• मोर्चाखेड़ी 1508 / सुरगाँव बंजारी 1100 / खालवा 500 / सावलीखेड़ा 500 / कोठा 100

राजगढ़ (मध्य प्रदेश)

वरिष्ठ नागरिकों ने किया श्रमदान
राजगढ़ के लोगों में वृक्षारोपण के प्रति भरपूर उत्साह है। इसकी बानगी वहाँ के वरिष्ठ नागरिकों द्वारा किये गये श्रमदान में देखी जा सकती है। यहाँ वृक्षारोपण के लिए मजदूर या मशीनों ने नहीं, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों ने स्वयं गड्ढे खोदे थे। इस क्षेत्र में अबतक चार स्मृति उपवनों का निर्माण हो चुका है। 

राजगढ़ जिले के मोर्चाखेड़ी ग्राम में विशाल तरुपुत्र रोपण महायज्ञ सम्पन्न हुआ। हजारों लोगों ने बड़े उत्साह के साथ वृक्षारोपण करते हुए कुल १५०८ वृक्ष रोपे। शांतिकुंज के वरिष्ठ प्रतिनिधि डॉ. बृजमोहन गौड़, उद्यान विभाग प्रभारी श्री सुधीर भारद्वाज एवं श्री मनीष चौरिया की विशिष्ट उपस्थिति ने पर्यावरण संरक्षण के इस पावन अभियान के प्रति लोगों में नव उल्लास का संचार किया। 

डॉ. ओ पी सोनी (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ स्वयंसेवक) तथा गायत्री परिवार के श्री मणिशंकर चौधरी, श्री रामस्वरूप मीणा (गायत्री परिवार) आदि गणमान्यों की उपस्थिति ने समारोह की गरिमा बढ़ायी।  प्रांतीय प्रतिनिधि श्री आनंद विजय और वृक्षारोपण अभियान के प्रांतीय प्रभारी श्री मनोज तिवारी ने पूरे प्रदेश में वृक्षारोपण के लिए निरंतर बढ़ रहे उत्साह और अब तक हुए कार्यों की जानकारी देकर लोगों को अपने प्रदेश की सक्रियता का गौरवबोध कराया।

खण्डवा (मध्य प्रदेश)
निमाड़ क्षेत्र में हो रहे वृक्षारोपण के ऐतिहासिक और अनुकरणीय कार्यों की शृंखला में खण्डवा जिले में भी व्यापक वृक्षारोपण हुआ। सभी स्थानों पर तरुपुत्र रोपण महायज्ञ आयोजित करते हुए पूरे विधि-विधान से वृक्षारोपण किया गया। 

खंडवा जिले के चार गाँवों में वृक्षारोपण हुआ। सुरगाँव बंजारी में सर्वाधिक ११००, खालवा में ५०० और कोठा में १०० वृक्ष रोपे गये। सावलीखेड़ा में ४०० विद्यार्थियों ने ५०० वृक्ष लगाये। समग्र अभियान में श्री संजय तिवारी और श्री बृजेश पटेल का विशिष्ट सहयोग रहा। 

तरु-मिलन समारोह
शांतिकुंज की टोली ग्राम हरसूद, डाभी और सिरसौद पहुँची। इन गाँवों की पहाड़ियों पर गत वर्षों में तरुपुत्र महायज्ञ हो चुके हैं। गाँववासी बड़ी श्रद्धा के साथ अपने लगाये पौधों का पालन, संरक्षण कर रहे हैं। अपने रोपे गये पौधों के प्रति आत्मीयता और जागरूकता बढ़ाने के लिए वहाँ तरु मिलन समारोह आयोजित किये गये थे। 

एक नया प्रयोग ः लगभग २०० घरों वाले हरसूद गाँव में पिछले वर्ष ४ एकड़ भूमि पर बने स्मृति उपवन में ५०० पौधे रोपे गये थे। वहाँ तार फेंसिंग तो हुई ही, उसे और मजबूत करने के लिए हर घर ने एक साड़ी दी। पूरे उपवन में इन साड़ियों से भी फेंसिंग की गयी है।

डॉ. बृजमोहन गौड़ जी ने गाँववासियों को विश्वास दिलाया कि जिन वृक्षों की आप सेवा कर रहे हैं, आने वाले कुछ ही दिनों में वे आपकी समृद्धि और खुशहाली का कारण बनेंगे। उन्होंने वृक्षारोपण के साथ व्यसन-कुरीतियों से बचने के लिए भी गाँववासियों को प्रेरित किया। 




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