सुदूर बसे हनुमानों को सौभाग्य की याद दिलाई



व्यक्ति की उत्कृष्टता उसके लक्ष्य और पुरुषार्थ पर आधारित होती है। जितना बड़ा लक्ष्य हो और उसे पाने की जितनी चेष्टा की जाये, परमात्मा का सहयोग और अनुदान  उसी अनुपात में उसे मिलता चला जाता है। जब भी एक्सेलेंस (उत्कृष्टता) के विचार हमारे दिमाग में आते हैं तो हम बड़े पद,  आलीशान घर और सुविधा-साधनों की सोचने लगते हैं। इतना तो व्यक्ति अपनी बुद्धि के बल पर प्राप्त कर लेता है। 

व्यक्ति में सामर्थ्य है पूरे समाज को बदलने की, हजारों-लाखों लोगों को सही दिशा देने की, उनका नेतृत्व करने की। परम पूज्य गुरुदेव ने अपने अंग-अवयवों को यही चुनौती दी है, अवसर दिया है। परिवर्तन के इस कालखंड में क्या हम दर्शक मात्र बने रहेंगे या भीतर से उठती उमंगों को पहचान कर सार्थक कदम बढ़ायेंगे। परिवर्तन सुनिश्चित है। देखना इतनाभर है कि श्रेय लेने के लिए सार्थक कदम किसके बढ़ते हैं?

बोस्टन के उपनगर बिल्लेरीका स्थित श्री द्वारकाभाई विद्यापीठ के सभागार में युवाओं को संबोधित करते हुए देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी ने युवाओं के समक्ष यह चुनौती प्रस्तुत की। २२ जुलाई को आयोजित इस कार्यक्रम में  २०० भारतीय युवक-युवतियाँ उपस्थित थे। उनकी सौम्य वाणी और तेजस्वी व्यक्तित्व ने लोगों पर जादूई प्रभाव डालते हुए उनकी संवेदनाओं को झकझोरा और परमार्थ की प्रेरणा दी।

कई सामाजिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक संस्थाओं के परिजन इस सभा में उपस्थित थे। डॉ. चिन्मय ने उपासना, साधना, आराधना से परमात्मा का सामीप्य प्राप्त करने का विधान बड़े मार्मिक शब्दों में व्यक्त किया। 

आरंभ में श्रीमती स्मिता कापड़िया और श्रीमती सुनीता दिलवाली ने शांतिकुंज के युवा परिव्राजक का हार्दिक अभिनंदन किया। मैसाचुसेट्स के स्वयं सेवक श्री परम व्योम सक्सेना और स्वामी ने  विश्व पटल पर उभरते युवा नायक के रूप में डॉ. चिन्मय का परिचय कराते हुए श्रोताओं की मनोभूमि को ऊर्वरा बनाया। मंच संचालन श्रीमती संगीता सक्सेना ने और आभार ज्ञापन श्री संजय सक्सेना ने किया। 


दीपयज्ञ के माध्यम से प्रवासियों में प्रेरणा भरी
अटलांटिक सिटी (यूएसए)
२३ जुलाई को डॉ. चिन्मय के मुख्य आतिथ्य में अटलांटिक सिटी में विराट दीपयज्ञ आयोजित हुआ। डॉ. पण्ड्या ने इस अवसर पर गुरुदेव-माताजी का परिचय अपने ममत्व और प्यार से हर व्यक्ति को अभिभूत कर देने वाले माता-पिता के रूप में दिया। उन्होंने कहा कि गुरुदेव-माताजी का स्नेह उस अमृत के समान है, जिसे चखने के बाद उसे पाने की चाह जीवन भर बनी रहती है। 

दीपयज्ञ में विशिष्ट अतिथि जिमी जसानी होटेल मोटेल मैनेजमेण्ट, डॉ. निरंजन त्रिवेदी और कई अन्य डॉक्टर, जयेशभाई शोधा सीनियर सिटिजन ग्रुप एवं काउंटी मल्टी कल्चरल मामलों के समन्वयक, चंद्रेशभाई पटेल तथा नॉर्थ ईस्ट अमेरिका गायत्री परिवार के कई गणमान्य उपस्थित थे। 

दीप महायज्ञ में अध्यात्म के व्यावहारिक स्वरूप की विस्तार से चर्चा हुई। सैकड़ों दीप जलाये, गायत्री महामंत्र आदि के साथ आहुतियाँ दी गयीं। जलते दीपों के बीच मंत्र-तरंगों ने सभी को भाव विभोर कर दिया। 

इससे पूर्व अटलांटिक सिटी पहुँचने पर डॉ. चिन्मय का भव्य स्वागत हुआ। जयेश झा, जयप्रकाश पटेल, अमृतभाई पटेल आदि बहुत सारे लोग पुष्पहारों के साथ स्वागत करने हवाई अड्डे पर पहुँचे थे। इसी प्रकार का स्वागत जयेश भाई के आवास-गुरुकृपा पहुँचने पर भी हुआ।  




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