• परिजनों में है बड़े दायित्व निभाने का उत्साह
  •  आदरणीय डॉ. प्रणव जी ने कुरुक्षेत्र शक्तिपीठ को जोनल केन्द्र बनाने की घोषणा की
  •  साधना, प्रशिक्षण, स्वावलम्बन केन्द्र के रूप में विकसित करने संबंधी  सुझाव दिये

गायत्री शक्तिपीठ निर्माण के बाद कुरुक्षेत्र में आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी का प्रथम बार आगमन हुआ। वे २६ जुलाई को कुरुक्षेत्र पहुँचे थे। इस प्रवास में उन्होंने कुरुक्षेत्र नगर तथा आसपास की शाखाओं से पहुँचे लोगों का उत्साहवर्धन किया। इन सौभाग्य-शाली क्षणों ने परिजनों को भावविभोर कर दिया। सभा में उपस्थित लोगों ने शांतिकुंज के प्रमुख प्रतिनिधि के स्वागत में पलक पाँवड़े बिछा दिये। 

आदरणीय डॉ. साहब ने गायत्री शक्तिपीठ कुरुक्षेत्र को जोनल केन्द्र के रूप में विकसित करने की प्रेरणा दी। परिजनों की गोष्ठी को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज चारों ओर जो धार्मिक उन्माद दिखाई देता है, उसे रोकने और संगठित होकर श्रेष्ठता की ओर अग्रसर होने के लिए गायत्री चेतना को घर-घर तक पहुँचा देना नितांत आवश्यक हो गया है। हमें इसके लिए संगठित होकर प्रयास तेज करने होंगे। स्वामी दयानंद जी और महात्मा आनंद स्वामी ने इस क्षेत्र में गायत्री चेतना के विस्तार के लिए बहुत कार्य किया है। लोगों की मनोभूमि बहुत ऊर्वरा है। संगठित और सुनियोजित प्रयास किये जायें तो गायत्री चेतना और गुरुदेव के विचारों को जन-जन तक पहुँचाने में शानदार सफलता प्राप्त की जा सकती है। 

शांतिकुंज प्रतिनिधियों ने शक्तिपीठ की गतिविधियों और व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया तथा भावी विकास के लिए दिशा-निर्देश दिये। जोनल केन्द्र के रूप में साहित्य पटल का विस्तार करना, प्रशिक्षण केन्द्र बनाना, नियमित साधना सत्र चलाना जैसे विषयों पर उन्होंने मार्गदर्शन दिया। इस अवसर पर पश्चिमोत्तर जोन प्रभारी शांतिकुंज प्रतिनिधि श्री सालिग्राम अत्रि, श्री कुशवाहा जी, श्री सीपी भारद्वाज-शक्तिपीठ प्रभारी सहित यमुनानगर, करनाल, पानीपत, जींद, गन्नौर, कुरुक्षेत्र और अम्बाला के कार्यकर्त्ता बड़ी संख्या में उपस्थित थे। 




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