• निमाड़, मध्य प्रदेश में बही है ईको फ्रैण्डली गणेशोत्सवों की बयार
  • मनचंगा तो कठौती में गंगा
घर-आँगन में ही किया विसर्जन 
मुलताई, बैतूल (म.प्र.)
ताप्ती जल को प्रदूषण से बचाने के लिए गायत्री परिवार की मुलताई शाखा ने अपने घर के ही किसी बड़े बरतन में जल भरकर उसमें पूरे विधि-विधान के साथ गणेश की मिट्टी की प्रतिमाओं का विसर्जन करने और उनके घुल जाने मिट्टी को पौधों की क्यारियों में डालने की प्रेरणा दी। ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ की कहावत याद दिलाते हुए डॉ. रामदास गढ़ेकर, श्री टी.के. चौधरी, गणेश प्रजापति आदि ने लोगों से कहा कि ताप्ती जल को दूषित कर दूसरों को कष्ट देने की अपेक्षा शुद्ध अंतःकरण से सुरक्षित उपाय के साथ गणेश भगवान को विदाई दी जाये, इसी में हमारी समझदारी है। गायत्री परिवार के सदस्यों के अलावा कई लोगों ने इस पहल का स्वागत करते हुए नयी परंपरा को प्रोत्साहित किया। इसके लिए गायत्री परिवार ने सुनियोजित अभियान चलाया था। 

सिंहस्थ की तैयारियाँ आरंभ 
  • ११ लाख लोगों तक पहुँचायेंगे युग संदेश
  • एक माह तक चलेंगे कथा, यज्ञ, प्रदर्शनी आदि 
उज्जैन (मध्य प्रदेश)
गायत्री शक्तिपीठ उज्जैन द्वारा आगामी सिंहस्थ में विचार क्रांति की तैयारियाँ आरंभ कर दी गयी हैं। ७ सितम्बर को शक्तिपीठ पर जिले के वरिष्ठ कार्यकर्त्ताओं की एक गोष्ठी आयोजित हुई, जिसमें ११ लाख लोगों तक युगऋषि का संदेश पहुँचाते हुए वैज्ञानिक अध्यात्मवाद के विस्तार के संकल्प लिये गये। 

इस संगोष्ठी में कुंभ मेले के समय आयोजित किये जाने वाले कार्यक्रमों के विषय में प्रारंभिक चर्चा हुई। इसके अंतर्गत वहाँ एक माह तक १०८ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ, प्रज्ञापुराण कथा, प्रभावशाली प्रदर्शनी, विशाल साहित्य विक्रय केन्द्र, उच्च स्तरीय साधना शिविर, औषधालय जैसी व्यवस्थाएँ किये जाने का निर्णय लिया गया। 


चित्रकला प्रतियोगिता से बच्चों में लायी जागरूकता
बड़वानी (मध्य प्रदेश)
नदियों में प्रदूषणकारी प्लास्टर ऑफ पेरिस और जहरीले रंगों से युक्त प्रतिमाओं के विसर्जन से होने वाले नुकसानों के प्रति बच्चों को जागरूक बनाने की दृष्टि से गायत्री शक्तिपीठ बड़वानी पर विद्यार्थियों की भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। ‘मिट्टी के गणेश का हो विसर्जन, बचेगी नर्मदा, न होगा प्रदूषण’ विषय पर आयोजित यह प्रतियोगिता जिले की भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा इकाई द्वारा आयोजित की गयी थी। 

जिला संयोजक श्री महेन्द्र भावसार ने छात्रों की जागरूकता का अभिनंदन करते हुए गणेशोत्सव, नवरात्रि या किसी अन्य त्यौहारों पर मिट्टी की बनी हानिरहित रंगों से रंगी प्रतिमाएँ ही प्रयोग में लाने के संकल्प दिलाये। नदी-जलाशयों के अन्य उपायों की भी जानकारी दी गयी।

मुख्य अतिथि श्री नरेन्द्र सिंह ठाकुर-केन्द्रीय जेल अधीक्षक और विशेष अतिथि उमा मिश्रा-जिला सहायक शिक्षा अधिकारी ने गायत्री परिवार के जनजागरण कार्यों की सराहना की। 

प्रतियोगिता में १७ विद्यालयों के ५७ विद्यार्थियों ने भाग लिया। उत्कृष्ट विद्यालय की सुलोचना सक्सेना ने प्रथम, राधेकृष्ण राठौर ने द्वितीय और योगेश बड़ोले एवं अपराजिता सोठ ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। उन्हें निर्धारित नकद राशि, वैजयंती एवं सत्साहित्य प्रदान कर सम्मानित किया गया। 


मिट्टी के गणेश बनाये, लोगों को उपलब्ध कराये
जोबट, अलीराजपुर (म.प्र.)
जोबट शाखा ने लोगों को नदी-जलाशयों को प्रदूषण से बचाने के लिए केवल प्रेरणाएँ ही नहीं दीं, बल्कि इसके लिए उपयुक्त विकल्प भी दिये। शक्तिपीठ पर ही गणेश जी की मिट्टी की मूर्तियाँ तैयार करायी गयीं और पूरे नगर में इनकी विशेषताओं के प्रति आस्था जगाते हुए जलाशयों को प्रदूषण मुक्त रखने के उपाय बताये गये। समाचार प्रेषक डॉ. शिव नारायण सक्सेना के अनुसार लोगों को अपने ही घर किसी बड़े पात्र में जल भर कर उसमें गणेश जी को विसर्जित करने और गली हुई मिट्टी को गमलों में डालने की प्रेरणा दी गयी, ताकि अपने घर के गणेश जी अपने ही घर रहकर सुख, शांति, सद्बुद्धि प्रदान करते रहें। 

इन प्रयासों से २०० घरों में मिट्टी की मूर्तियाँ स्थापित की गयीं। गायत्री परिवार की प्रेरणा से सहयोग मित्र मंडल तथा सोनी मोहल्ले में १३ फीट ऊँची विशाल प्रतिमाएँ भी मिट्टी की ही बनायी गयी थीं। 

बुरहानपुर (मध्य प्रदेश) ः बुरहानपुर शाखा ने भी ईको फ्रैण्डली गणेशोत्सवों के आयोजन के लिए जनजागरण अभियान चलाया। बड़े बालाजी मंदिर से जनजागरण यात्रा निकाली। शहर के मुख्य गली, मोहल्ले, चौराहों पर २००० पैम्फलेट बाँटे। जन संघर्ष समिति, बालाजी उत्सव समिति और सोनार समाज ने भी इस अभियान में गायत्री परिवार का सहयोग किया। 


विचार क्रांति संगोष्ठी
हटा, दमोह (मध्य प्रदेश)
गायत्री शक्तिपीठ हटा पर कार्यकर्त्ता गोष्ठी आयोजित हुई। ‘युग निर्माण योजना’ पत्रिका के संपादक श्री ईश्वर शरण पाण्डेय ने इसे संबोधित करते हुए समाज में आयी प्रदूषित विचारों की बाढ़ को रोकने के लिए सद्विचारों की ऊँची दीवारें खड़ी करने का आह्वान किया। वे विद्यालयों में पुस्तक मेलों के माध्यम से नवोदित पीढ़ी में युगऋषि के चिंतन को प्रतिष्ठित करने का आह्वान कार्यकर्त्ताओं से कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मानवीय मस्तिष्क में भरते जा रहे दूषित कचरे को केवल सद्विचारों के सहारे ही दूर किया जा सकता है। श्री सुरेन्द्र कुमार देशमुख ने पूज्य गुरुदेव के जीवन के संस्मरण सुनाये। 



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