ललमटिया, भागलपुर (बिहार)
देवघर उपजोन में युगशक्ति गायत्री के व्यापक विस्तार के लिए गाँव-गाँव यज्ञों की शृंखला आयोजित की जा रही है। १ से ११ अगस्त तक चली प्रथम शृंखला का समापन ढोढ़ा गाँव में आयोजित सार्वजनिक गायत्री महायज्ञ के साथ हुआ। उपजोन समन्वयक श्री देवकीनंदन सिंह के अनुसार परिजन अभियान की उपलब्धियों से बहुत उत्साहित हैं। सितम्बर माह में भी ऐसी ही शृंखला चलाने का निर्णय किया गया है। 

इस शृंखला के अंतर्गत लोहडिया बाजार, बोआरीजोर, श्रीपुर, लिलातरी, घोरीचक आदि गाँवों में विशाल आयोजन सम्पन्न हुए। युवा मण्डल शक्तिपीठ गोड्डा  से जुड़े युवकों का कार्यक्रम में मुख्य सहयोग रहा। 

जोधपुर (राजस्थान) ः ग्राम वस्तवा वालेसर में शक्तिपीठ रातानाडा, जोधपुर के सौजन्य से आयोजित प्रज्ञापुराण कथा महोत्सव से जनजीवन आन्दोलित हो उठा। इस समारोह ने लोगों को सद्गुणों को अपनाने और अपने घर-परिवार को स्वर्ग बनाने की प्रेरणा दी। १० विद्यालयों में हुए कार्यक्रम और विशाल वृक्षारोपण अभियान ने कार्यक्रम की गरिमा और भी बढ़ा दी। 

विद्यालयों के कार्यक्रम में बच्चों को गायत्री मंत्र का महत्त्व बताये जाने के साथ प्रतिदिन उपासना करने, नशा न करने जैसी बहुमूल्य प्रेरणाएँ दी गयीं। साहित्य प्रदर्शनी भी लगायी गयी। इनमें १२००० रुपयों का साहित्य बच्चों ने खरीदा। 

मुजगहन, धमतरी (छत्तीसगढ़)
प्रकृति और संस्कृति का अन्योन्याश्रित संबंध है। हमारे सनातन संस्कृति परस्पर सहयोग और सम्मान की रही है। हम यज्ञभाव के साथ एक-दूसरे के हितों की रक्षा करते रहे हैं। आज स्वार्थ व्यक्ति पर हावी हो रहा है। संस्कृति की सीता का हरण हो रहा है। कभी सीता हरण ने रावण के विनाश का अध्याय लिखा था, आज संस्कृति की उपेक्षा द्वारा हम प्रकृति के प्रकोप झेलने को विवश हो रहे हैं। संस्कृति की रक्षा हमारा परम धर्म है। यदि संस्कृति नहीं बची तो प्रकृति रुष्ट होगी। प्रकृति के प्रकोप का सामना करना पड़ा तो हम भी नहीं बचेंगे। 

शांतिकुंज प्रतिनिधि श्री श्यामबिहारी दुबे ने यह विचार मुजगहन में आयोजित एक विचार गोष्ठी में व्यक्त किये। उन्होंने देश की रक्षा के लिए गौरक्षा और नारी सशक्तीकरण पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि अंधविश्वासों, कुरीतियों में जकड़ी नारी को इन बंधनों से निकलकर आत्म स्वरूप का बोध करना होगा। अपने कार्यकर्त्ताओं को लक्ष्मण जैसे संस्कृति के सजग प्रहरी की भूमिका निभाते हुए पूज्य गुरुदेव के विचार और शुभ संस्कार घर-घर, जन-जन तक पहुँचाने की आवश्यकता बतायी।

संगोष्ठी में जोन प्रभारी शांतिकुंज प्रतिनिधि श्री गंगाधर चौधरी, शांतिकुंज प्रतिनिधि श्री संतराम सेन भी उपस्थित थे। कार्यक्रम संचालन जिला समन्वयक श्री दिलीप कुमार नाग ने एवं आभार प्रदर्शन श्री हर्षद मेहता ने किया। 



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