• गायत्री परिवार के व्यवस्थित सेवाकार्यों की लोगों ने खूब सराहना की। परिस्थितियों और ज़रूरतमंदों की पहचान कर समय पर सहायता पहुँचाना उनके कार्यों की विशेषता थी। 

अनुभव काम आया

श्री प्रेमसागर वर्मा इस क्षेत्र में आपदा प्रबंधन के लिए बहुत ही शानदार काम कर रहे हैं। जिले में कहीं भी आगजनी हो या कोई अन्य आपदा, वे हर स्थान पर पहुँचते हैं और यथा संभव पीड़ितों की सहायता करते हैं।  अब तक लगभग ६५० आपदाग्रस्त परिवारों को १५०००० रुपये की सहायता सामग्री प्रदान कर चुके हैं। 

बहराइच-श्रावस्ती की यह बाढ़ अप्रत्याशित थी। सरकार हो या स्वयंसेवी संस्थान, ऐसी स्थिति से निपटने के लिए कोई भी तैयार नहीं था। लेकिन गायत्री परिवार ने तत्काल भोजन पैकेट बनाना आरंभ कर दिया और उन्हें लेकर मोटरबोट के सहारे ऐसे सुदूर गाँवों में जाकर पीड़ितों की सेवा की जिसकी कोई अन्य कल्पना नहीं कर सकता था। 

गायत्री परिवार की रिपोर्टों ने ही त्रासदी की वास्तविकता का प्रथम परिचय कराया। 

घाघरा, सरयू और राप्ती नदियों के उफान का कहर झेल रहे बहराइच और श्रावस्ती जिलों के कई गाँवों में गायत्री परिवार ने राहत अभियान चलाया। १५ अगस्त को इस क्षेत्र को बाढ़ ने अपनी चपेट में लिया और अगले ही दिन से गायत्री परिवार के परिजन मोटर बोटों के सहारे ऐसे सुदूरवर्ती गाँवों तक पहुँच गये जहाँ प्रशासन की नजर भी नहीं पड़ी थी। १६ और १७ अगस्त को बहराइच के परिजनों ने ३५०० भोजन पैकेट तैयार कर इन बोटों के सहारे बाढ़ग्रस्तों तक पहुँचाये। यह सेवाएँ लगातार ८-१० दिन तक चलती रहीं, जब तक कि पानी उतर नहीं गया। 

बहराइच जिले के नानपारा, कैसरगंज, महसी, शिवपुर, बलहा, मिहिपुरवा क्षेत्र और श्रावस्ती के भिनगा, डकौना और जमुनाहा क्षेत्र सर्वाधिक प्रभावित थे। दोनों जिलों के गायत्री परिवार के परिजनों ने जहाँ तक संभव हुआ, हर क्षेत्र में पीड़ितों की सेवा-सहायता के भरपूर प्रयास किये। पीड़ितों को भोजन, कपड़े और दवाइयाँ उपलब्ध कराने के लिए उन्होंने जन-जन से सहयोग एकत्रित किया और प्रभावितों तक उसे पहुँचाया। 

सारे राहत कार्य शांतिकुंज के निर्देशन में चलते रहे। जोन प्रभारी श्री वीरेन्द्र तिवारी और शांतिकुंज में आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ प्रभारी श्री राकेश जायसवाल ने शांतिकुंज से पीड़ितों की सहायतार्थ एक ट्रक राहत सामग्री भेजी, जिसे बाढ़ का पानी उतरने पर पीड़ितों के बीच वितरित कर दिया गया। 
बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी कायमपुर गाँववासियों पर प्रकृति का कहर थमा नहीं। घघरा के कटान के मुहाने पर खड़े इस गाँव के लोग अपना आशियाना छोड़ वहाँ से पलायन करने को मजबूर थे। शांतिकुंज ने इस गाँव का सर्वे कराया और जरूरतमंद ३७ परिवारों को राशन, कपड़े, कंबल, त्रिपाल आदि समस्त सामग्री प्रदान कर उनके पुनर्वास में बड़ी मदद की। १ सितम्बर को स्थानीय कार्यकर्त्ता श्री प्रेमसागर वर्मा की अगुवाई में एक टोली पुनः उनके बीच पहुँची और आवश्यकता के अनुरूप १९ परिवारों को त्रिपाल, १५ किलो गेंहू, कपड़े और नगद राशि का सेट प्रदान किया। 

समस्त राहत कार्य श्री प्रेम सागर वर्मा और उनके सहयोगी श्री कामेश्वर मिश्रा, श्री राजप्रसाद सोनी के नेतृत्व में सम्पन्न हुए। क्षेत्र की प्रमुख शाखाएँ-गायत्री शक्तिपीठ बहराइच (श्री रामकुमार श्रीवास्तव), प्रज्ञा जागरण संस्थान नानपारा (श्री जयप्रकाश वर्मा), माता भगवती कुंज गायत्री आश्रम कैसरगंज (श्री लाडली प्रसाद वर्मा), श्रीरामपुर शक्तिपीठ जरवल रोड़ बहराइच (मानसिंह वर्मा) की अगुवाई में समस्त राहत अभियान चलाया गया। 



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