गायत्री चेतना केन्द्र, लॉस एंजिल्स का पाँचवाँ वार्षिकोत्सव २५ से २७ जुलाई २०१४ की तारीखों में आयोजित हुआ। इसका संचालन देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी सहित शांतिकुंज की टोली ने किया। टोली की प्रभावशाली एवं सरस प्रस्तुतियों ने इसे भरपूर लोकप्रियता प्रदान की। १०८ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ, विशिष्ट महानुभावों के व्याख्यान, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से उपस्थित हजारों लोगों को जीवन में अध्यात्म के अवलम्बन और नैतिक मूल्ययुक्त शिक्षा को अपनाने की हृदयग्राही प्रेरणाएँ दी गयीं। 

तीन दिवसीय समारोह युवाओं को भोगवादी संस्कृति से परहेज कर जीवन के समग्र-संतुलित विकास के प्रति जागरूक करने और महानता का वरण करने की प्रेरणा देने वाला था। समापन दिवस पर पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भावी पीढ़ी में जागरूकता बढ़ रही है। वह अंधविश्वासी नहीं है। अगर उसे वास्तविकता और उपयोगिता का सही बोध हो जाये तो वह अध्यात्म को अपनाने और सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों में भरपूर योगदान देने के लिए उत्साहित दिखाई देती है। 

समारोह का शुभारंभ ब्रूकहर्ट कम्यूनिटी सेंटर, एनाहेम में ४०० लोगों की उपस्थिति में आयोजित प्रबुद्ध वर्ग संगोष्ठी से हुआ। डॉ. चिन्मय ने इस अवसर पर ‘ह्यूमन एक्सीलेंस’ विषय से युवाओं को दिशा दी। उन्होंने कहा कि गायत्री उपासना मानवीय उत्कर्ष के लिए अत्यावश्यक है। इससे मनुष्य का विवेक जाग्रत होता है। मानवीय बुद्धि धन-साधन के उपार्जन के उपाय बताती है, लेकिन उसे भ्रमित भी करती देखी गयी है। मनुष्य का विवेक ही है जो उपलब्ध बल, बुद्धि, साधनों का सदुपयोग करना सिखाता है। इनका जो जितने अंशों में उपयोग कर पाता है, वह उतना ही महान है। 

चिन्मय मिशन के स्वामी ईश्वरानंद जी ने युवाओं में अकेले बहुत कुछ करने का विश्वास जगाया। योगिनी काली ने योग से स्वास्थ्य और मानवीय क्षमताओं में प्रगति की चर्चा की। एनाहेम के मेयर मिस्टर टॉम टैट, सिटी ऑफ अर्टेशिया के मेयर, डॉ. आनंद प्रकाश, डॉ. मिथिलेश प्रकाश, डॉ. राकेश गुप्ता, डॉ. नीलम गुप्ता, अवधेश अग्रवाल आदि अनेक गणमान्यों की उपस्थिति ने सभा की गरिमा बढ़ायी। 

२६ जुलाई को गायत्री चेतना केन्द्र में स्थानीय हिंदू मंदिर संगठन (विहिप) द्वारा आयोजित कार्यक्रम में ‘युवाओं को जगाने की आवश्यकता’ विषय पर डॉ. चिन्मय जी का उद्बोधन हुआ। इससे पूर्व वे चेतना केन्द्र पर गये, जहाँ उन्होंने कार्यकर्त्ताओं की गोष्ठी में भावी सक्रियता की दिशा दी। बाल संस्कार शाला के बच्चों से चर्चा हुई। 

गायत्री चेतना केन्द्र पर सायंकालीन सभा में उन्होंने भारत की सनातन संस्कृति और पश्चिमी देशों की भोगवादी संस्कृति की अच्छाइयों के समन्वय से विकास की दिशाओं पर चर्चा की। इससे पूर्व नृत्य, गीत, गरबा, योग आदि के रंगारंग कार्यक्रमों ने दर्शकों को खूब उत्साहित किया। 

अंतिम दिन आयोजित १०८ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ जनमानस पर बरसती गायत्री की अनुकंपा और महाकाल की प्रेरणाओं की अनुभूतियाँ कराने वाला था। श्री राजकुमार वैष्णव, श्री शांतिलाल भाई, निकी भट्ट, सिद्धार्थ ओझा एवं प्रज्ञा शर्मा की टोली के भक्तिरस से सराबोर और संकल्पों को बल प्रदान करने वाले मनमोहक संगीत एवं प्रभावशाली कर्मकाण्ड से सभी भावविभोर हो गये। युग देवता के चरणों में सर्वस्व अर्पण की उमंग जागी, भावी सक्रियता के संकल्प लिये। कार्यक्रम का समापन पत्रकार वार्ता के साथ हुआ। 



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