• एन.टी.पी.सी. चरखी दादरी के अधिकारियों की कार्यशाला

एनटीपीसी चरखी दादरी के अधिकारियों के बीच ‘प्रबंधन कला और अध्यात्म’ विषय पर कार्यशाला सम्पन्न हुई। शांतिकुंज के वरिष्ठ प्रतिनिधि डॉ. बृजमोहन गौड़ और श्री कालीचरण शर्मा ने इस संदर्भ में पूज्य गुरुदेव के विचार प्रस्तुत किये। 

डॉ. बृजमोहन गौड़ ने आज की भोगवादी संस्कृति की समीक्षा करते हुए कहा कि आज लोगों के पास पैसा है पर सुख, शांति और चैन नहीं हैं। बढ़ता तनाव इस संस्कृति की देन है जिसके कारण आज का आदमी आत्महत्या पर उतारू दिखाई देता है। मनुष्य को यदि सुख और चैन चाहिए तो उसे अध्यात्म मार्ग की ओर ही अग्रसर होना होगा। सादगी, सेवा, परोपकार, प्रेम, आत्मीयता को अपने जीवन का संस्कार बनाना होगा। 

श्री कालीचरण शर्मा जी ने वैज्ञानिक अध्यात्मवाद को ही आज का युगधर्म बताया। उन्होंने कहा कि इसी में आज की समस्त समस्याओं का समाधान निहित है। हमें धन, साधन नहीं अपनी क्षमताओं के विकास पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। 
कार्यशाला का संचालन श्री प्रताप सिंह ने किया। आत्मीयतापूर्ण वातावरण में हुई प्रश्नोत्तरी ने लोगों की अध्यात्म संबंधी जिज्ञासाओं का समाधान दिया। प्रज्ञा मंडल, महिला मंडलों का गठन कर घर-घर संस्कार परंपरा को पुनर्जीवित करने और मिशन की पत्रिकाओं को पहुँचाने के संकल्प लिये गये। 

कार्यक्रम में सर्वश्री एलपी पाण्डे, रामनाथ सिंह, डीएस सैनी, एसएन यादव, श्याम दरश, जीपी यादव, हरकिशन जी आदि वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। शांतिकुंज की प्रभावशाली प्रस्तुति में श्री योगेश शर्मा और श्री हेमलाल तत्त्वदर्शी का भी योगदान रहा। 



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