सिंधी में प्रज्ञागीत, असमिया व ब्रेललिपि की किताबों का विमोचन

हरिद्वार 15 अप्रैल।

शांतिकुंज में नवरात्र साधना के लिए देश-विदेश से आये साधकों को सम्बोधित करते हुए अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि नवसंवत्सर से प्रारंभ होने वाला नवदुर्गा पर्व अर्थात् नवरात्र- दुर्गम कठिनाइयों को पार दिलाने वाला महापर्व है। इन नौ दिनों में दैवी शक्ति की अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है, इससे साधक में शारीरिक, मानसिक व आत्मिक बल की वृद्धि होती है। उन्होंने कहा कि इन दिनों शक्ति की विशेष उपासना, साधना का विधान है और जो व्यक्ति तन्मयता के साथ गायत्री उपासना-साधना करता है, वह ब्राह्मणत्व की दिशा में अग्रसर होता जाता है। मनोयोगपूर्वक की गई यही साधना शरीर के लिए ही नहीं, वरन् आत्मा के परिशोधन का काम करती है। 

गायत्री परिवार द्वारा घोषित ज्ञानक्रांति वर्ष-2013 के प्रथम नवरात्रि को सम्बोधित करते हुए प्रखर अध्यात्मवेत्ता डॉ. पण्ड्या ने कहा कि श्रद्धा साधना का प्राण है, इसलिए हृदय की गहराई से मंत्र का जप करना चाहिए। अनुष्ठान में श्रद्धा भावना का समुचित समावेश होने पर उसके परिणाम एवं लाभ आश्चर्यजनक एवं चमत्कारिक होते हैं। नवरात्र साधना के अंतर्गत मन को उच्चतर दिशा की ओर प्रवाहमान बनाए रखने के लिए जप के साथ ध्यान की प्रक्रिया को सशक्त बनाये रखने की आवश्यकता है।  डॉ पण्ड्या ने कहा कि साधकों को इन दिनों सत्साहित्य का भी नियमित अध्ययन करते रहना चाहिए, ताकि विचार ऊर्ध्वगामी बने रहें। उन्होंने कहा कि समर्थ गुरु के साथ पूर्ण समर्पण के बाद शिष्य की प्रगति, उसके जीवन में सद्गुणों का विकास, परमात्मा से संबंध-स्थापना, चित्त की शुद्धि, प्रारब्ध को काटना आदि कार्य वे स्वयं करते हैं। डॉ. पण्ड्या ने परिवर्तन के इस महान् क्षण में साधकों से अपनी पात्रता विकसित करने एवं अपनी शक्ति, ज्ञान का एक अंश समाज व राष्ट्र के उत्थान में अर्पित करने का आवाहन किया। 

इस अवसर पर सिंधी भाषा में प्रज्ञागीत की सीडी, असमिया की चार तथा ब्रेल लिपि की दो किताबों का विमोचन किया गया है। भाषान्तर प्रकोष्ठ के प्रभारी गंगाधर चौधरी के अनुसार ब्रेललिपि की किताबों का प्रकाशन मुम्बई के एसआर महाले द्वारा करवाया गया है। जो देश भर के करीब 250 अंधविद्यालयों में नि:शुल्क साहित्य उपलब्ध कराते हैं।http://news.awgp.org/var/news/165/PPD_5705N.jpg">


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