• सहृदय, सेवाभावी प्राचार्या श्रीमती शांता सोनी को मिला राष्ट्रीय सम्मान
इंदौर (मध्य प्रदेश) ः पिंक फ्लावर उ.मा. विद्यालय, नंदा नगर इंदौर की प्राचार्या एवं मिशन की कर्मठ स्वयंसेविका श्रीमती शांता सोनी को ‘राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-२०१३’ से विभूषित हुईं। वे गुरुदेव के नैष्ठिक शिष्य स्व. मोतीलाल स्वर्णकार की बेटी हैं। उन्हें यह सम्मान राष्ट्रपति महोदय ने दिल्ली में शिक्षक दिवस पर प्रदान किया। 

श्रीमती शांता सोनी परम पूज्य गुरुदेव के विचारों का अनुसरण करते हुए संस्कारवान युवा पीढ़ी गढ़ने के लिए सतत प्रयत्नशील रही हैं। गुरुदेव की प्रेरणा से उन्होंने गरीब और मजदूर वर्ग के क्षेत्र को चुना। सन १९८० में मात्र ३ विद्यार्थियों से आरंभ किया गया उनका विद्यालय इंदौर के प्रतिष्ठित विद्यालयों में से एक है और ५००० विद्यार्थियों को शिक्षण दे रहा है। अब तक वे १०००० से अधिक विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षण दे चुकी हैं। 

श्रीमती शांता सोनी इससे पूर्व भी अनेक प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त कर चुकी हैं। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त करने के बाद भी कई संस्थाओं ने उन्हें सम्मानित किया।


हर तहसील में शिक्षक सम्मान समारोह
बड़वानी (मध्य प्रदेश)
भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा की जिला इकाई ने बड़वानी जिले की तहसीलों में शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित किये। ठीकरी, निवाली, सेंधवा,  खेतिया और जिला मुख्यालय बड़वानी में ये कार्यक्रम आयोजित हुए। जिला समन्वयक श्री महेन्द्र भावसार और श्री गोपालकृष्ण प्रजापति ने इनका संचालन करते हुए भावी संस्कृति के नवनिर्माण संबंधी परम पूज्य गुरुदेव की विचारधारा और शांतिकुंज की योजनाओं से अवगत कराया। 

प्रत्येक कार्यक्रम में औसतन ६० शिक्षकों को सम्मानित किया गया। समारोहों ने शिक्षक-पालकों में बच्चों के नवनिर्माण के प्रति जागरूकता बढ़ायी। निवाली में शिक्षक रियाज़ शेख ने अपने विद्यालय के शत प्रतिशत विद्यार्थियों को परीक्षा में शामिल कराने का उत्साह व्यक्त किया। खेतिया में आयोजित कार्यक्रम में श्री संजय शिरोड़े और श्री प्रकाश शार्दूल ने १० संस्कार शालाओं के संचालन की जिम्मेदारी ली। 

शिक्षक सम्मान समारोह शृंखला का समापन गायत्री शक्तिपीठ बड़वानी पर आयोजित कार्यक्रम से हुआ। मुख्य अतिथि श्री आर.के. जैन सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग और विशेष अतिथि श्री आर.के. रावत शिक्षा क्षेत्रीय अधिकारी ने गुरुजनों को सम्मानित किया। इस अवसर पर बड़वानी की सुश्री रेखा पुरोहित, महेन्द्र तोमर और सुशील दशोरे ने ११०० विद्यार्थियों को प्रेरित-प्रोत्साहित करने का संकल्प लिया। 

गणमान्यों द्वारा गरिमा बोध
बड़वानी (मध्य प्रदेश)
भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा की जिला इकाई ने बड़वानी जिले की तहसीलों में शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित किये। ठीकरी, निवाली, सेंधवा,  खेतिया और जिला मुख्यालय बड़वानी में ये कार्यक्रम आयोजित हुए। जिला समन्वयक श्री महेन्द्र भावसार और श्री गोपालकृष्ण प्रजापति ने इनका संचालन करते हुए भावी संस्कृति के नवनिर्माण संबंधी परम पूज्य गुरुदेव की विचारधारा और शांतिकुंज की योजनाओं से अवगत कराया। 

प्रत्येक कार्यक्रम में औसतन ६० शिक्षकों को सम्मानित किया गया। समारोहों ने शिक्षक-पालकों में बच्चों के नवनिर्माण के प्रति जागरूकता बढ़ायी। निवाली में शिक्षक रियाज़ शेख ने अपने विद्यालय के शत प्रतिशत विद्यार्थियों को परीक्षा में शामिल कराने का उत्साह व्यक्त किया। खेतिया में आयोजित कार्यक्रम में श्री संजय शिरोड़े और श्री प्रकाश शार्दूल ने १० संस्कार शालाओं के संचालन की जिम्मेदारी ली। 

शिक्षक सम्मान समारोह शृंखला का समापन गायत्री शक्तिपीठ बड़वानी पर आयोजित कार्यक्रम से हुआ। मुख्य अतिथि श्री आर.के. जैन सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग और विशेष अतिथि श्री आर.के. रावत शिक्षा क्षेत्रीय अधिकारी ने गुरुजनों को सम्मानित किया। इस अवसर पर बड़वानी की सुश्री रेखा पुरोहित, महेन्द्र तोमर और सुशील दशोरे ने ११०० विद्यार्थियों को प्रेरित-प्रोत्साहित करने का संकल्प लिया। 

खरगोन (मध्य प्रदेश)
शिक्षक वेतन भोगी कर्मचारी नहीं, राष्ट्र का सजग पुरोहित होता है। अपनी इस महान गरिमा को जानने वाले और विपरीत परिस्थितियों में भी अपना कर्त्तव्य निष्ठापूर्वक निभाने वाले ही सच्चे शिक्षक होते हैं। विद्यार्थियों में सहज भाव से अपने प्रति श्रद्धा उत्पन्न हो, ऐसा आचरण और अपनी गौरव-गरिमा बनाये रखना शिक्षक का धर्म है। 

गायत्री शक्तिपीठ खरगोन पर आयोजित शिक्षक दिवस समारोह में उपर्युक्त विचार मुख्य अतिथि श्री ब्रजेश कुमार पाण्डेय, सहायक आयुक्त ने व्यक्त किये। केन्द्रीय विद्यालय के प्राचार्य श्री ओ.एल. ब्रह्मचारी ने कहा कि शिक्षक भावी पीढ़ी का निर्माण करने वाला साँचा है, इसे ध्यान में रखकर प्रवाह में बहने की अपेक्षा देश और समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप अपने विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का निर्माण करना चाहिए। 

जिमलेप के संस्थापक श्री राकेश राणा, निमाणी कवि एवं व्यंगकार श्री ब्रजेश बड़ोले, सुश्री यशस्वी चौहान ने भी अपने-अपने ढंग से गुरु-गरिमा की याद दिलायी। गायत्री परिवार की ओर से श्रीमती सुनीता पाटीदार ने युग निर्माण आन्दोलन में शिक्षक की भूमिका बताते हुए पूज्य गुरुदेव का संदेश दिया। संतोष पाटीदार, गोपालकृष्ण अमझरे ने भी अपने विचार व्यक्त किये। गायत्री परिवार की ओर से उपस्थित गुरुजनों का भावभरा सम्मान किया गया।

सेंधवा, खरगोन (मध्य प्रदेश)
सैंधवा तहसील की भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा इकाई ने गायत्री शक्तिपीठ पर शिक्षक गरिमा सम्मान समारोह का आयोजन किया। शिक्षिका श्रीमती मीरा नरवाय एवं शिक्षक श्री दीपक चतुर्वेदी ने इस समारोह में उपस्थित गुरुजनों के समक्ष भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा से जुड़े विद्यार्थियों के जीवन में हो रहे परिवर्तनों की बानगी प्रस्तुत की। 

मुख्य अतिथि श्री संत कुमार सिंह प्राचार्य लॉयन कॉन्वेंट हायर सेकण्ड्री ने शिक्षक धर्म बताया। पं. मेवालाल पाटीदार ने शिक्षकों को उनकी गरिमा का बोध कराया। कॉटन एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री कैलाशचंद खण्डेलवाल ने ‘युगऋषि के संदेश’ ग्रंथ भेंटकर गुरुजनों का सम्मान किया। सभी शिक्षकों पर पुष्पवर्षा कर, उन्हें युगसाहित्य भेंट कर सम्मानित किया गया।

सैयदराजा, चंदौली (उत्तर प्रदेश)
गायत्री शक्तिपीठ सैयदराजा पर १७ अगस्त को शिक्षक सम्मेलन आयोजित हुआ, विषय था-भारतीय संस्कृति का अवमूल्यन, समाधान के उपाय एवं शिक्षकों की भूमिका। ५० से अधिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य, शिक्षक इसमें आमंत्रित थे। 

गायत्री परिवार ने वर्तमान शिक्षा प्रणाली में विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण के प्रति उदासीनता की ओर गुरुजनों का ध्यानाकर्षित किया। गुरुजनों ने भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा, संस्कृति मंडलों के गठन, बाल संस्कार शाला जैसी योजनाओं को प्रोत्साहित करने का आश्वासन दिया। 
श्री हरेन्द्र राय, प्रधानाचार्य सकलडीहा इं. कॉलेज  गोष्ठी के मुख्य वक्ता था। विशिष्ट अतिथि श्री एस.के. लाल, श्री जितेन्द्र जायसवाल, रामाश्रय सिंह, सतीश सिंह, डॉ. जगदीश राय, डॉ. दयानंद सरस्वती, खरपत्तू मौर्य, धनंजय जायसवाल ने अपने विचार व्यक्त किये। 

गोपालगंज (बिहार)
गायत्री शक्तिपीठ गोपालगंज पर भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा इकाई द्वारा शिक्षक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि केन्द्रीय विद्यालय के शिक्षक श्री एचएन ओझा सहित कई वक्ताओं ने उपस्थित शिक्षकों को संबोधित करते हुए देश और समाज के उत्कर्ष के लिए अपनी प्राचीन देव संस्कृति के उच्च आदर्श और मानकों की याद दिलायी। भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा की सफलता में योगदान देने का आह्वान किया गया। 

इस संगोष्ठी में जूही कुमारी को पुरस्कृत किया गया। सभी में जीवन देवता की साधना-आराधना नामक पुस्तक वितरित की गयी। 



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