट बनाने वाली कम्पनी को १ लाख ४२ हजार २६१ करोड़ रुपये का हर्जाना और १०८ करोड़ रुपये का मुआवजा श्रीमती सिंथिया रॉबिंसन  को देने का फैसला सुनाया है। 

२१ जुलाई २०१४ को दिल्ली से प्रकाशित दैनिक भास्कर का यह प्रथम समाचार था। हालाँकि अदालत के आदेश से मिली रकम ने स्वयं सिंथिया रॉबिंसन को भी चौंका दिया, लेकिन इतना निश्चित है कि दैवी इच्छा बलवान हो रही है, समय और परिस्थितियाँ बदल रही हैं। मानवीय सत्प्रयासों को ईश्वर का भी सहयोग मिलने लगा है। अच्छे दिनों के संकेत मिल रहे हैं।   



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