जिला जेल बड़वानी में गायत्री परिवार द्वारा मनाया गया रक्षाबंधन पर बंदियों में यह विश्वास जगाने वाला था कि मनुष्य जन्म से अपराधी नहीं होता। क्रोध, आवेश, नशा जैसी बुराइयाँ उसे अपराधी बना देती हैं। यदि वह चाहे तो अपनी इन आदतों को बदलकर समाज में नेक इंसान का सम्मान प्राप्त कर सकता है।

११ अगस्त को प्रातकाल आयोजित ढाई घंटे के कार्यक्रम को जेल अधीक्षक श्री नरेन्द्रसिंह तोमर और जेलर श्री जी.एल. औसाटी की मुख्य उपस्थिति में श्री महेन्द्र भावसार ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि गायत्री माता की शरण में जाने वाला हर व्यक्ति उनका प्यार पाता और सन्मार्ग की ओर अग्रसर होता जाता है। गायत्री परिवार आपके पास संस्कृति और संस्कार का उपहार लेकर आया है। यदि आप चाहें तो आज से ही आपका नया जन्म हो सकता है। यह केवल अपनी ही नहीं, अपने परिवार और सारे समाज की यह आपके द्वारा की गयी सबसे बड़ी सेवा होगी। 

 
जेल अधीक्षक श्री सुरेन्द्र सिंह ठाकुर ने बंदियों से अच्छे नागरिक बनने की अपील की। बंदियों को अपनी बहिनों की कमी न अखरने देने वाली गायत्री परिवार की बहिनों के प्रति आभार व्यक्त किया। श्री शिवकुंवर तोमर ने भी अपने विचार व्यक्त किये। 
 
महिला मंडल की रेखा पुरोहित ने बंदियों को क्रोध और नशा त्यागने के संकल्प दिलाये। योगिता पंवार, मेधा सूर्यवंशी, चंद्रकांता दसौधी, शकुंतला मंडलोई, राधा पंवार, राजुबाई तंवर, कन्हैयालाल परिव्राजक, कैलाश विश्वकर्मा आदि ने केन्द्रीय जेल बड़वानी में निरुद्ध ८६० बंदियों को राखी बाँधी। भावविभोर अनेक बंदियों ने बहिनों से आशीर्वाद लिये।


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