• शांतिकुंज, देव संस्कृति विश्वविद्यालय और गायत्री विद्यापीठ में आयोजित हुए रंगारंग कार्यक्रम

स्वावलम्बन भवन का उद्घाटन हुआ
  • स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर देव संस्कृति विश्वविद्यालय परिसर में स्वावलम्बन भवन का उद्घाटन कुलाधिपति जी द्वारा किया गया। इस अवसर पर उन्होंने प्रशासनिक भवन और स्टाफ के लिए आवासीय भवन के निर्माण के लिए भूमिपूजन भी किया। 
देश को दिशा देने का सही अवसर है यह - कुलाधिपति जी 

  • देव संस्कृति विश्वविद्यालय के मृत्युंजय सभागार के समक्ष ध्वजारोहरण हुआ। कुलाधिपति आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने कुलपति, प्रतिकुलपति, कुलसचिव सहित समस्त आचार्य एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति में राष्ट्रध्वज फहराया। 
  • कुलाधिपति जी ने विद्यार्थियों को देश के नवनिर्माण के लिए सोचने और उस दिशा में सार्थक कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। प्रधानमंत्री जी के भाषण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पहली बार लाल किले की प्राचीर से युगऋषि का संदेश दिया जा रहा है। देश को नयी दिशाएँ देने का समय आ गया है। हमें अपने राष्ट्र को  ऋषि चिंतन के अनुरूप गढ़ने में अग्रणी भूमिका निभानी होगी। 
  • कुलाधिपति जी ने विद्यार्थियों को स्वावलम्बी बनने, गाँवों को स्वच्छ, स्वस्थ, सुरक्षित, स्वावलम्बी बनाने की दिशा में पहल करने संबंधी मार्गदर्शन दिया। 

चरित्र निर्माण हो हमारा लक्ष्य
  • गायत्री विद्यापीठ में शांतिकुंज के व्यवस्थापक आदरणीय श्री गौरीशंकर शर्मा जी ने ध्वजारोहण किया। विद्यार्थियों द्वारा देशप्रेम की भावना से ओतप्रोत सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये गये। उन्होंने योग प्रदर्शन जैसे कार्यक्रमों से अपने कौशल का भी परिचय दिया।  
  • आदरणीय श्री गौरीशंकर शर्मा जी ने शिक्षक एवं बच्चों को चरित्र निर्माण पर विशेष ध्यान देने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि चरित्र ही व्यक्ति की सही पहचान है। चरित्र है तो धन, बल सब लाभदायी है। चरित्रहीन के लिए ये सब पतन का कारण बनते देखे गये हैं। 
  • सभा को प्रधानाचार्य महोदय ने भी संबोधित किया।

देश के नवनिर्माण के इस मंगल प्रभात में शांतिकुंज परिवार ने अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से देशप्रेम की अपनी भावनाएँ अभिव्यक्त करते हुए माँ भारती की भावभरी वंदना की। प्रथम रंगारंग समारोह शांतिकुंज प्रांगण में आयोजित हुआ। रिमझिम वर्षा की शीतल फुहारों के बीच आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने ध्वजारोहण और ध्वजवंदन किया। शांतिकुंज के गायत्री विद्यापीठ के विद्यार्थियों की विभिन्न टुकड़ियों, स्काउट-गाइड दस्तों, भाइयों-बहिनों के अलग-अलग समूहों ने परेड़ में शामिल होकर राष्ट्रध्वज को सलामी दी। इसके बाद आरंभ हुआ रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों मनमोहक क्रम। डेढ़ घंटे में प्रस्तुत दस कार्यक्रम ने समारोह स्थल पर उपस्थित हजारों दर्शकों में राष्ट्र के लिए आत्मोत्सर्ग करने में कभी पीछे न रहने की भावनाएँ जगा दीं। 

गायत्री विद्यापीठ की बालिकाओं द्वारा माँ सरस्वती और माँ दुर्गा और माँ लक्ष्मी की वंदना के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शुभारंभ हुआ। देव संस्कृति विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने अपने लघु नाटक में विदेशी धन के प्रलोभन के दुष्प्रभावों को दर्शाते हुए देश की सेवा में गौरवबोध कराया। शांतिकुंज की बहिनों ने योग प्रदर्शन और लाठी संचालन के माध्यम से आत्मरक्षा एवं आत्मविकास के लिए जाग्रत्, उल्लसित नारी का जो स्वरूप प्रस्तुत किया वह अद्भुत था। गायत्री विद्यापीठ की आहुति पण्ड्या की टोली द्वारा गाया समूह गीत ‘हम जियेंगे-मरेंगे वतन के लिए ...’ हो या झाँसी की रानी बनकर प्रस्तुत समूह नृत्य; सभी कार्यक्रम गुरुदेव-माताजी के प्यार, प्रेरणा और संस्कारों के बीच बाल मन में पल रहे देशप्रेम की हृदयस्पर्शी झाँकी प्रस्तुत कर रहे थे। एक मासीय युगशिल्पी बहिनों और भाइयों ने अलग-अलग समूहों में अपने जोश और उत्साह से लबरेज अभिनय गीतों से श्रोताओं के अंतस् को प्रमुदित कर दिया। समापन पुष्प के रूप में शांतिकुंज के संगीत विभाग ने वॉयलिन धुन प्रधान गीत ‘ऐ मेरे वतन के लोगो ...’ प्रस्तुत करते हुए राष्ट्रदेवता को भावभरी श्रद्धांजलि अर्पित की। 

पूरे कार्यक्रम में मुख्य अतिथि आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी, शांतिकुंज के गणमान्य कार्यकर्त्ताओं सहित देश-विदेश से आये हजारों परिजनों की करतल ध्वनियाँ प्रस्तोताओं का उत्साहवर्धन करती रहीं। 



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