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दिनांक 18.8.2014 से प्रारंभ होने वाली उत्तराखण्ड की विश्व प्रसिद्ध एवं ऐतिहासिक नन्दाराज जात यात्रा है। नौटी से शुरू हुई इस यात्रा का दूसरा पड़ाव इड़ा- बधाणीं है। फिर यात्रा लौठकर नौटी आती है। इसके बाद कासुंवा, सेम, कोटी, भगौती, कुलसारी, चैपडों, नन्दकेशरी, फल्दिया गांव, मुदौली, वाँण, बेदनी, गैरोली पातल,बेदनी, पाताल नचैणियाँ से विश्व- विख्यात रूपकुण्ड, शिला- समुद्र, होमकुण्ड से चनण्यॉंघट (चंदिन्याघाट), सुतोल से घाट होते हुए नन्दप्रयाग और फिर दिनांक 9.9.2014 को नौटी आकर यात्रा का चक्र पूरा होगा। यह दूरी करीब 280 किमी. है।

इस यात्रा को लेकर उत्तराखण्ड के स्थानीय निवासियों से लेकर देश विदेश से आने वाले पर्यटकों में खासा उत्साह है। इस यात्रा को लेकर राज्य सरकार व जिला प्रशासन स्तर पर विशेष तैयारियां की जा रही है। जिला प्रशासन के अनुरोध पर गायत्री परिवार, शांतिकुंज, हरिद्वार भी विशेष सहयोग कर रहा है। शांतिकुंज महत्वपूर्ण संपर्क मार्गों में भोजन व चिकित्सा की व्यवस्था की जा रही है।

इस पूरी व्यवस्था के लिये श्रद्धेय डा.प्रणव पण्ड्या जी ने स्वयंसेवकों की टीम का विशेष मार्गदर्शन देते हुये बताया कि नन्दाराज जात यात्रा का भारतीय संस्कृति के उत्थान में विशेष योगदान है व समस्त प्रदेश में धार्मिक एकता के सूत्र के रुप में देखा जाता है। यह महान आध्यात्मिक यात्रा जन- जन को सांस्कृतिक व राष्ट्रीय सूत्रों से जोड़ने में विशेष सहायक है। इस यात्रा में सहयोग व भागीदारी से गायत्री परिवार गौरवान्वित अनुभव कर रहा है। इस यात्रा में गायत्री परिवार का 22 सदस्यीय दल लोगों के लिये भोजन, चिकित्सा व आवश्यकतानुसार अन्य सहायता प्रदान करेगा।

शांतिकुंज के व्यवस्थापक आदरणीय गौरीशंकर शर्मा जी ने बताया कि प्रबंधन, चिकित्सा, भोजनालय व स्वयंसेवकों की टीम इस कार्य में नियोजित की जा रही है। दल के सभी सदस्य आपदा प्रबंधन व प्राथमिक चिकित्सा से प्रशिक्षित है। समय- समय आने वाली आपदाओं में यही टीम भोजन, चिकित्सा, राहत कार्य व पुनर्वास में अपनी सेवायें प्रदान करती है। नन्दाराज जात यात्रा में प्रबंधन दल के 4 सदस्य, भोजन व्यवस्था में 20 सदस्य, चिकित्सा हेतु 6 सदस्य व चालक दल के 4 सदस्य अपनी सेवायें देंगे। इस यात्रा में एक पानी टैंकर, एक जनरेटर की गाड़ी, दो राशन का वाहन, एक बस स्वयंसेवकों हेतु, एक एंबुलेंस व एक संचालन वाहन कुल 7 वाहन रहेंगे।

पिछले वर्ष केदारनाथ की बाढ़ आपदा में शांतिकुंज ने आपदा राहत कार्यों में विशेष योगदान की चर्चा करते हुये श्रद्धेया जीजी ने सभी कार्यकर्ताओं को अपना शुभाशीष दिया व ऐतिहासिक नंदादेवी राजजात यात्रा की सफलता हेतु विशेष प्रार्थना की।


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