• आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी के मार्गदर्शन में २२ वर्षों से सक्रिय शाखाओं को मिला डॉ. चिन्मय का संग

देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या और श्री राजकुमार वैष्णव की टोली अमेरिका प्रवास पर पहुँची। दिनांक क्- जुलाई से ब् अगस्त तक वहाँ के कई बड़े नगरों में युवाओं के बीच कार्यक्रमों को उन्होंने संबोधित किया। उनके प्रेरणादायी और उत्साहवर्धक व्याख्यानों ने हर कार्यक्रम में युवा रक्त में नयी स्फुरणा जगायी। युग निर्माण आन्दोलन को गतिशील करने की उमंग बढ़ी। देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रति ओजस्वी, तेजस्वी युगनायकों को गढ़ने के केन्द्र के रूप में पहचान मिली। उनके नेतृत्व में युग निर्माण आन्दोलन की नयी पीढ़ी के उदय का विश्वास प्रबल हुआ। प्रवास के कुछ कार्यक्रमों का विवरण प्रस्तुत है। 

आत्मशक्तियों के जागरण से आती है ‘उत्कृष्टता’

स्वामी विवेकानंद ने कहा है कि प्रत्येक व्यक्ति बह्माण्ड की समस्त शक्तियों का स्वामी है। उन्हें जगाना और उनका सार्थक उपयोग करना ही मानवीय उत्कृष्टता है। सूर्य तो सर्वत्र अपना प्रकाश बिखेर रहा है, हम ही अपनी आँखों को हाथों से छिपाये अंधकार का रोना रोयें तो इसमें सूर्य का क्या दोष। हताशा और निराशा के भाव छोड़ो, अपने भीतर छिपे वैभव को जगाओ और विश्वास रखो कि तुम कुछ भी कर सकते हो, सब कुछ कर सकते हो। 
देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने यह विचार १९ जुलाई की सायं ‘मानवीय उत्कृष्टता (॥ह्वद्वड्डठ्ठ श्वफ्ष्द्गद्यद्यद्गठ्ठष्द्ग)’ विषय पर दिये अत्यंत प्रेरणादायी और उत्साहवर्धक व्याख्यान में व्यक्त किये। उनके अमेरिका प्रवास का यह प्रथम व्याख्यान लोंग आइलैण्ड शाखा द्वारा आयोजित किया गया था। 
डॉ. चिन्मय ने व्यक्तित्व विकास के लिए परम पूज्य गुरुदेव द्वारा दिये सूत्रों की व्याख्या की। उन्होंने प्रथम एवरेस्ट विजेता एडमंड हिलेरी की पुस्तक का उल्लेख किया। उन्होंने लिखा है-एक ऊँचाई तक पहुँचने पर मेरे मन में विचार आया कि पहाड़ नहीं बढ़ सकता, लेकिन मानवीय क्षमताओं का विस्तार हो सकता है। यह विश्वास ही मेरी सफलता का आधार बना। डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि अपनी सफलता और क्षमताओं के प्रति ऐसा विश्वास ही मानवीय उत्कर्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।
आरंभ में अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। न्यूयॉर्क स्टेट असेंबली के सदस्य फिलिप रामोस एवं चैड लुपिनासी के साथ अरविंद वोरा-अध्यक्ष लोंग आइलैण्ड मल्टीफेथ फोरम, श्री बकुल मटालिया-अध्यक्ष गुजराती कल्चरल सोसाइटी, स्वामीनारायण संस्था के श्री प्रफुल्ल वाघेला, आईटीवी न्यूयॉर्क के निदेशक अशोक व्यास आदि अनेक गणमान्यों ने शांतिकुंज प्रतिनिधि का स्वागत किया। 
तत्पश्चात् गायत्री ज्ञान केन्द्र लोंग आइलैण्ड के ११वर्षीय पार्थ मेराई द्वारा गायी प्रार्थना ‘हे प्रभु हमको अपनी कृपा की छाँह में ले लीजिए ...’ और रिती भल्ला द्वारा गाये अमेरिका के राष्ट्रीय गीत से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। डॉ. चिन्मय पण्ड्या के व्याख्यान से पूर्व मानवीय उत्कर्ष पर आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी का एक वीडियो दिखाया गया। श्री प्रवीण कापड़िया ने उनके द्वारा वर्ष २००६ में २० बच्चों से आरंभ किये गये गायत्री ज्ञान केन्द्र लोंग आइलैण्ड का प्रगति प्रतिवेदन और भावी विस्तार की संभावनाओं पर प्रेज़ेण्टेशन दिया।  उल्लेखनीय है कि इस बाल संस्कार शाला में आज २०० विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। 
कार्यक्रम का समापन देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या द्वारा विशिष्ट अभ्यागतों के अभिनंदन के साथ हुआ। डॉ. महेन्द्रभाई पटेल के सहयोग से उन्होंने सभी को गायत्री मंत्र का उपवस्त्र उढ़ाकर और युग साहित्य भेंट कर सम्मानित किया। 


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