आस्था और विश्वास के प्रतीक नन्दा नौटी से विदा होकर कासम्बा गाँव पहुँची। सैकड़ों मील पैदल चलकर माँ को विदाई देने आए हजारों आस्थावानों को साक्षात माँ अन्नपूर्णा के दर्शन हुए जब गायत्री परिवार द्वारा उन्हें भोजन की व्यवस्था दी गयी। अखिलविश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज से आये स्वयंसेवकों ने आने वाले आस्थावानों के लिए 14 घण्टे तक भोजनालय चलाकर भोजन की व्यवस्था बनाई। नौटी से प्रारम्भ हुई नन्दादेवी राज यात्रा जब चैसिंग्या खाडू और राज छंतोली की पूजन प्रक्रिया के बाद वापस नौटी पहुँची, तब शांतिकुंज द्वारा भोजन की व्यवस्था बनायी गई। 

विश्व की सबसे लम्बी पैदल यात्रा नन्दादेवी राज यात्रा प्रति 12 वर्षों में की जाने वाली यात्रा है। स्थानीय प्रशासन के आवेदन पर शांतिकुंज हरिद्वार ने 35 पाकशास्त्री के साथ लगभग 120 स्वयंसेवकों की टीम द्वारा पूरी यात्रा में जगह जगह भोजन व चिकित्सा की व्यवस्था की जा रही है। संपर्क पड़ाव जस्यारा में 3000, कीमोली में 2000, डिम्मर में 2500, उमटा में 2000 व लगासू में 2000 लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था बनायी गई है। शांतिकुंज व्यवस्थापक गौरीशंकर शर्मा ने बताया कि यात्रा की वापसी में दुर्गम क्षेत्र चन्दनीया घाट में भी भोजनालय की व्यवस्था बनायी गई है। यात्रा में साथ चल रहे गायत्री परिवार का चिकित्सक दल अपने साथ प्राथमिक चिकित्सा के तमाम दवाइयाँ लेकर गया है। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष केदार घाटी में आई आपदा के दौरान गायत्री परिवार द्वारा चलाये गए भोजनालय की चर्चाएँ प्रशासनिक अधिकारी व पुलिसकर्मियों द्वारा यहाँ भी चर्चा में हैं। नन्दाराज यात्रा पर अपने विचार व्यक्त करते हुए देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने नन्दा राज यात्रा को आस्था और विश्वास का अटूट सागर बताया। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक आयोजनों में गायत्री परिवार हमेशा अग्रणी भूमिका निभाने में तत्पर रहता है। इस प्रकार के आयोजन से भारतीय संस्कृति और संस्कारों को सँजोया जा सकता है। 



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