10 एकड़ भूमि पर रोपे 1008 पौधे
  • जीवन-मरण के साथी हैं वृक्ष।   - शांतिकुंज प्रतिनिधि
जनआस्था की झलक
  •  घनघोर वर्षा की चुनौती  
  • घनघोर बारिश के बीच भी यजमानों ने बड़ी श्रद्धा के साथ वृक्षारोपण किया। कार्यक्रम संयोजक श्री राजेन्द्र व्यास एवं श्री एन.पी. सराठे के नेतृत्व में गनोरा, जीयागाँव, दीपगाँव एवं खातेगाँव के लोगों ने ५ से ७ फीट ऊँचे नीम, पीपल, बड़, करंज, आँवला, गुलमोहर आदि के पौधे लगाये। 
  •  कांवड़ियों का अनुदान  बम बोल कावड़ यात्रा (घाराजी से उज्जैन) के संयोजक श्री गिरधर गुप्ता ने वृक्षों को शिवस्वरूप बताते हुए उनके पोषण के भाव काँवड़ यात्रियों में  जगाये। उन्होंने काँवड़ियों से अंशदान एकत्र कर २१००० रुपये इस तरुपुत्र महायज्ञ में दिये। 

माँ भुवनेश्वरी को उढ़ाई हरी चूनर

मनुष्य का जन्म वृक्ष के उपकारों के साथ होता है और उसके अंतिम संस्कार में भी वृक्ष सबसे बड़े सहायक होते हैं। जीवन-मरण के साथी ऐसे वृक्षों के प्रति हर हृदय में सम्मान होना चाहिए। 

शांतिकुंज प्रतिनिधि श्री सुधीर भारद्वाज की इन मार्मिक प्रेरणाओं से ओतप्रोत था २३ जुलाई को ग्राम गनोरा में आयोजित तरुपुत्र रोपण महायज्ञ। गायत्री परिवार खातेगाँव ने माँ भुवनेश्वरी पर्वत पर इसका आयोजन करते हुए १० एकड़ भूमि में १००८ पौधे रोपे। 

शांतिकुंज में युवा प्रकोष्ठ प्रभारी श्री के.पी. दुबे ने लोगों में वृक्षारोपण के प्रति आस्था जगाते हुए कहा कि जिस पृथ्वी को हम माँ कहते हैं, उसका हमें दोहन और शोषण नहीं, सम्मान और पोषण करना चाहिए। वृक्षारोपण केवल पर्यावरण शुद्धि के लिए जरूरी नहीं है, बल्कि सभ्यता, संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं को सुरक्षित रखने के लिए भी यह नितांत अनिवार्य है।



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