• शांतिकुंज की आपदा राहत सेवाएँ
  • उत्तराखंड में प्रकृति ने फिर ढहाया कहर
  • बादल फटने से बेघर हुए परिवारों को शांतिकुंज ने दिया सहारा


७ परिवारों को देंगे केदार कुटी
  • शांतिकुंज और नई टिहरी के कार्यकर्त्ता तात्कालिक सेवा-सहायता के बाद भी पीड़ितों के पुनर्वास के लिए हर संभव सहयोग कर रहे हैं। शांतिकुंज ७ परिवारों के लिए २२ x १० की केदार कुटी उन्हीं के खेतों में स्थापित करेगा। 

घनसाली, टिहरी गढ़वाल (उत्तराखंड)
३० जुलाई की रात घनसाली तहसील के नौताड़ गाँव में बादल फटा। प्रातःकाल सूचना मिलने के ६ घंटे के भीतर ही शांतिकुंज का आपदा प्रबंधन दल घटना स्थल की ओर रवाना हो चुका था। डॉ. वी.एन. जोशी के नेतृत्व में यह दल आपदा प्रभावित परिवारों के लिए राशन, बर्तन, तिरपाल आदि लेकर पहुँचा। 

डॉ. वी.एन. जोशी के अनुसार आरंभ में नौताड़ पहुँचने का मार्ग अवरुद्ध था। ऐसे में टिहरी में बेस कैम्प बनाया गया। जैसे ही मार्ग मिला शांतिकुंज की आपदा प्रबंधन वाहिनी पीड़ितों का दुःख-दर्द बाँटने पहुँच गयी। आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी, आदरणीया शैल जीजी एवं आदरणीय श्री गौरीशंकर शर्मा जी निरंतर दल के संपर्क में रहे। पीड़ितों की हर संभव सहायता करने के निर्देश वे देते रहे। नौताड़ गाँव के आपदाग्रस्त सभी १५ परिवारों को शांतिकुंज ने जीवनावश्यक सामग्री उपलब्ध करायीं। 



भुबनेश्वर (ओडिशा)
  • झुग्गी-झोंपड़ियों में आगजनी, पीड़ितों को ‘दिया’ ने दिया सहारा
जुलाई माह की अंतिम तारीखों में भुबनेश्वर की एक झोंपड़ी बस्ती में भीषण आग लग गयी। इसमें २०० परिवारों का आशियाना जलकर खाक हो गया। एक व्यक्ति को जान से भी हाथ धोना पड़ा। 

विपत्ति की इन घड़ियों में जब उजड़ी बस्ती के लोग समाज और सरकार से सहयोग की आस लगाये बैठे थे, तब गायत्री परिवार की ‘दिया’ इकाई ने सबसे पहले उनके बीच पहुँचकर उनके लिए भोजन और कपड़ों की व्यवस्था की। उन्हें देखकर स्थानीय मुस्लिम भाई भी सक्रिय हुए। सबने मिलकर पीड़ितों के लिए तिरपाल आदि की व्यवस्था करते हुए रहने का ठिकाना तैयार किया। गायत्री परिवार के सदस्यों ने पीड़ितों के पुनर्वास और सहयोग के लिए आगे भी सहयोग करते रहने का आश्वासन दिया। 

पुणे (महाराष्ट्र)
  • मालिन पहुँचा ‘दिया’ का दल
पुणे जिले में मालिन गाँव की तबाही राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय रही। गायत्री परिवार मुंबई, पुणे और नागपुर के दिया संगठन ने इस घटना के आपदा राहत कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई। तीनों शाखाओं ने जरूरतमंदों के लिए आवश्यक भोजन, कपड़े, बर्तन आदि एकत्रित किए। वे १ अगस्त को तेज बारिश की परवाह न करते हुए ट्रक में सारा सामान लेकर घटना स्थल पर पहुँचे और पीड़ितों के बीच उसे वितरित किया।


टिहरी गढ़वाल (उत्तराखंड)
  • टिहरी जिले में पीड़ितों के बीच पहुँचा गायत्री परिवार
१५ अगस्त की प्रातः टिहरी जिले में बादल फटने से कुछ गाँव प्रभावित हुए। इनमें ३० घरों के पूरी तरह ध्वस्त होने और ९० परिवारों के प्रभावित होने के समाचार मिले। गायत्री परिवार टिहरी के आपदा प्रबंधन दल ने त्वरित कार्यवाई करते हुए प्रभावितों में से एक बागी गाँव का जायजा लिया। 

प्रारंभिक सर्वेक्षण के अनुसार इस गाँव के १३ परिवार बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। गायत्री परिवार ने सामूहिक प्रार्थना सभा का आयोजन कर उन्हें ढाढ़स बँधाया, पीड़ा की घड़ी में गायत्री परिवार के साथ होने का विश्वास दिलाया। शांतिकुंज के निर्देशन एवं सहयोग से उनकी सेवा, सहयोग की व्यवस्था बनाई जा रही है। 



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