• सरकार, तीर्थ पुरोहित, संत-महंत और आस्थावानों को आकर्षित कर रही है पुष्कर अरण्य तीर्थ परिक्रमा
 यह है प्रयोजन
  •  पूरे तीर्थक्षेत्र को स्वस्थ, सुंंदर, प्रेरणादायी बनाना।
  •  लोगों के विचारों और मान्यताओं को युगानुरूप ढालकर अंधविश्वास और मूढ़ मान्यताओं को मिटाना।
  •  तीर्थक्षेत्र की गतिविधियों को परम पूज्य गुरुदेव के वैज्ञानिक अध्यात्मवाद की धारा में ढालना।
  •  गायत्री-सावित्री साधना का महत्त्व तीर्थयात्रियों को समझाना। 
  •  संत, महंत, पुरोहितों के बीच संगठन, सामंजस्य स्थापित करना।

 तीन स्तरीय यात्रा
  • २४    कोसीय पदयात्रा
  • ८४    कोसीय रथ यात्रा
अरण्य क्षेत्र के गाँवों की प्रव्रज्या
  • ४००    परिजनों की भागीदारी
  • २०    वाहन हुए शामिल


विश्व प्रसिद्ध तीर्थ पुष्करराज में तीर्थ चेतना जागरण के लिए गायत्री परिवार द्वारा पिछले एक वर्ष से किये जा रहे सतत प्रयासों के अंतर्गत २२ से २६ जुलाई २०१४ तक पुष्कर अरण्य तीर्थ परिक्रमा का आयोजन किया गया। पूरा कार्यक्रम शांतिकुंज में पश्चिम जोन प्रभारी श्री कैलाश महाजन की प्रमुख उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। २१ जुलाई को ब्रह्म सरोवर पर शक्तिकलश पूजन, अभिषेक से इसका शुभारंभ हुआ। पुष्कर के प्रमुख मंदिरों तीर्थों, तपःस्थलियों का जल पूजन के साथ शक्तिकलश में स्थापित किया गया। 

अगले दिन प्रथम पूजन ब्रह्माचार्य-सावित्री पीठाधीश्वर आसोत्रा, तपस्वी पूज्य तुलछाराम महाराज ने किया। उन्होंने ब्रह्माजी के रथ की परिक्रमा कर दण्डवत प्रणाम किया, आरती की-पुष्पांजलि दी। 

तीर्थयात्रियों की समूह साधना के बाद तीर्थ के प्रमुख संत श्री युवराज स्वामी, महंत रामस्वरूप शरणदास जी, श्री प्रेमदास जी, पाठक जी महंत, श्री औंकार सिंह लखावत-अध्यक्ष धरोहर संरक्षण, पं. कैलाशनाथ दाधीच ज्योतिषाचार्य, श्री जनार्दन प्रसाद शर्मा-नगरपालिका के पूर्व चेअरमैन और शांतिकुंज प्रतिनिधि श्री कैलाश महाजन ने तमाम तीर्थ पुरोहित, जनप्रतिनिधि और श्रद्धालुओं की उपस्थिति में प्रथम कलश पूजन कर, रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। 

काफिला जहाँ भी पहुँचा वहाँ गाँववासियों ने ढोल-नगाड़े बजाकर स्वागत किया। अपने घर, मंदिर, विद्यालय तक रथ को ले जाने के लिए लोग आग्रह करते रहे। हर कोई पूजन-पुष्पांजलि के लिए आतुर था। थाँवला, कड़ेल, माकड़वाली और अजगंध धाम में रात्रि विश्राम हुआ। वहाँ कथा, प्रवचन, दीपयज्ञ, यज्ञ, समूह साधना, सूर्यार्घ्यदान जैसे कार्यक्रम आयोजित किये गये। 

तीर्थयात्रा का समापन पुष्कर के ब्रह्म सरोवर पर हुआ। व्यवस्थाओं में सैकड़ों कार्यकर्त्ताओं की नैष्ठिक भागीदारी के बीच थाँवला और कड़ैल के गाँववासी, टी.आर. शर्मा परिवार रेण, प्रज्ञापीठ अजमेर, शक्तिपीठ बाड़मेर ने उल्लेखनीय सेवाएँ प्रदान कीं। 



 प्रमुख उपलब्धियाँ
  •  ९५ गाँवों में सफाई, ग्राम गोष्ठियाँ, दीपयज्ञ, अभिषेक तीर्थ पूजन के कार्यक्रम हुए। 
  •  ३२ विद्यालयों में गोष्ठियाँ हुईं
  •  ६७ गाँवों में १००० से अधिक वृक्ष लगाये गये
  •  २१ गाँवों में पाँच कुण्डीय गायत्री यज्ञ कराने और  ११ गाँवों में ब्रह्मवाटिकाएँ लगाने के संकल्प लिये गये।
  •  गणमान्यों ने नगर प्रवेश से गायत्री शक्तिपीठ तक मार्ग के मध्य वृक्षारोपण कर ३९० वृक्ष लगाये।   
  •  पूरी यात्रा में प्रचुर मात्रा में युगसाहित्य बाँटा गया। 
  •  श्री औंकार सिंह लखावत-अध्यक्ष धरोहर संरक्षण प्रोन्नति पुरातत्व विभाग राजस्थान सरकार ने गायत्री परिवार के इस अभियान की खूब प्रशंसा की। उन्होंने गायत्री परिवार के प्रतिवेदन का संज्ञान लेते हुए कहा कि ८४ कोसीय रथयात्रा मार्ग में जितने तीर्थ, तपःस्थलियाँ हैं उनमें आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराने, मरम्मत कराने और सुरम्य बनाने का कार्य सरकार एक वर्ष में पूरा करायेगी। 
  •  संतों, मूर्ध्यन्यों ने तीर्थचेतना जागरण के लिए हर वर्ष इस यात्रा के आयोजन का आग्रह किया।



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